एयर इंडिया की गंभीर गलती, कनाडा की उड़ान ने 9 घंटे बाद दिल्ली लौटने का किया फैसला
सारांश
Key Takeaways
- एयर इंडिया की फ्लाइट एआई185 को मंजूरी नहीं मिलने के कारण वापस लौटाया गया।
- फ्लाइट ने 9 घंटे बाद दिल्ली लौटने का फैसला किया।
- यात्रियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की गई।
- ऐसी घटनाओं से एयरलाइन की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एयर इंडिया की एक फ्लाइट, जो दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर के लिए उड़ान भरने वाली थी, को लगभग 9 घंटे बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा। इसका कारण यह था कि जिस विमान का उपयोग किया गया था, उसे कनाडा के एविएशन रेगुलेटर से उड़ान भरने की स्वीकृति नहीं मिली थी।
सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया की फ्लाइट एआई185 ने गुरुवार दोपहर 12:18 बजे दिल्ली से वैंकूवर के लिए अपनी उड़ान शुरू की थी। इस रूट पर कंपनी को केवल बोइंग 777-300ईआर विमान की अनुमति है, लेकिन इस उड़ान में बोइंग 777-200एलआर का इस्तेमाल किया गया था।
बोइंग 777-300ईआर की उड़ान रेंज लगभग 13,650 किलोमीटर है और इसमें 350 से 396 यात्री बैठ सकते हैं, जबकि 777-200एलआर की रेंज अधिक यानी करीब 15,840 किलोमीटर है, लेकिन इसमें केवल 301 से 317 यात्रियों की क्षमता होती है।
फ्लाइट लगभग 4 घंटे बाद चीन के कुनमिंग के पास एयरस्पेस में पहुंच गई थी, तभी इस गलती का पता चला। इसके बाद पायलटों ने विमान को वापस दिल्ली मोड़ दिया।
लगभग 9 घंटे की लंबी उड़ान के बाद विमान सुरक्षित दिल्ली वापस पहुंच गया और सभी यात्री वहीं लौट आए, जहां से उन्होंने यात्रा शुरू की थी।
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि फ्लाइट एआई185 को एक ऑपरेशनल समस्या के कारण वापस लाया गया और सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया। विमान ने सुरक्षित लैंडिंग की और सभी यात्रियों व क्रू को उतार लिया गया।
उन्होंने कहा कि इस असुविधा के लिए यात्रियों से खेद है। दिल्ली में ग्राउंड स्टाफ ने यात्रियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की, जिसमें होटल की व्यवस्था भी शामिल थी। बाद में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई और अगली सुबह फ्लाइट वैंकूवर के लिए रवाना हो गई।
गौरतलब है कि इससे पहले भी एयर इंडिया को बिना आवश्यक अनुमति के विमान उड़ाने के मामले में समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
नवंबर 2025 में कंपनी ने एयरबस ए320नियो विमान से 8 उड़ानें चलाई थीं, जिनके पास वैध एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (एआरसी) नहीं था। इसके बाद जीजीसीए ने एयरलाइन पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।