क्या अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज हो रही है?

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क्या अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज हो रही है?

सारांश

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। यह अमेरिकी टैरिफ के बावजूद हुआ है। जानें इसके पीछे के कारण और क्या है इसका अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

Key Takeaways

  • भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है।
  • सर्विसेज सेक्टर में मजबूत वृद्धि देखी गई है।
  • कृषि क्षेत्र में विकास दर 3.7 प्रतिशत रही है।
  • सरकारी उपभोग व्यय में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • निजी उपभोग व्यय की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रही है।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी टैरिफ के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून अवधि) में 7.8 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6.5 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी की गई।

एनएसओ द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून अवधि में देश की रियल जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपए रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 44.42 लाख करोड़ रुपए थी।

समीक्षा अवधि में नॉमिनल जीडीपी वर्तमान मूल्य में 86.05 लाख करोड़ रुपए रही है, जो कि वित्त वर्ष 25 की समान अवधि के आंकड़े 79.08 लाख करोड़ रुपए से 8.8 प्रतिशत अधिक है।

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की मजबूत वृद्धि दर के कारण रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ग्रोथ 7.6 प्रतिशत पर रही है।

कृषि और संबंधित क्षेत्रों की रियल जीवीए ग्रोथ वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 3.7 प्रतिशत रही है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 1.5 प्रतिशत थी।

द्वितीय क्षेत्र की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7.5 प्रतिशत रही है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग की विकास दर 7.7 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन की विकास दर 7.6 प्रतिशत रही है।

तृतीय क्षेत्र, जिसमें सर्विसेज शामिल हैं, की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 9.3 प्रतिशत रही है।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 9.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 4 प्रतिशत था।

हालांकि, निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 8.3 प्रतिशत थी।

Point of View

हम यह देख सकते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह दर्शाता है कि सरकार की नीतियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती से अर्थव्यवस्था में सुधार संभव है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर कितनी है?
भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही है।
अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिला है।
रियल जीडीपी का आंकड़ा क्या है?
वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपए रही है।
सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में कितनी वृद्धि हुई है?
वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सरकारी अंतिम उपभोग व्यय 9.7 प्रतिशत बढ़ा है।
कृषि क्षेत्र की विकास दर कितनी है?
कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की रियल जीवीए ग्रोथ 3.7 प्रतिशत रही है।