दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मार्च में यात्री ट्रैफिक 66% गिरा, अमेरिका-ईरान तनाव बना कारण
सारांश
मुख्य बातें
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मार्च में यात्री ट्रैफिक में 66 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान तनाव को बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गिरावट के चलते पहली तिमाही में कुल यात्री संख्या घटकर 25 लाख रह गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 21 लाख कम है।
मुख्य घटनाक्रम
दुनिया के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में शुमार दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मार्च के दौरान कई गंभीर परिचालन बाधाओं का सामना करना पड़ा। मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष के बीच आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन से संबंधित घटनाओं के कारण हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इससे पश्चिम एशिया में व्यापक स्तर पर उड़ानें बाधित हुईं और यात्रा की माँग में तेज़ गिरावट आई।
मार्च में ही हवाई अड्डे के निकट एक ईंधन टैंक पर ड्रोन हमले के बाद एहतियात के तौर पर उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित की गई थीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में हवाई अड्डे ने बताया कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया था और यात्रियों को अपडेट के लिए अपनी-अपनी एयरलाइंस से संपर्क करने की सलाह दी गई थी।
भारत सबसे बड़ा स्रोत बाज़ार
गिरावट के बावजूद भारत दुबई एयरपोर्ट का सबसे बड़ा स्रोत बाज़ार बना रहा, जिसने इस अवधि में 25 लाख यात्रियों का योगदान दिया। इसके बाद सऊदी अरब, यूनाइटेड किंगडम और पाकिस्तान का स्थान रहा।
गंतव्यों की दृष्टि से लंदन सबसे व्यस्त रूट रहा, जहाँ 7.52 लाख यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। इसके बाद मुंबई और जेद्दा का स्थान रहा। यह आँकड़ा भारत-दुबई हवाई संपर्क की मज़बूती को रेखांकित करता है, भले ही समग्र यातायात में भारी गिरावट आई हो।
प्रबंधन की प्रतिक्रिया
हवाई अड्डे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल ग्रिफिथ्स ने कथित तौर पर कहा कि हवाई अड्डा धीरे-धीरे क्षमता बहाल होने के साथ यातायात में सुधार को संभालने के लिए अच्छी स्थिति में है, जिससे एक प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में इसकी स्थिति और मज़बूत हो रही है। हालाँकि, पूरे वर्ष के लिए कोई आधिकारिक पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हवाई यात्रा की माँग दीर्घकालिक रूप से मज़बूत बनी हुई है और एयरपोर्ट भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य होते ही पूरी क्षमता पर वापस आने के लिए तैयार है।
आम जनता और विमानन उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव वैश्विक विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। दुबई एयरपोर्ट की यह गिरावट न केवल क्षेत्रीय एयरलाइंस के लिए, बल्कि उन लाखों भारतीय यात्रियों के लिए भी चिंता का विषय है जो खाड़ी देशों को ट्रांज़िट हब के रूप में उपयोग करते हैं।
गौरतलब है कि दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट वैश्विक विमानन में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है और इसकी क्षमता में किसी भी व्यवधान का असर एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच उड़ान संपर्क पर पड़ता है। भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार के साथ ही यातायात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।