साइबर सुरक्षा के लिए भारत-अमेरिका वार्ता: एंथ्रोपिक के 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुँच की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
भारत अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की साइबर सुरक्षा परीक्षण क्षमता को अगले स्तर पर ले जाने के लिए अमेरिका के साथ सक्रिय बातचीत में है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 3 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी कि भारत अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक के उन्नत मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुँच हासिल करना चाहता है, जिससे देश के डिजिटल सिस्टम की गहन जाँच संभव हो सके।
मुख्य घटनाक्रम
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) साइबर सिक्योरिटी समिट में यह खुलासा किया। उन्होंने कहा, "हम 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुँच पाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। इससे हमें एंथ्रोपिक के एआई सिस्टम की मदद से अपनी डिजिटल प्रणालियों का गहन परीक्षण करने में मदद मिलेगी।"
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में एंथ्रोपिक ने 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' की शुरुआत की थी, जिसका मूल उद्देश्य दुनिया के सबसे संवेदनशील सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्रणालियों को साइबर खतरों से सुरक्षित बनाना है।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग क्या है
'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' एंथ्रोपिक की एक प्रमुख साइबर सुरक्षा पहल है, जिसमें अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS), एप्पल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल, जेपी मॉर्गन चेस, लिनक्स फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और पालो अल्टो नेटवर्क्स जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ भागीदार हैं। यह परियोजना एआई की शक्ति का उपयोग करके डिजिटल प्रणालियों में कमज़ोरियों की पहचान करती है।
भारत की मौजूदा तैयारी
एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि भारत इस वार्ता के नतीजे का इंतजार किए बिना पहले से ही उपलब्ध एआई मॉडलों के ज़रिए अपने महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम की साइबर सुरक्षा जाँच शुरू कर चुका है। उनके अनुसार, करीब 60 से 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा परीक्षण मौजूदा एआई मॉडलों से ही किया जा सकता है, जबकि 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुँच मिलने से यह क्षमता और अधिक सुदृढ़ हो जाएगी।
एआई और साइबर खतरों का बदलता परिदृश्य
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एआई की बढ़ती क्षमताओं के कारण साइबर अपराधियों के लिए नए किस्म के हैकिंग टूल तैयार करना पहले से कहीं आसान हो गया है। इसी खतरे को देखते हुए एप्पल भी अपने सॉफ्टवेयर सुरक्षा अपडेट पहले से अधिक तेज़ी से जारी कर रही है — रिपोर्टों के अनुसार, वे सुरक्षा पैच अब अलग से जारी किए जा रहे हैं, जिन्हें पहले iOS के बड़े अपडेट के साथ ही रिलीज़ किया जाता था।
कृष्णन ने कहा कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है, डिजिटल अवसंरचना में कमज़ोरियों की पहचान करना भी उतना ही सरल होता जा रहा है। ऐसे में भारत अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मज़बूत बनाने पर तेज़ी से काम कर रहा है।
आगे की राह
भारत-अमेरिका के बीच यह तकनीकी सहयोग वार्ता दोनों देशों के बढ़ते डिजिटल साझेदारी के व्यापक ढाँचे का हिस्सा है। यदि 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुँच मिलती है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो इस अत्याधुनिक एआई-संचालित साइबर सुरक्षा प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं।