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2029 तक एआई-जनित निष्कर्ष बनेंगे निजता का सबसे बड़ा खतरा, डेटा चोरी से भी ज़्यादा: गार्टनर रिपोर्ट

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2029 तक एआई-जनित निष्कर्ष बनेंगे निजता का सबसे बड़ा खतरा, डेटा चोरी से भी ज़्यादा: गार्टनर रिपोर्ट

सारांश

गार्टनर की नई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2029 तक निजता के सबसे बड़े खतरे डेटा चोरी से नहीं, बल्कि एआई के उन निष्कर्षों से आएँगे जो बिना किसी लीक के भी किसी व्यक्ति की संवेदनशील प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं। यह डिजिटल गोपनीयता की पूरी अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित करने की माँग करता है।

मुख्य बातें

गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक अधिकांश निजता घटनाएँ एआई-जनित इनफरेंस के कारण होंगी, न कि पीआईआई की सीधी चोरी से।
बार्ट विलेमसन (वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट, गार्टनर) के अनुसार दुनिया डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर बढ़ रही है।
जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग से साइबर हमलावर अनाम या एकत्रित डेटा से भी स्वास्थ्य स्थिति व व्यवहार पैटर्न का अनुमान लगा सकते हैं।
गार्टनर का अनुमान है कि 2028 तक कंपनियाँ डेटा गोपनीयता के बराबर डेटा अखंडता पर भी निवेश करेंगी।
रिपोर्ट में डिफरेंशियल प्राइवेसी , सिंथेटिक डेटा और एआई गवर्नेंस को प्राइवेसी रणनीति में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

रिसर्च एवं एडवाइजरी फर्म गार्टनर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2029 तक अधिकांश निजता-संबंधी घटनाएँ व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई) की सीधी चोरी या लीक से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा निकाले गए निष्कर्षों — यानी एआई-जनित इनफरेंस — के कारण होंगी। यह रिपोर्ट डिजिटल गोपनीयता के खतरे की प्रकृति में एक बुनियादी बदलाव की ओर इशारा करती है।

डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर

गार्टनर के वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट बार्ट विलेमसन के अनुसार, दुनिया अब डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर बढ़ रही है। उनका कहना है कि जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग में तेज़ प्रगति के चलते साइबर हमलावर अब सामान्य, अनाम या एकत्रित डेटा से भी किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार संबंधी पैटर्न और अन्य संवेदनशील जानकारियों का अनुमान लगा सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब अधिकांश कंपनियाँ अभी भी निजता को मुख्यतः डेटा सुरक्षा का विषय मानती हैं और पारंपरिक साइबर सुरक्षा ढाँचों पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि एआई-जनित इनफरेंस के मामले में किसी व्यक्ति का डेटा सीधे लीक नहीं होता — बल्कि एआई उपलब्ध सार्वजनिक या अनाम जानकारी से ऐसे निष्कर्ष तैयार कर देता है जो उसकी निजता को गहरे स्तर पर प्रभावित कर सकते हैं।

इनफरेंस अटैक क्यों हैं ज़्यादा खतरनाक

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इनफरेंस अटैक विशेष रूप से चिंताजनक हैं क्योंकि इन्हें पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रणालियाँ पहचान नहीं पातीं। किसी व्यक्ति का कोई डेटा उजागर नहीं होता, फिर भी एआई उसके बारे में ऐसी प्रोफाइल तैयार कर सकता है जो गलत, पक्षपातपूर्ण या अनधिकृत हो। इन्हें समझना, पहचानना और रोकना — तीनों ही काफी चुनौतीपूर्ण हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में निजता से जुड़े जोखिम इस बात पर अधिक निर्भर करेंगे कि एआई किसी व्यक्ति के बारे में क्या निष्कर्ष निकालता है, न कि केवल इस पर कि कौन-सा डेटा सार्वजनिक हुआ है।

