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एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट: 70 स्टार्टअप्स ने माँगा ₹1,500 करोड़ का निवेश, युवा इनोवेटर्स की भागीदारी दोगुनी

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एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट: 70 स्टार्टअप्स ने माँगा ₹1,500 करोड़ का निवेश, युवा इनोवेटर्स की भागीदारी दोगुनी

सारांश

एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट के दूसरे संस्करण में 70 स्टार्टअप्स ने ₹1,500 करोड़ की माँग रखी और युवा इनोवेटर्स की भागीदारी दोगुनी होकर 30% पर पहुँच गई — यह संकेत है कि भारत का अगला स्टार्टअप उभार महानगरों से नहीं, छोटे शहरों और गाँवों से आएगा।

मुख्य बातें

एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट के दूसरे संस्करण में देशभर के करीब 70 स्टार्टअप्स ने ₹1,500 करोड़ के निवेश की माँग रखी।
देशभर से 450 से अधिक आवेदनों में से 200 स्टार्टअप्स शॉर्टलिस्ट किए गए; 28 प्रमुख निवेशकों ने वन-ऑन-वन पिचिंग सेशन में भाग लिया।
युवा इनोवेटर्स की हिस्सेदारी पहले संस्करण के 15% से बढ़कर इस बार 30% हो गई।
स्टार्टअप्स ने डिफेंस टेक, स्पेस टेक, क्लाइमेट टेक, फिनटेक, हेल्थ टेक, एग्रीटेक सहित 13 से अधिक क्षेत्रों में नवाचार प्रस्तुत किए।
प्रियंका शुक्ला ने कहा कि भविष्य के स्टार्टअप फाउंडर्स टियर-2, टियर-3, टियर-4 शहरों और आकांक्षी जिलों से उभरेंगे।

नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट के दूसरे संस्करण में देशभर के करीब 70 स्टार्टअप्स ने कुल मिलाकर लगभग ₹1,500 करोड़ के निवेश की माँग रखी। 25 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमियों, निवेशकों, कॉरपोरेट कंपनियों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाकर भारत के इनोवेशन-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को और सुदृढ़ करना था। यह आयोजन भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य में बढ़ती निवेश भूख और उद्यमशीलता की लहर का प्रमाण बनकर उभरा।

चयन प्रक्रिया और भागीदारी

इस संस्करण के लिए देशभर से 450 से अधिक स्टार्टअप्स ने आवेदन किया था। निवेशकों की प्राथमिकताओं और कड़े मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर इनमें से 200 स्टार्टअप्स को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें से अंततः 70 स्टार्टअप्स ने पिचिंग सेशन में भाग लिया। कार्यक्रम में 28 प्रमुख निवेशकों ने शॉर्टलिस्ट स्टार्टअप्स के साथ वन-ऑन-वन पिचिंग सेशन में सीधी बातचीत की।

युवा इनोवेटर्स की बढ़ती हिस्सेदारी

इस बार के आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता युवा इनोवेटर्स की बढ़ी हुई भागीदारी रही। पहले संस्करण में जहाँ उनकी हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत थी, वह इस बार बढ़कर करीब 30 प्रतिशत हो गई — यानी दोगुनी वृद्धि। यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारत के युवाओं में उद्यमिता की भावना तेज़ी से पनप रही है और यह केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

विशेषज्ञों की राय

युवा मामलों के विभाग के अंतर्गत माई भारत की सीईओ डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'भारत के युवाओं के पास विचारों की कोई कमी नहीं है। उन्हें केवल अवसर, सही मार्गदर्शन, अनुभव और संसाधनों तक पहुँच की जरूरत है। आने वाले समय के सफल स्टार्टअप फाउंडर्स सिर्फ महानगरों से ही नहीं, बल्कि टियर-2, टियर-3, टियर-4 शहरों, गाँवों और आकांक्षी जिलों से भी सामने आएंगे।'

एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब के सीईओ डॉ. पन्नीरसेल्वम मदनगोपाल ने कहा कि स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच मजबूत साझेदारी भविष्य की टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनियों को नई दिशा देगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाले, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) विकसित करने वाले और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के साथ टिकाऊ कारोबार खड़ा करने वाले स्टार्टअप्स भारत की इनोवेशन-आधारित आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगे।

