6 अक्टूबर 2026
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डीएफएस सचिव संजय लोहिया का बैंकों को निर्देश: लोन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल करें, वित्तीय समावेशन बढ़ाएं

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डीएफएस सचिव संजय लोहिया का बैंकों को निर्देश: लोन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल करें, वित्तीय समावेशन बढ़ाएं

सारांश

DFS सचिव संजय लोहिया ने सार्वजनिक और निजी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया — लोन प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल हो, जन सुरक्षा पोर्टल से पंजीकरण अनिवार्य हो, और निजी बैंक वित्तीय समावेशन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएँ। यह बैठक सरकार के डिजिटल बैंकिंग विस्तार एजेंडे की गंभीरता को दर्शाती है।

मुख्य बातें

DFS सचिव संजय लोहिया ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सभी PSB प्रमुखों और प्रमुख PVB के कार्यकारी निदेशकों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैंकों को ऋणों की एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग और डिजिटल पहुँच बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
UPI-आधारित क्रेडिट लाइन और CCME के ज़रिये सूक्ष्म उद्यमों तक ऋण पहुँच सुनिश्चित करने पर ज़ोर।
PMJJBY और PMSBY के नए लाभार्थियों का पंजीकरण अब जन सुरक्षा पोर्टल से होगा, जिसे सभी बैंकों-बीमा कंपनियों से एकीकृत किया जाएगा।
निजी क्षेत्र के बैंकों से PMJDY, APY, PM मुद्रा सहित वित्तीय समावेशन योजनाओं में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह।
बैंकिंग सेवाओं से वंचित गाँवों में बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BC) की तैनाती की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव संजय लोहिया ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के प्रमुखों और प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों (PVB) के कार्यकारी निदेशकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि बैंकों को अपनी डिजिटल पहुँच और विस्तृत करनी होगी तथा ऋणों की एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रमुख योजनाओं के ज़रिये वित्तीय समावेशन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, परंतु अभी और काम बाकी है।

बैठक का एजेंडा और प्रमुख योजनाएँ

इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), स्टैंड-अप इंडिया, PM स्वनिधि, PM विश्वकर्मा, PM सूर्य घर योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सहित कई योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में DFS के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार देश के हर कोने तक डिजिटल बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाने के अपने लक्ष्य को गति देने पर जोर दे रही है।

सूक्ष्म उद्यमों के लिए डिजिटल क्रेडिट पर ज़ोर

बैठक में सूक्ष्म उद्यमों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए UPI-आधारित क्रेडिट लाइन और क्रेडिट कार्ड फॉर माइक्रो एंटरप्राइजेज (CCME) जैसे डिजिटल माध्यमों पर विशेष चर्चा की गई। लोहिया ने कहा कि इन माध्यमों का उद्देश्य छोटे कारोबारियों तक आसान और त्वरित ऋण पहुँच सुनिश्चित करना है।

गौरतलब है कि भारत में करोड़ों सूक्ष्म उद्यम अभी भी औपचारिक ऋण प्रणाली से बाहर हैं और उन्हें अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। UPI-आधारित क्रेडिट इस अंतर को पाटने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

बीमा योजनाओं में जागरूकता और दावा निपटान पर निर्देश

संजय लोहिया ने बैंकों को निर्देशित किया कि जन सुरक्षा बीमा योजनाओं के तहत दावा पात्रता के बारे में आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि लाभार्थी की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की स्थिति में नामांकित व्यक्ति को समय पर दावा राशि मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि इन योजनाओं से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में विशेष सावधानी बरती जाए और दावों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

DFS सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि PMJJBY और PMSBY के सभी नए लाभार्थियों का पंजीकरण जन सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से किया जाए। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल को सभी बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा की गुणवत्ता और परिचालन की सुगमता दोनों में सुधार होगा।

निजी बैंकों से अधिक भागीदारी का आग्रह

लोहिया ने निजी क्षेत्र के बैंकों से वित्तीय समावेशन योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने का विशेष आग्रह किया। आलोचकों का कहना है कि सरकारी वित्तीय समावेशन योजनाओं में निजी बैंकों की उपस्थिति अब भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में काफी कम है।

बैठक में अटल पेंशन योजना (APY) के परसिस्टेंसी अनुपात — अर्थात लाभार्थियों की योजना में निरंतर भागीदारी — बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बैंक शाखाओं का विस्तार और बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स की तैनाती

समीक्षा बैठक में बैंक शाखाओं के विस्तार और बैंकिंग सेवाओं से वंचित गाँवों में बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BC) की तैनाती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर हिस्से तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो और डिजिटल वित्तीय समावेशन को और मज़बूत किया जाए। आगे चलकर इन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी DFS स्तर पर नियमित रूप से की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। भारत में वित्तीय समावेशन के आँकड़े प्रभावशाली दिखते हैं — करोड़ों जन धन खाते, बीमा नामांकन — परंतु 'निष्क्रिय खाते' और 'अदावी बीमा राशियाँ' लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। जन सुरक्षा पोर्टल के एकीकरण की घोषणा स्वागतयोग्य है, लेकिन यह तभी अर्थपूर्ण होगी जब दावा निपटान की औसत समयसीमा सार्वजनिक रूप से मापी और प्रकाशित की जाए। निजी बैंकों से 'आग्रह' की जगह बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारण की ज़रूरत पर विशेषज्ञ लंबे समय से जोर देते रहे हैं — यह चूक अभी भी बनी हुई है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DFS सचिव ने बैंकों को डिजिटल लोन प्रोसेसिंग के लिए क्यों कहा?
DFS सचिव संजय लोहिया ने 6 अक्टूबर 2026 की समीक्षा बैठक में बैंकों को निर्देश दिया कि ऋणों की एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि आवेदन से वितरण तक की प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और सुलभ हो। सरकार का मानना है कि डिजिटलीकरण से छोटे कारोबारियों और ग्रामीण लाभार्थियों तक ऋण पहुँच बेहतर होगी।
जन सुरक्षा पोर्टल क्या है और इसे बैंकों से कैसे जोड़ा जाएगा?
जन सुरक्षा पोर्टल एक केंद्रीय डिजिटल मंच है जिसके माध्यम से PMJJBY और PMSBY के नए लाभार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा। DFS के अनुसार, इस पोर्टल को सभी बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा की गुणवत्ता और परिचालन सुगमता दोनों में सुधार होगा।
CCME और UPI क्रेडिट लाइन सूक्ष्म उद्यमों की कैसे मदद करेंगे?
क्रेडिट कार्ड फॉर माइक्रो एंटरप्राइजेज (CCME) और UPI-आधारित क्रेडिट लाइन छोटे कारोबारियों को डिजिटल माध्यम से त्वरित कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के साधन हैं। इनका उद्देश्य उन सूक्ष्म उद्यमों तक औपचारिक ऋण पहुँचाना है जो अब तक बैंकिंग प्रणाली से बाहर हैं।
निजी बैंकों से वित्तीय समावेशन में क्या अपेक्षा की गई?
DFS सचिव ने निजी क्षेत्र के बैंकों से PMJDY, APY, PM मुद्रा सहित प्रमुख वित्तीय समावेशन योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। बैठक में यह रेखांकित किया गया कि इन योजनाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में निजी बैंकों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम है।
बैठक में किन-किन योजनाओं की समीक्षा की गई?
बैठक में PMJDY, PMJJBY, PMSBY, APY, PM मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, PM स्वनिधि, PM विश्वकर्मा, PM सूर्य घर योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बैंक शाखाओं के विस्तार और बैंकिंग-वंचित गाँवों में बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स की तैनाती पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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