वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक

Click to start listening
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य एलएलपी और कंपनी अधिनियम में आवश्यक संशोधन करना है। यह विधेयक कॉरपोरेट गवर्नेंस को सरल बनाएगा और निवेश आकर्षित करेगा।

Key Takeaways

  • कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य एलएलपी और कंपनी अधिनियम में संशोधन करना है।
  • यह विधेयक कॉरपोरेट गवर्नेंस को सरल बनाएगा।
  • विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया है।
  • संयुक्त संसदीय समिति विधेयक की समीक्षा करेगी।
  • दिवालियापन कानून में संशोधन को मंजूरी मिल चुकी है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत किया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में आवश्यक संशोधन करना है।

कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन संबंधी पहलुओं को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम साझेदारों के लिए सीमित देयता के साथ एक अधिक लचीला ढांचा प्रदान करता है।

वित्त मंत्री ने इस विधेयक की गहन समीक्षा के लिए इसे संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूरी दे दी।

सीतारमण ने कहा कि कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026, दो साल की गहन चर्चाओं के बाद पेश किया गया है। कंपनी विधि समिति (सीएलसी) की सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया है। सीएलसी में उद्योग मंडलों और पेशेवर संस्थानों के प्रतिनिधि, कानूनी और लेखा विशेषज्ञ शामिल थे।

उन्होंने यह भी बताया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए वेबसाइट पर साझा किया गया था, और प्राप्त टिप्पणियों की जांच की गई।

इससे पहले, विधेयक पेश करने से पहले, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी, टीएमसी के सौगत राय और डीएमके की डॉ. टी. सुमति समेत विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीपीआर) के प्रावधानों को कमजोर कर रहा है। सीतारमण ने उनके चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि यह संशोधन न केवल अधिक निवेश को आकर्षित करेगा बल्कि कॉरपोरेट गवर्नेंस को भी सरल बनाएगा।

इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे चालू संसदीय सत्र में आईबीसी संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

प्रस्तावित विधायी संशोधन भारतीय जनता पार्टी के सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली विशेष संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति को मौजूदा दिवालियापन ढांचे की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। समीक्षा पूरी होने के बाद, समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को गति देने पर विशेष ध्यान दिया गया था।

Point of View

विपक्षी सांसदों की चिंताएं भी महत्वपूर्ण हैं, जिनका समाधान करना आवश्यक होगा।
NationPress
24/03/2026

Frequently Asked Questions

कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सीमित देयता भागीदारी अधिनियम और कंपनी अधिनियम में आवश्यक संशोधन करना है।
क्या यह विधेयक निवेश को प्रभावित करेगा?
हां, वित्त मंत्री का मानना है कि यह विधेयक अधिक निवेश को आकर्षित करेगा।
विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध क्यों किया?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह विधेयक कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के प्रावधानों को कमजोर करता है।
इस विधेयक की समीक्षा कौन करेगा?
इस विधेयक की समीक्षा संसद की संयुक्त संसदीय समिति द्वारा की जाएगी।
दिवालियापन कानून में संशोधन कब किया गया?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी।
Nation Press