डीपसीक का इतिहास में सबसे लंबा आउटेज, सेवाएं 7 घंटे से अधिक समय तक रहीं ठप
सारांश
Key Takeaways
- डीपसीक का सबसे बड़ा आउटेज 7 घंटे से अधिक समय तक चला।
- आउटेज के पीछे का कारण अभी भी अज्ञात है।
- डीपसीक का संचालन अब तक 99 प्रतिशत तक रहा है।
- एंथ्रोपिक ने डीपसीक पर चोरी के आरोप लगाए हैं।
- अवैध तरीके से बनाए गए एआई मॉडल्स सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चीन का प्रसिद्ध एआई चैटबॉट डीपसीक ने अपने इतिहास में सबसे बड़ा आउटेज झेला, जिसमें यह प्लेटफ़ॉर्म रातभर 7 घंटे से अधिक समय तक कार्यरत नहीं रहा।
आउटेज पर नज़र रखने वाले प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, उपयोगकर्ताओं ने रविवार शाम से ही समस्याओं की शिकायत करनी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स में कहा गया कि डीपसीक के स्टेटस पेज ने रात 9:35 बजे इस समस्या को पहली बार स्वीकार किया।
प्लेटफॉर्म ने लगभग दो घंटे बाद समस्या को सुधारने का दावा किया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से समस्याएँ उत्पन्न हुईं और अगली सुबह 10:33 बजे तक पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका।
इस बड़े आउटेज का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, क्योंकि डीपसीक की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में अपने आर1 मॉडल के लॉन्च के बाद से डीपसीक का संचालन लगभग 99 प्रतिशत रहा है।
जनवरी 2025 में यह चीनी एआई स्टार्टअप अचानक काफी लोकप्रिय हुआ, जब इसके मॉडल्स के कारण सिलिकॉन वैली की तकनीकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई और अरबों डॉलर की संपत्ति कम हुई। इसके बाद यह आशंका जताई गई थी कि एआई की दौड़ में अमेरिका की पकड़ कमजोर हो सकती है।
हालांकि, डीपसीक अब तक चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे बड़े प्लेटफार्मों के समकक्ष मॉडल पेश नहीं कर सका है।
इस बीच, अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में डीपसीक समेत तीन चीनी कंपनियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके क्लाउड मॉडल की क्षमताओं का अवैध तरीके से इस्तेमाल किया।
कंपनी के अनुसार, इस कथित चोरी में 'डिस्टिलेशन' नाम की तकनीक का प्रयोग किया गया, जिसमें लगभग 24,000 फर्जी अकाउंट बनाए गए और 1.6 करोड़ से अधिक इंटरैक्शन के माध्यम से डेटा इकट्ठा किया गया।
एंथ्रोपिक ने चेतावनी दी है कि इस तरह से बनाए गए एआई मॉडल में सुरक्षा उपाय कमजोर हो सकते हैं और उनका उपयोग साइबर हमलों, जैविक हथियारों और निगरानी जैसे खतरनाक कार्यों के लिए किया जा सकता है।
कंपनी ने यह भी कहा कि ऐसे मॉडल 'सत्तावादी सरकारों' द्वारा साइबर ऑपरेशन, गलत जानकारी फैलाने और बड़े स्तर पर निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, इसलिए इस पर जल्द कार्रवाई आवश्यक है।