डेटा अखंडता पर बढ़ेगा निवेश

गार्टनर का अनुमान है कि 2028 तक कंपनियाँ डेटा की गोपनीयता पर जितना खर्च करेंगी, लगभग उतना ही निवेश डेटा की अखंडता सुनिश्चित करने पर भी करेंगी। इसकी वजह एआई द्वारा तैयार की गई गलत या अनधिकृत प्रोफाइल से बढ़ता जोखिम होगा। यह कंपनियों के लिए बजट और रणनीति दोनों स्तरों पर एक बड़ा बदलाव होगा।

कंपनियों के लिए क्या है रास्ता

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि संस्थाओं को अपनी प्राइवेसी रणनीति में एआई गवर्नेंस को शामिल करना चाहिए। साथ ही डिफरेंशियल प्राइवेसी और सिंथेटिक डेटा जैसी तकनीकों को अपनाने, डेटा संग्रह को न्यूनतम रखने, सख्त एक्सेस कंट्रोल लागू करने और समय पर डेटा हटाने की प्रक्रियाओं को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया है — ताकि एआई-आधारित इनफरेंस हमलों की संभावना कम की जा सके।

जो संस्थाएँ अभी भी निजता को केवल डेटा सुरक्षा का विषय मानकर चल रही हैं, वे आने वाले वर्षों में इन नए खतरों के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि एआई-जनित इनफरेंस उस परिभाषा के बाहर काम करता है। भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 भी मुख्यतः डेटा संग्रह और भंडारण पर केंद्रित है — इनफरेंस-आधारित जोखिमों से निपटने का ढाँचा अभी भी अधूरा है। जब तक नियामक 'क्या डेटा लिया गया' से आगे बढ़कर 'एआई ने क्या निष्कर्ष निकाला' पर ध्यान नहीं देते, तब तक डेटा सुरक्षा कानून एक कदम पीछे ही रहेंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआई-जनित इनफरेंस से निजता को खतरा क्या होता है?
एआई-जनित इनफरेंस वह प्रक्रिया है जिसमें एआई सिस्टम सामान्य, अनाम या एकत्रित डेटा से किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार पैटर्न या अन्य संवेदनशील जानकारियाँ निकाल लेता है — बिना उसका निजी डेटा सीधे चुराए। गार्टनर के अनुसार यही 2029 तक निजता का सबसे बड़ा खतरा बनेगा।
गार्टनर की रिपोर्ट में 2029 के बारे में क्या कहा गया है?
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक अधिकांश निजता-संबंधी घटनाएँ पीआईआई की सीधी चोरी या लीक से नहीं, बल्कि एआई-जनित इनफरेंस के कारण होंगी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि 2028 तक कंपनियाँ डेटा गोपनीयता के बराबर डेटा अखंडता पर भी निवेश करेंगी।
इनफरेंस अटैक पारंपरिक साइबर हमलों से अलग कैसे हैं?
पारंपरिक साइबर हमलों में डेटा सीधे चुराया या लीक किया जाता है, जिसे सुरक्षा प्रणालियाँ पहचान सकती हैं। इनफरेंस अटैक में कोई डेटा लीक नहीं होता — एआई उपलब्ध सार्वजनिक या अनाम जानकारी से संवेदनशील प्रोफाइल बना देता है, जिसे पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रणालियाँ पहचान नहीं पातीं।
कंपनियाँ एआई-आधारित निजता जोखिमों से कैसे बच सकती हैं?
गार्टनर की सिफारिश है कि कंपनियाँ अपनी प्राइवेसी रणनीति में एआई गवर्नेंस शामिल करें और डिफरेंशियल प्राइवेसी व सिंथेटिक डेटा जैसी तकनीकें अपनाएँ। इसके साथ डेटा संग्रह को न्यूनतम रखना, सख्त एक्सेस कंट्रोल लागू करना और समय पर डेटा हटाना भी ज़रूरी बताया गया है।
क्या भारतीय कंपनियों को भी इस खतरे से सावधान रहना चाहिए?
हाँ, गार्टनर की रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर लागू होती है और भारतीय कंपनियाँ भी इससे अछूती नहीं हैं। जो संस्थाएँ निजता को केवल डेटा सुरक्षा का विषय मानती हैं, वे आने वाले वर्षों में एआई-आधारित इनफरेंस जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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