कच्चे तेल की कीमतों में 3.66%25 की वृद्धि, 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर के निकट

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कच्चे तेल की कीमतों में 3.66%25 की वृद्धि, 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर के निकट

सारांश

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि यह वृद्धि भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय है। क्या बाजार पर इसका प्रभाव और बढ़ेगा?

Key Takeaways

  • कच्चे तेल की कीमतें 3.66%25 बढ़ी हैं।
  • यमन के हूती समूहों की गतिविधियों का प्रभाव।
  • ब्रेंट क्रूड की कीमतें 116.70 डॉलर प्रति बैरल के निकट।
  • भारत के लिए महंगाई का खतरा।
  • शेयर बाजारों पर गिरावट का असर।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल देखी गई। यह वृद्धि उस समय हुई जब यमन के ईरान समर्थित हूती समूह भी इस संघर्ष में सक्रिय हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.66 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 116.70 डॉलर प्रति बैरल के इंट्रा-डे उच्चतम स्तर पर पहुँच गया, जो कि 52 हफ्ते के उच्च स्तर के बेहद करीब है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।

यह तेल की कीमतों में वृद्धि उस समय आई है जब हूती बलों ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए। हूती समूह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक ईरान और उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ हमले नहीं रुकते, वे अपने हमले जारी रखेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पहले से ही दबाव बढ़ गया है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें मार्च में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं और अब यह फिर से युद्ध के प्रारंभिक दौर के ऊँचाई स्तर के करीब पहुँच रही हैं, जबकि कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस समय कच्चा तेल सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक कारक बन गया है। बाजार में यह आशंका जताई जा रही है कि सप्लाई में लंबे समय तक बाधाएँ आ सकती हैं। कुछ वैश्विक अनुमानों के अनुसार, यदि तनाव बढ़ता रहा, तो कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है, कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और चालू खाता घाटा भी बढ़ सकता है।

वैश्विक शेयर बाजारों पर भी इस पर असर पड़ा। अमेरिका में वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ बंद हुआ, जहाँ एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.67 प्रतिशत और नैस्डैक लगभग 2 प्रतिशत नीचे रहा।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई लगभग 4 प्रतिशत गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 3 प्रतिशत नीचे आया।

इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ खुले, क्योंकि पश्चिम एशिया का संकट अब पांचवें हफ्ते में पहुँच गया है और जारी रहने की संभावना है।

Point of View

विशेष रूप से महंगाई और चालू खाता घाटे के संदर्भ में।
NationPress
30/03/2026

Frequently Asked Questions

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और यमन के हूती समूहों की गतिविधियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
क्या कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव जारी रहा, तो कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं।
भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति महंगाई में वृद्धि, कंपनियों के मुनाफे पर असर और चालू खाता घाटा बढ़ा सकती है।
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