एसोचैम की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल डॉ. अंबिका शर्मा ने कहा, 'हम टियर-2 और टियर-3 शहरों तक अपनी पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे सार्थक सहयोग विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो इनोवेशन को बड़े और सफल कारोबार में बदल सकें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का लक्ष्य संभावनाशील स्टार्टअप्स को केवल पूँजी नहीं, बल्कि मेंटरशिप, मार्केट लिंकेज और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप भी उपलब्ध कराना है।

किन क्षेत्रों से आए स्टार्टअप्स

इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्टार्टअप्स ने विविध और उभरते क्षेत्रों में अपने बिज़नेस मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें डिफेंस टेक, स्पेस टेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लाइमेट टेक, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक, SaaS, कंज्यूमर टेक, EV और मोबिलिटी, हेल्थ टेक, क्लीन टेक, एग्रीटेक और IT/ITeS जैसे क्षेत्र शामिल थे। यह विविधता भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की परिपक्वता और गहराई को रेखांकित करती है।

आगे की राह

एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट का यह दूसरा संस्करण यह संकेत देता है कि भारत में स्टार्टअप फंडिंग की माँग और आपूर्ति दोनों में गति आ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वेंचर कैपिटल निवेश में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय स्टार्टअप्स निवेशकों का ध्यान खींचने में सफल हो रहे हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों से बढ़ती भागीदारी यह भी दर्शाती है कि अगली पीढ़ी का इनोवेशन भारत के हर कोने से उभरने को तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ की माँग और 450 आवेदनों में से 70 स्टार्टअप्स का चयन — ये आँकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि पिचिंग सेशन से वास्तविक फंडिंग तक कितने स्टार्टअप्स पहुँचते हैं। युवा इनोवेटर्स की भागीदारी दोगुनी होना सकारात्मक संकेत है, परंतु टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँच का दावा तब तक अधूरा है जब तक इन आयोजनों का भूगोल भी बदले। गौरतलब है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम फंडिंग की कमी से उतना नहीं जूझता जितना मेंटरशिप और मार्केट लिंकेज की कमी से — और इसी पर एसोचैम के वादे की परीक्षा होगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट क्या है?
एसोचैम इन्वेस्टर कनेक्ट एक ऐसा मंच है जो स्टार्टअप्स, निवेशकों, कॉरपोरेट कंपनियों और नीति-निर्माताओं को एक जगह लाकर भारत के इनोवेशन-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करता है। इसका दूसरा संस्करण 25 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
इस कार्यक्रम में कितने स्टार्टअप्स ने भाग लिया और कितना निवेश माँगा?
कार्यक्रम में देशभर के करीब 70 स्टार्टअप्स ने भाग लिया और कुल मिलाकर लगभग ₹1,500 करोड़ के निवेश की माँग रखी। 450 से अधिक आवेदनों में से 200 स्टार्टअप्स शॉर्टलिस्ट किए गए थे।
युवा इनोवेटर्स की भागीदारी में क्या बदलाव आया?
पहले संस्करण में युवा इनोवेटर्स की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत थी, जो इस बार बढ़कर करीब 30 प्रतिशत हो गई — यानी दोगुनी वृद्धि। यह भारत के युवाओं में बढ़ती उद्यमिता की भावना को दर्शाता है।
किन क्षेत्रों के स्टार्टअप्स ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया?
स्टार्टअप्स ने डिफेंस टेक, स्पेस टेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लाइमेट टेक, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक, SaaS, कंज्यूमर टेक, EV और मोबिलिटी, हेल्थ टेक, क्लीन टेक, एग्रीटेक और IT/ITeS जैसे क्षेत्रों में अपने बिज़नेस मॉडल प्रस्तुत किए।
एसोचैम का टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स के लिए क्या योजना है?
एसोचैम की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल डॉ. अंबिका शर्मा के अनुसार, संगठन टियर-2 और टियर-3 शहरों तक अपनी पहुँच बढ़ाने और ऐसे सहयोग विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो इनोवेशन को सफल कारोबार में बदल सकें। लक्ष्य स्टार्टअप्स को पूँजी के साथ-साथ मेंटरशिप, मार्केट लिंकेज और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप भी उपलब्ध कराना है।
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