सोना ₹1,411 सस्ता होकर ₹1,42,694 पर; चांदी ₹2 लाख के नीचे, MCX पर भी तेज गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 22 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,411 घटकर ₹1,42,694 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो इससे पहले ₹1,44,105 प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी का दाम ₹7,006 की गिरावट के साथ ₹1,99,777 प्रति किलो पर पहुँच गया — यानी पहली बार यह ₹2 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई।
सोने की विभिन्न कैरेट में कीमतें
IBJA के मुताबिक, 22 कैरेट सोना ₹1,30,708 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जो पहले ₹1,32,000 प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,08,079 से घटकर ₹1,07,021 प्रति 10 ग्राम हो गया। इस प्रकार सभी कैरेट में एकसमान दबाव देखा गया, जो वैश्विक संकेतों के सीधे असर को दर्शाता है।
वायदा बाजार में भी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 4 दिसंबर 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट में ₹1,459 यानी लगभग 1 प्रतिशत की कमजोरी आई और यह ₹1,44,620 प्रति 10 ग्राम पर था। चांदी के 4 दिसंबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में ₹6,269 यानी 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह ₹2,02,899 प्रति किलो पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 1.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ $4,094 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 3.44 प्रतिशत टूटकर $55.73 प्रति औंस पर आ गई। जानकारों के अनुसार, MCX पर सोना ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब और कॉमेक्स पर $4,088 प्रति औंस के स्तर के आसपास था।
गिरावट के पीछे कारण
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना से बाजार में दबाव बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब ऊँची ब्याज दरों के माहौल में सोने-चांदी जैसी 'नो-यील्ड' संपत्तियों का आकर्षण घटता है, क्योंकि निवेशक अधिक रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। गौरतलब है कि यह गिरावट उस दौर में आई है जब सोना हाल के महीनों में ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर कारोबार कर रहा था।
अब नज़रें फेड के फैसले पर
जानकारों का कहना है कि अब सबकी निगाहें अगले हफ्ते होने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के नीतिगत फैसले पर टिकी हैं। ब्याज दरों पर फेड का रुख और महंगाई संबंधी उनके संकेत डॉलर, सोने और चांदी की कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। यदि फेड आक्रामक रुख अपनाता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव और बढ़ सकता है।