वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पेश करेंगी

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पेश करेंगी

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पेश करने जा रही हैं, जो सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रावधान है।

Key Takeaways

  • वित्त विधेयक 2026-27 सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करेगा।
  • कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक में महत्वपूर्ण सुधार हैं।
  • दिवालियापन में सुधार के लिए सख्त समयसीमा लागू करने का सुझाव दिया गया है।
  • लेनदारों की समिति को अधिक शक्तियां दी जाएंगी।
  • अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने के लिए समर्पित तंत्र का प्रस्ताव है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 प्रस्तुत करेंगी।

इस वित्त विधेयक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए केंद्र सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करना है। वित्त मंत्री विधेयक 2026-27 पर चर्चा के लिए प्रस्ताव करेंगी और इसे पारित कराने का प्रयास करेंगी।

यह आगामी वर्ष के लिए सरकार द्वारा निर्धारित बजटीय योजनाओं और आर्थिक नीतियों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

संसद के कार्यसूची के अनुसार, वित्त मंत्री लोकसभा में प्रमुख कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन के लिए एक विधेयक भी पेश करेंगी।

प्रस्तावित कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रावधान है।

कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम साझेदारों के लिए सीमित देयता के साथ एक लचीला ढांचा प्रदान करता है।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे चालू संसदीय सत्र में आईबीसी संशोधन विधेयक पेश करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

प्रस्तावित विधायी संशोधन भारतीय जनता पार्टी के सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली एक विशेष संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति को मौजूदा दिवालियापन ढांचे की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। समीक्षा पूरी होने पर, समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को गति देने पर विशेष जोर दिया गया था।

वर्तमान व्यवस्था में व्याप्त विलंबों से निपटने के लिए संसदीय समिति ने दिवालियापन मामलों के निपटारे हेतु सख्त समयसीमा लागू करने की सिफारिश की है। सख्त समयसीमा के साथ-साथ समिति ने लेनदारों की समिति (सीओसी) को अधिक शक्तियां प्रदान करने का भी सुझाव दिया है, जिससे ऋणदाताओं को मामलों का त्वरित और निर्णायक समाधान करने में सहायता मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित संशोधन दो प्रमुख संरचनात्मक ढांचे पेश करके मौजूदा संहिता में मौजूद कमियों को भी दूर करते हैं। सबसे पहले, चयन समिति ने अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों और विदेशी लेनदारों वाली संकटग्रस्त कंपनियों के बेहतर प्रबंधन के लिए सीमा पार दिवालियापन के लिए एक समर्पित तंत्र का प्रस्ताव दिया है।

Point of View

बल्कि कॉर्पोरेट ढांचे में आवश्यक सुधार भी लाएगा।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए केंद्र सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करना है।
कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक में क्या बदलाव हैं?
कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रावधान है।
दिवालियापन और दिवालिया संहिता में क्या संशोधन हुए हैं?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे आईबीसी संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।
समिति की समीक्षा में क्या पाया गया?
समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया।
लेनदारों की समिति (सीओसी) को क्या शक्तियां मिलेंगी?
समिति ने लेनदारों की समिति (सीओसी) को अधिक शक्तियां प्रदान करने का सुझाव दिया है, जिससे मामलों का त्वरित समाधान हो सके।
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