3 अक्टूबर 2026
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कौटिल्य सम्मेलन 2026: वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक प्रगति को सराहा, सतत विकास और मुक्त व्यापार को बताया कुंजी

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कौटिल्य सम्मेलन 2026: वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक प्रगति को सराहा, सतत विकास और मुक्त व्यापार को बताया कुंजी

सारांश

नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन की साइडलाइन पर दुनिया के शीर्ष अर्थशास्त्रियों — त्रिशे, वाल्डेनस्ट्रॉम, लांदू और झांग — ने एकसुर में भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का अगला बड़ा केंद्र बताया। सतत विकास, शिक्षा, मुक्त व्यापार और आय आधारित कराधान को उन्होंने भारत की सफलता की असली कुंजी करार दिया।

मुख्य बातें

5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (KEC 2026) की साइडलाइन पर 3 अक्टूबर 2026 को वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की प्रगति की सराहना की।
स्वीडिश अर्थशास्त्री डेनियल वाल्डेनस्ट्रॉम ने आय की असमानता पर ध्यान केंद्रित करने और पूंजीगत आय पर कर लगाने की सलाह दी।
ECB के पूर्व अध्यक्ष ज्यां क्लोद त्रिशे ने भारत को दो प्रमुख उभरते देशों में से एक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में 'अग्रणी देश' बताया।
फ्रांसीसी अर्थशास्त्री ज्यां पियरे लांदू ने कहा कि भू राजनीतिक तनाव के बावजूद एशिया में व्यापार और निवेश मज़बूत बने हुए हैं।
चीनी प्रोफेसर झांग लीकिंग ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख आकर्षण' बताया।

नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (KEC 2026) के अवसर पर 3 अक्टूबर 2026 को शीर्ष वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक प्रगति की जमकर सराहना की और सतत विकास, शिक्षा में निवेश, मुक्त व्यापार तथा आय आधारित कराधान को देश के वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की राह में निर्णायक कारक बताया। अर्थशास्त्रियों का एकमत था कि भारत इस समय दुनिया की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

स्वीडिश अर्थशास्त्री का आकलन: आय असमानता पर दें ध्यान

सम्मेलन की साइडलाइन पर स्वीडिश अर्थशास्त्री डेनियल वाल्डेनस्ट्रॉम ने कहा कि भारत ने विकासोन्मुख नीतियों के ज़रिए प्रभावशाली प्रगति हासिल की है और वह आर्थिक विस्तार को व्यापक सामाजिक लाभ में तब्दील करने की बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा, "तेज़ी से अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के मामले में भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। विकास पर ध्यान देना बहुत सकारात्मक रहा है और इससे शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।"

वाल्डेनस्ट्रॉम ने नीति निर्माताओं को संपत्ति की असमानता की तुलना में आय की असमानता पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, क्योंकि उनके अनुसार आय का स्तर गरीबी और आर्थिक अवसरों की कहीं अधिक सटीक तस्वीर प्रस्तुत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्यमियों की बढ़ती संपत्ति अकसर एक प्रतिस्पर्धी और विस्तारशील अर्थव्यवस्था की निशानी होती है।

कराधान पर सुझाव: संपत्ति कर से आगे बढ़ें

कराधान के मसले पर वाल्डेनस्ट्रॉम ने संपत्ति या विरासत कर पर निर्भर रहने के बजाय पूंजीगत आय पर कर लगाने की पैरवी की — इसमें कॉर्पोरेट मुनाफा, लाभांश और ब्याज से होने वाली कमाई शामिल है। उन्होंने रेखांकित किया कि कई OECD देश धीरे धीरे संपत्ति और विरासत करों से दूर होते जा रहे हैं, जो भारत के लिए एक उपयोगी नीति सबक हो सकता है।

ECB के पूर्व प्रमुख त्रिशे बोले: भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति

यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के पूर्व अध्यक्ष और बैंक ऑफ़ फ्रांस के पूर्व गवर्नर ज्यां क्लोद त्रिशे ने भारत की प्रगति को 'बहुत प्रभावशाली' बताते हुए कहा कि देश अपनी स्वाभाविक दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से भारत दो प्रमुख उभरते देशों में से एक है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक अग्रणी देश भी है। इसलिए मैं भारत को इसी दिशा में आगे बढ़ते रहने और बड़ी सफलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करूंगा।" गौरतलब है कि त्रिशे दशकों तक वैश्विक मौद्रिक नीति की धुरी रहे हैं, इसलिए उनकी टिप्पणी को वजनदार माना जा रहा है।

