क्या आप जानते हैं आईपीओ में जीएमपी, रजिस्ट्रार और बुक रनिंग लीड मैनेजर का क्या काम होता है?
सारांश
Key Takeaways
- आईपीओ में जीएमपी का ध्यान रखें।
- रजिस्ट्रार की भूमिका को समझें।
- बीआरएलएम के कार्यों को जानें।
- सिर्फ जीएमपी पर निर्भर न रहें, अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दें।
- प्रमाणिक जानकारी का उपयोग करें।
मुंबई, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शेयर बाजार में अधिकतर निवेशक कम समय में अच्छे मुनाफे के लिए अक्सर आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफर) की ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन, आईपीओ में निवेश करने से पहले इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी होना बहुत आवश्यक है। इनमें सबसे सामान्य सवाल यह है कि जीएमपी क्या होता है, रजिस्ट्रार की भूमिका क्या है और बुक रनिंग लीड मैनेजर आखिर क्या करता है। सही जानकारी के बिना आईपीओ में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए इसके बारे में जानना अत्यंत आवश्यक है।
आईपीओ में जीएमपी (ग्रे मार्केट प्रीमियम) एक अनौपचारिक संकेत है, जो दर्शाता है कि किसी कंपनी के शेयर लिस्टिंग से पहले अनलिस्टेड यानी ग्रे मार्केट में कितने प्रीमियम पर व्यापार कर रहे हैं। जैसे कि मान लीजिए किसी आईपीओ का इश्यू प्राइस 100 रुपए है और उसका जीएमपी 40 रुपए है, तो इसका अर्थ है कि शेयर की लिस्टिंग लगभग 140 रुपए के आसपास हो सकती है। हालाँकि यह सिर्फ बाजार की धारणा पर निर्भर करता है, इसे न तो सेबी नियंत्रित करता है और न ही इसकी कोई गारंटी होती है। कई बार अच्छा जीएमपी होने के बावजूद शेयर कमजोर लिस्ट होते हैं और कभी-कभी बिना जीएमपी के भी शानदार लिस्टिंग देखने को मिलती है।
वहीं, रजिस्ट्रार वह संस्था होती है जो आईपीओ से संबंधित प्रशासनिक और ऑपरेशनल कार्यों का प्रबंधन करती है। इसमें निवेशकों से प्राप्त आवेदन, शेयरों का आवंटन (अलॉटमेंट), रिफंड की प्रक्रिया और डीमैट खाते में शेयरों का ट्रांसफर शामिल होता है। सरल शब्दों में कहें तो रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करता है कि किस निवेशक को कितने शेयर मिले और पैसे का सही तरीके से एडजस्टमेंट हो।
बुक रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) आईपीओ की संपूर्ण योजना और प्रबंधन की जिम्मेदारी लेता है। आमतौर पर यह बड़ी निवेश बैंक या ब्रोकरेज फर्म होती हैं, जो कंपनी को यह तय करने में मदद करती हैं कि आईपीओ का साइज कितना होना चाहिए, प्राइस बैंड क्या रखा जाए और निवेशकों से कितनी मांग हो सकती है। बीआरएलएम संस्थागत निवेशकों से बात करता है और पूरे इश्यू को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, बीआरएलएम आईपीओ की मार्केटिंग करता है, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोड शो आयोजित करता है और अंडरराइटर्स, रजिस्ट्रार तथा अन्य मध्यस्थों के साथ समन्वय बनाकर काम करता है। इसका उद्देश्य यह है कि आईपीओ को अच्छा रिस्पॉन्स मिले और पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरी हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईपीओ प्रक्रिया में रजिस्ट्रार और बुक रनिंग लीड मैनेजर, दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, और इनके सही तालमेल से ही कोई आईपीओ सफल हो पाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि सिर्फ जीएमपी देखकर आईपीओ में निवेश करना सही रणनीति नहीं है। कंपनी का बिजनेस मॉडल, मुनाफे का रिकॉर्ड, कर्ज की स्थिति, भविष्य की योजनाएं और रिस्क फैक्टर भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। आईपीओ के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ना चाहिए, जिसे सेबी की वेबसाइट और स्टॉक एक्सचेंज की साइट्स पर उपलब्ध कराया जाता है।
अगर विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों की बात करें तो सेबी, एनएसई और BSE की वेबसाइट पर आईपीओ से जुड़ी सारी प्रमाणिक जानकारी मिलती है। समझदारी इसी में है कि निवेशक अफवाहों या ग्रे मार्केट के भरोसे नहीं, बल्कि ठोस जानकारी और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही आईपीओ में निवेश करें।