खाद्य उत्पादों में मिलावट पर वित्त वर्ष 2024-25 में आईं 7,700 से अधिक शिकायतें, 6,000 का हुआ समाधान
सारांश
Key Takeaways
- 7,700 से अधिक शिकायतें वित्त वर्ष 2024-25 में मिलीं।
- लगभग 6,000 शिकायतों का समाधान हुआ।
- शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जाती हैं।
- संबंधित विभाग कार्रवाई करता है।
- खाद्य सुरक्षा के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित किए जाते हैं।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्य उत्पादों में मिलावट से संबंधित 7,700 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से लगभग 6,000 का समाधान किया जा चुका है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी उपभोक्ता शिकायतें भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होती हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 4,330 शिकायतें आईं, जिनमें से 4,074 का समाधान किया गया।
2023-24 में शिकायतों की संख्या बढ़कर 4,735 हो गई, जिनमें से 3,993 मामलों का समाधान किया गया। वित्त वर्ष 2024-25 में शिकायतें बढ़कर 7,705 हो गईं और इनमें से 5,952 का निस्तारण किया गया।
ये शिकायतें फूड सेफ्टी कनेक्ट प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाती हैं, जो फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम (एफओएससीओएस) का हिस्सा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि शिकायत के पंजीकरण के बाद संबंधित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और खाद्य व्यवसाय संचालकों को ऑनलाइन शिकायत की जानकारी दी जाती है।
वर्मा ने कहा, "इन शिकायतों पर संबंधित राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई करता है।"
मंत्री ने आगे कहा कि खाद्य नियामक खाद्य उत्पादों के लिए विज्ञान आधारित मानक स्थापित करने और उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने हेतु उनके निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर प्रवर्तन मुख्य रूप से राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों द्वारा नामित अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से किया जाता है।
खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, नियामक अपने क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य प्राधिकरणों के माध्यम से निरीक्षण, नमूनाकरण और लक्षित प्रवर्तन अभियान चलाते हैं।
इनमें राष्ट्रीय वार्षिक निगरानी योजना के तहत गतिविधियां और अन्य निगरानी पहल शामिल हैं।
प्राधिकरण ने जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली भी स्थापित की है, जो विभिन्न खाद्य उत्पादों से जुड़े जोखिम के स्तर के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति निर्धारित करती है।
सुरक्षा मानकों का उल्लंघन होने पर, खाद्य व्यवसाय संचालकों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत नियामक या दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।