एयरट्रंक का भारत में ₹3 लाख करोड़ का निवेश, 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य; PM मोदी ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
एयरट्रंक ने 5 जून 2025 को भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में ₹3 लाख करोड़ (30 अरब डॉलर) के निवेश की घोषणा की, जिसमें 2030 तक 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निवेश को भारत की डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया और देश के डिजिटल इकोसिस्टम में प्रस्तावित सबसे बड़े निवेशों में से एक करार दिया।
PM मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस निवेश का स्वागत करते हुए लिखा, "भारत की डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की यात्रा तेजी से गति पकड़ रही है। एयरट्रंक ने भारत में लगभग ₹3 लाख करोड़ (30 अरब डॉलर) का निवेश करने और 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने की योजना की घोषणा की है। यह देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में प्रस्तावित सबसे बड़े निवेशों में से एक है।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के निवेश से क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के वैश्विक हब के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन मिलेगा और इनोवेशन-आधारित विकास में तेजी आएगी। मोदी ने यह भी जोड़ा कि विश्व की डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य तेजी से भारत में आकार ले रहा है।
एयरट्रंक की भारत में प्रवेश की पृष्ठभूमि
ब्लैकस्टोन और कैनेडियन पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) द्वारा समर्थित एयरट्रंक ने भारतीय बाजार में अप्रैल 2025 में लुमिना क्लाउडइन्फ्रा के अधिग्रहण के माध्यम से प्रवेश किया था। कंपनी की योजना अगले पाँच वर्षों यानी 2030 तक भारत में यह पूरा निवेश पूरा करने की है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि एयरट्रंक से पहले भी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में एआई और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएँ कर चुकी हैं।
सीईओ रॉबिन खुदा का बयान
एयरट्रंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉबिन खुदा ने 5 जून को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। कंपनी की प्रेस रिलीज में खुदा ने कहा, "पूंजी गतिशील है, और भारत इसके फलने-फूलने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत एआई के लिए एक शीर्ष-स्तरीय दृष्टिकोण अपना रहा है, जिसमें स्पष्ट सरकारी पहल, विश्व स्तरीय प्रतिभाओं का भंडार और नवीकरणीय ऊर्जा की व्यापक उपलब्धता शामिल है। खुदा के अनुसार, "लुमिना के माध्यम से बाजार में प्रवेश करने से पहले ही हम भारत को लेकर बुलिश थे।"
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
इस निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होने, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को बल मिलने और भारत में तकनीकी इनोवेशन को गति मिलने की उम्मीद है। 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का विकास भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख डिजिटल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि एयरट्रंक अपनी घोषित क्षमता और निवेश को किस गति से ज़मीन पर उतारती है, और इससे भारत के डिजिटल इकोनॉमी लक्ष्यों को कितना बल मिलता है।