भारत फ्रांस साझेदारी और एशिया में व्यापार की मज़बूती

फ्रांसीसी अर्थशास्त्री ज्यां पियरे लांदू ने भारत फ्रांस के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की तारीफ करते हुए कहा कि भू राजनीतिक तनाव और बढ़ते संरक्षणवाद के बावजूद एशिया में व्यापार और निवेश मज़बूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "हम एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल का सामना कर रहे हैं, लेकिन इस समय दुनिया की समस्याओं को हल करने की कोशिश में भारत एक प्रमुख, बल्कि सबसे प्रमुख देशों में से एक है।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्वीकरण को लेकर पश्चिमी देशों में संदेह गहराता जा रहा है।

चीनी प्रोफेसर का नज़रिया: भारत वैश्विक विकास का नया केंद्र

चीन के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर झांग लीकिंग ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'काफी गतिशील और काफी मज़बूत' करार दिया। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अब यह वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख आकर्षणों में से एक बन गई है। इसलिए मैं भारत की अर्थव्यवस्था के सतत विकास और विश्व अर्थव्यवस्था में उसके बड़े योगदान की उम्मीद करता हूँ।" यह उल्लेखनीय है कि एक चीनी विद्वान का यह सकारात्मक मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब भारत चीन आर्थिक प्रतिस्पर्धा विमर्श के केंद्र में है।

कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का यह पाँचवाँ संस्करण स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत है कि वैश्विक नीति विशेषज्ञों की नज़र में भारत अब महज़ एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नया आकार देने में सक्षम एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह कूटनीतिक शिष्टाचार है या ठोस डेटा पर आधारित मूल्यांकन। वाल्डेनस्ट्रॉम की आय आधारित कराधान की सलाह व्यावहारिक रूप से प्रासंगिक है — भारत में संपत्ति कर बहस तेज़ होती जा रही है और यह सुझाव नीति निर्माताओं को एक वैकल्पिक दिशा देता है। हालाँकि, सतत विकास और मुक्त व्यापार की वकालत उस समय आई है जब खुद पश्चिमी देश संरक्षणवाद की ओर झुक रहे हैं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5वाँ कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (KEC 2026) क्या है?
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति मंच है जो नई दिल्ली में आयोजित होता है। इसका 5वाँ संस्करण 3 अक्टूबर 2026 को हुआ, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया।
वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना क्यों की?
अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकासोन्मुख नीतियों, बुनियादी ढाँचे में निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सराहा। ECB के पूर्व अध्यक्ष त्रिशे ने भारत को 'अग्रणी वैश्विक देश' बताया, जबकि चीनी प्रोफेसर झांग ने इसे 'वैश्विक विकास का प्रमुख आकर्षण' कहा।
डेनियल वाल्डेनस्ट्रॉम ने भारत के लिए कराधान पर क्या सुझाव दिए?
स्वीडिश अर्थशास्त्री वाल्डेनस्ट्रॉम ने संपत्ति या विरासत कर की बजाय पूंजीगत आय — जैसे कॉर्पोरेट मुनाफा, लाभांश और ब्याज — पर कर लगाने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कई OECD देश पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
भारत फ्रांस साझेदारी पर अर्थशास्त्री लांदू ने क्या कहा?
फ्रांसीसी अर्थशास्त्री ज्यां पियरे लांदू ने भारत फ्रांस की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को सकारात्मक बताया और कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत 'सबसे प्रमुख देशों में से एक' है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भू राजनीतिक तनाव के बावजूद एशिया में व्यापार और निवेश मज़बूत बने हुए हैं।
भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने के लिए क्या करना होगा?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार सतत विकास, शिक्षा में निवेश, मुक्त व्यापार नीति और आय आधारित कराधान — ये चार स्तंभ भारत को एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगे। आर्थिक विस्तार को व्यापक सामाजिक लाभ से जोड़ना भी ज़रूरी बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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