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बिटकॉइन 60,000 डॉलर से नीचे फिसला, अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार; उच्चतम स्तर से 50% से अधिक की गिरावट

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बिटकॉइन 60,000 डॉलर से नीचे फिसला, अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार; उच्चतम स्तर से 50% से अधिक की गिरावट

सारांश

बिटकॉइन अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 60,000 डॉलर से नीचे आया — 1.26 लाख डॉलर के शिखर से आधे से अधिक की गिरावट। संस्थागत निकासी, AI और सोने की ओर पूँजी का पलायन, और फेड की सख्त नीति की आशंका ने मिलकर क्रिप्टो बाज़ार को दबाव में ला दिया है।

मुख्य बातें

बिटकॉइन 6 जून 2025 को 59,101 डॉलर तक गिरा — अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 60,000 डॉलर से नीचे।
अक्टूबर 2024 के 1.26 लाख डॉलर के उच्चतम स्तर से बिटकॉइन अपनी कीमत का 50% से अधिक गँवा चुका है।
केवल जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF से 3 अरब डॉलर से अधिक की निकासी हुई।
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेड चेयरमैन के लिए नामित किए जाने से सख्त मौद्रिक नीति की आशंका बढ़ी।
विशेषज्ञों की नज़र 60,000–62,000 डॉलर के समर्थन स्तर पर; इसके टूटने पर माइनर्स को होल्डिंग बेचने की नौबत आ सकती है।

बिटकॉइन 6 जून 2025 को अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 60,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक समर्थन स्तर से नीचे गिर गया, जो दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक बड़ा झटका है। शनिवार सुबह इसमें करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कीमत 59,101 डॉलर के निचले स्तर तक पहुँची। बाद में यह 59,743.21 डॉलर के आसपास कारोबार करती देखी गई।

गिरावट का दायरा

यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बिटकॉइन अक्टूबर 2024 में 1.26 लाख डॉलर से अधिक के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँचा था। तब से अब तक यह अपनी कीमत का आधे से अधिक हिस्सा गँवा चुका है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा चुनाव जीतने के बाद बिटकॉइन निवेशकों की पहली पसंद बन गया था और उसी दौर में इसने रिकॉर्ड ऊँचाई छुई थी।

गिरावट के प्रमुख कारण

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, बिटकॉइन पर दबाव का सबसे बड़ा कारण तरलता (लिक्विडिटी) में बदलाव है — खासकर संस्थागत निवेशकों द्वारा निवेश में कमी। निवेशकों की पूँजी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो रही है, जिससे क्रिप्टो बाज़ार से पूँजी का बहिर्गमन हो रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि सोने और AI-संबंधित कंपनियों के शेयरों में बढ़ती दिलचस्पी ने भी क्रिप्टोकरेंसी की माँग को प्रभावित किया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को लेकर निवेशकों का बदला हुआ नज़रिया भी क्रिप्टो बाज़ार पर भारी पड़ रहा है।

ट्रंप का फेड नामांकन और बाज़ार पर असर

क्रिप्टो बाज़ार में उत्साह उस समय और कम हो गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेडरल रिज़र्व के नए चेयरमैन पद के लिए अपनी पसंद बताया। निवेशकों को आशंका है कि वॉर्श के नेतृत्व में फेड अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति अपना सकता है, जिससे केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट छोटी होगी और बाज़ार में उपलब्ध तरलता घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरलता अब तक क्रिप्टोकरेंसी जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों को समर्थन देती रही है।

ETF से निकासी और माइनर्स पर दबाव

हाल की रिपोर्टों के अनुसार, संस्थागत निवेशक लगातार बाज़ार से पैसा निकाल रहे हैं। केवल जनवरी में ही अमेरिका के स्पॉट बिटकॉइन ETF से 3 अरब डॉलर से अधिक की निकासी दर्ज की गई। बाज़ार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि गिरावट जारी रही तो क्रिप्टो माइनिंग कंपनियों पर नकदी प्रवाह का दबाव बढ़ सकता है और कई माइनर्स को मजबूरन अपनी होल्डिंग बेचनी पड़ सकती है, जिससे बाज़ार पर और दबाव बनेगा।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों की नज़र अब इस बात पर है कि बिटकॉइन 60,000 से 62,000 डॉलर के महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र को बनाए रख पाता है या नहीं। यदि यह स्तर बना रहा तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। निकट भविष्य में ETF में निवेश प्रवाह, संस्थागत भागीदारी, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ बिटकॉइन की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि क्रिप्टो बाज़ार के अगले विकास चरण को स्पष्ट नियामकीय ढाँचे, स्टेबलकॉइन में नवाचार और वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनाइज़ेशन से गति मिलेगी। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय अपनी निवेश अवधि, जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो आवंटन पर ध्यान दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'डिजिटल गोल्ड' का तमगा खुद ही सवालों के घेरे में आ जाता है। केविन वॉर्श का फेड नामांकन एक और संकेत है कि सस्ती तरलता का वह दौर समाप्त हो सकता है जिसने क्रिप्टो को पाला-पोसा। असली परीक्षा यह है कि 60,000 डॉलर का समर्थन स्तर टूटने पर माइनर्स की जबरन बिकवाली बाज़ार को और कितना नीचे खींचती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिटकॉइन 60,000 डॉलर से नीचे क्यों गिरा?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, संस्थागत निवेशकों द्वारा निवेश में कमी, AI और सोने की ओर पूँजी का स्थानांतरण, तथा फेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंका — ये तीन प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेड चेयरमैन के लिए नामित किए जाने से बाज़ार में तरलता घटने की आशंका और बढ़ी।
बिटकॉइन अपने उच्चतम स्तर से कितना गिर चुका है?
बिटकॉइन अक्टूबर 2024 में 1.26 लाख डॉलर से अधिक के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँचा था। 6 जून 2025 को यह 59,101 डॉलर तक गिर गया, यानी अपनी चोटी की कीमत का 50% से अधिक गँवा चुका है।
बिटकॉइन ETF से कितनी निकासी हुई है?
रिपोर्टों के अनुसार केवल जनवरी में ही अमेरिका के स्पॉट बिटकॉइन ETF से 3 अरब डॉलर से अधिक की निकासी दर्ज की गई। संस्थागत निवेशकों की यह लगातार निकासी क्रिप्टो बाज़ार पर दबाव का एक बड़ा कारण बनी हुई है।
केविन वॉर्श के फेड चेयरमैन बनने से क्रिप्टो पर क्या असर होगा?
निवेशकों को आशंका है कि वॉर्श के नेतृत्व में फेडरल रिज़र्व सख्त मौद्रिक नीति अपनाएगा, जिससे बाज़ार में तरलता कम होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यही तरलता अब तक बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों को सहारा देती रही है, इसलिए इसके घटने से क्रिप्टो पर और दबाव पड़ सकता है।
आगे बिटकॉइन की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों की नज़र 60,000–62,000 डॉलर के समर्थन स्तर पर है। यदि यह स्तर बना रहा तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है, अन्यथा माइनिंग कंपनियों की जबरन बिकवाली बाज़ार को और नीचे खींच सकती है। ETF प्रवाह, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और नियामकीय स्पष्टता निकट भविष्य की दिशा तय करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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