डीएसी की ₹52,000 करोड़ की रक्षा खरीद मंजूरी से BEL, HAL समेत डिफेंस शेयरों में 3% तक उछाल
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए ₹52,000 करोड़ के हथियार खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने के बाद 6 जुलाई 2026 को घरेलू रक्षा शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स सहित कई सरकारी रक्षा कंपनियों के शेयर इंट्राडे में 3 प्रतिशत तक चढ़ गए।
मुख्य शेयरों का प्रदर्शन
नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इंट्राडे में 2.84 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹429.90 तक पहुँचा। दोपहर एक बजे यह 1.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ ₹424.10 पर कारोबार कर रहा था।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयर 1.55 प्रतिशत बढ़कर ₹4,497 तक पहुँचे और बाद में 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹4,449 पर स्थिर हुए। मिश्र धातु निगम के शेयर 3.32 प्रतिशत उछलकर ₹441.70 तक गए और खबर लिखे जाने तक 1.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹435 पर थे।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड का शेयर इंट्राडे में ₹2,582 के उच्चतम स्तर तक पहुँचा और बाद में 0.99 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,568 पर था। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स 1.69 प्रतिशत चढ़कर ₹2,793.30 तक पहुँचे, जबकि कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इंट्राडे में ₹1,542 के उच्चतम स्तर को छू गया।
DAC की मंजूरी में क्या शामिल है
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई DAC की बैठक में ₹52,000 करोड़ के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को 'एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी' (AoN) की मंजूरी दी गई। DAC रक्षा खरीद के मामलों में देश की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
इन मंजूरियों में एंटी-ड्रोन सिस्टम, मिसाइल, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल हथियार सिस्टम, बहुत कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम, कामिकेज ड्रोन, नेवल अनमैन्ड एरियल सिस्टम और उच्च ऊँचाई निगरानी प्लेटफॉर्म शामिल हैं — जो तीनों सेनाओं की परिचालन जरूरतों को पूरा करते हैं।
निवेशकों का भरोसा और बाज़ार का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति पर लगातार जोर दे रही है। आंकड़ों के अनुसार, घरेलू रक्षा खरीद में सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। गौरतलब है कि AoN मंजूरी किसी भी रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला और महत्त्वपूर्ण कदम है, जो वास्तविक अनुबंध से पहले की स्वीकृति होती है।
आगे क्या होगा
AoN के बाद अब इन प्रस्तावों पर निविदा प्रक्रिया और अनुबंध वार्ता शुरू होगी, जिससे संबंधित रक्षा कंपनियों के ऑर्डर बुक में आने वाले महीनों में वृद्धि संभव है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मंजूरी घरेलू रक्षा क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक राजस्व दृश्यता को मजबूत करती है।