क्या एफटीए से सूरत के टेक्सटाइल व्यापारियों में खुशी है? पीएम मोदी का आभार

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क्या एफटीए से सूरत के टेक्सटाइल व्यापारियों में खुशी है? पीएम मोदी का आभार

सारांश

सूरत के टेक्सटाइल कारोबारी एफटीए को लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह समझौता उनके लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा। पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए वे इसे उद्योग के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

Key Takeaways

  • एफटीए से नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे।
  • उद्योग में उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • सूरत मैन-मेड फाइबर के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
  • भारत से गारमेंट्स का निर्यात बढ़ेगा।
  • प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व महत्वपूर्ण है।

सूरत, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब पूरा हो चुका है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर सूरत के टेक्सटाइल कारोबारियों में अपार खुशी का माहौल है। देश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्र सूरत में इस समझौते को उद्योग के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है।

कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण जो नुकसान उद्योग को उठाना पड़ रहा था, वह न केवल इस व्यापारिक डील से समाप्त होगा, बल्कि नए व्यापारिक अवसर भी सामने आएंगे। व्यापारियों के अनुसार, अब चीनी मशीनों की जगह यूरोपीय गुणवत्ता की आधुनिक मशीनें आयात की जा सकेंगी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए सूरत के कपड़ा कारोबारियों ने कहा कि यह समझौता टेक्सटाइल उद्योग के भविष्य को नई दिशा प्रदान करेगा।

फेडरेशन ऑफ टेक्सटाइल एंड ट्रेड एसोसिएशन के प्रमुख कैलाश हाकिम ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सरकार की लगभग 18 वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम है। अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर भारतीय कारोबारियों को डराने की कोशिश की थी और बांग्लादेश की स्थिति के बिगड़ने से भी व्यापार पर असर पड़ा, लेकिन यूरोप हमेशा भारत के लिए एक बड़ी उम्मीद बना रहा।

कैलाश हाकिम ने बताया कि अमेरिका की टैरिफ नीति भारत के खिलाफ ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पाई, क्योंकि भारत सरकार की रणनीति ने उसे विफल कर दिया। यूरोप तकनीकी रूप से काफी मजबूत है और वहां उच्च गुणवत्ता की टेक्सटाइल मशीनें बनाई जाती हैं। ऐसे में मशीन आयात और टेक्सटाइल व्यापार दोनों के लिए यह डील बेहद लाभदायक साबित होगी।

उन्होंने कहा कि यूरोप में गारमेंट्स की मांग काफी अधिक है। पहले भारत करीब 9 प्रतिशत गारमेंट एक्सपोर्ट करता था। अब एफटीए के बाद सूरत के कारोबारियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर बनकर आया है।

उन्होंने बताया कि सूरत मैन-मेड फाइबर के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है और भारत से पूरी दुनिया व्यापार करना चाहती है। इस समझौते का सीधा लाभ सूरत और देश के अन्य टेक्सटाइल केंद्रों को मिलेगा। भविष्य में वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड्स की मजबूत उपस्थिति देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का आकार लगभग 150 लाख करोड़ रुपए है और पूरे भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक राजस्व टेक्सटाइल क्षेत्र से ही आता है।

वहीं, टेक्सटाइल कारोबारी सुशील गुप्ता ने इस समझौते को भारत के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ वॉर से भारत को भारी नुकसान हुआ था। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से यूरोप के साथ यह महत्वपूर्ण समझौता संभव हो पाया है। उनके अनुसार, फ्री ट्रेड डील से टेक्सटाइल उद्योग को नई गति मिलेगी और निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिलेगी।

टेक्सटाइल कारोबारी जॉनी राठौड़ ने भी एफटीए को कारोबारियों के लिए बेहद फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत को यूरोपीय देशों के साथ बिना टैक्स के व्यापार करने का सुनहरा मौका मिला है और देश को एक बड़ा बाजार मिला है। पहले जहां मशीनरी चीन से मंगाई जाती थी, अब यूरोपीय देशों से उच्च गुणवत्ता की मशीनें आयात की जा सकेंगी। प्रधानमंत्री मोदी टेक्सटाइल कारोबारियों के हित में लगातार बेहतरीन काम कर रहे हैं और इसके लिए वे उनका दिल से धन्यवाद करते हैं।

Point of View

बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम एक सकारात्मक दिशा में बढ़ता हुआ कदम है, जो भारतीय व्यापारियों के लिए नई संभावनाएँ खोलेगा।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

एफटीए का सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
एफटीए से सूरत के टेक्सटाइल उद्योग को नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
प्रधानमंत्री मोदी का इसमें क्या योगदान है?
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से यह समझौता संभव हुआ है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग को नई गति मिलेगी।
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