बैंक ऑफ बड़ौदा ने बीआर शेट्टी से ₹2,800 करोड़ वसूली के लिए भारत-यूएई में कसा शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 14 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि वह यूएई के कारोबारी बीआर शेट्टी से ₹2,800 करोड़ की बकाया राशि वसूलने के लिए भारत और यूएई दोनों में कानूनी कार्यवाही जारी रखे हुए है, और इस सिलसिले में कई अदालती आदेश भी हासिल कर चुका है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब शेट्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में बैंक के खिलाफ 15 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया है।
मामले का पृष्ठभूमि
एनएमसी हेल्थ के संस्थापक बीआर शेट्टी एक समय खाड़ी देशों की सबसे बड़ी निजी हेल्थकेयर कंपनी के मालिक थे। कंपनी में महीनों की वित्तीय अनियमितताओं के बाद 2020 में उसे प्रशासन के तहत लाया गया। तब कंपनी ने 6.6 अरब डॉलर के कर्ज का खुलासा किया, जबकि पहले यह अनुमान महज 2.1 अरब डॉलर था — यानी वास्तविक देनदारी तीन गुना से अधिक निकली।
गौरतलब है कि यह मामला केवल बैंक और एक कारोबारी के बीच का विवाद नहीं है — बल्कि यह उस बड़े घोटाले से जुड़ा है जिसने खाड़ी क्षेत्र के हेल्थकेयर क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था।
बैंक का आधिकारिक पक्ष
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा, 'बैंक को ऐसा कोई मुकदमा नहीं मिला है और बैंक उन दावों या आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता जिनकी अदालत में अभी तक जाँच नहीं हुई है। जब बैंक को मुकदमे की सूचना मिलेगी, तो बैंक मजबूती से अपना पक्ष रखेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।'
बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक कोई अदालती आदेश नहीं आता, संभावित नुकसान के लिए कोई प्रोविजन बनाने की आवश्यकता नहीं है।
पहले के अदालती आदेश और कार्यवाही
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2021 में शेट्टी को अपनी संपत्ति का लेनदेन करने या उसे किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करने से रोक दिया था। इसके अलावा, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में हुई सुनवाई के दौरान स्वयं शेट्टी ने स्वीकार किया था कि वह दिवालिया हो चुके हैं और बैंक का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।
इससे पहले शेट्टी ने न्यूयॉर्क राज्य की सुप्रीम कोर्ट में भी बैंक के खिलाफ इसी प्रकार का मुकदमा दायर किया था, जिसे वहाँ की अदालत ने खारिज कर दिया था।
अबू धाबी की अदालत में स्थिति
बैंक ने बताया कि अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट में शेट्टी और एनएमसी हेल्थकेयर के पूर्व सीईओ प्रशांत मंगहट के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत तरीके से ट्रेडिंग और धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग के आरोपों पर फैसला सुरक्षित रखा गया था। हालाँकि एनएमसी ग्रुप के संयुक्त प्रशासकों के साथ समझौते के बाद बैंक के खिलाफ ADGM की कार्यवाही रोक दी गई थी।
शेट्टी का आरोप और बैंक का जवाब
शेट्टी का आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा के कई मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने एक ऐसे कथित वित्तीय फ्रॉड में सहयोग किया जिसके चलते खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाला यह हेल्थकेयर समूह बर्बाद हो गया। बैंक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने हितों की 'मजबूती से रक्षा' करेगा। यह मामला दो देशों की अदालतों में एक साथ चल रहा है, जो इसे भारतीय सार्वजनिक बैंकिंग क्षेत्र के लिए सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय विधिक लड़ाइयों में से एक बनाता है।