सरकार ने बताया, वित्त वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों का पूंजीगत निवेश 11 लाख करोड़ से अधिक
सारांश
Key Takeaways
- 11 लाख करोड़ रुपए से अधिक का पूंजीगत निवेश वित्त वर्ष 2025-26 के लिए।
- कंपनियों का 65.35%25 कैपेक्स आंतरिक संसाधनों पर निर्भर।
- मुख्य संपत्तियों पर 48.63%25 कंपनियों का निवेश।
- कंपनियों का मुख्य लक्ष्य आय बढ़ाना।
- भविष्य के लिए 9.55 लाख करोड़ रुपए का कैपेक्स योजना।
नई दिल्ली, २३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को सरकार ने जानकारी दी कि भारतीय कंपनियों (इंडिया इंक) ने वित्त वर्ष २०२५-२६ में ११ लाख करोड़ रुपए से अधिक के पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) की योजना बनाई है, जो निजी कॉरपोरेट क्षेत्र में निवेश के सकारात्मक रुझान को दर्शाता है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा जारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, जो अक्टूबर से दिसंबर २०२५ के बीच किया गया था, वित्त वर्ष २०२६ के लिए कुल अनुमानित कैपेक्स लगभग ११.४४ लाख करोड़ रुपए है।
सरकार ने बताया कि कंपनियां अपने निवेश की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही हैं। वित्त वर्ष २०२४-२५ में प्रति कंपनी वास्तविक कैपेक्स १७३.५ करोड़ रुपए था, जबकि योजना १८०.२ करोड़ रुपए की थी। यानी लगभग ९६.३ प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया गया, जो मजबूत क्रियान्वयन को साबित करता है।
रणनीति के अनुसार, लगभग ४८.६३ प्रतिशत कंपनियां वित्त वर्ष २०२६ में मुख्य संपत्तियों पर निवेश कर रही हैं, जबकि ३८.३६ प्रतिशत मौजूदा संपत्तियों में वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। लगभग ६०.१३ प्रतिशत कंपनियों का मुख्य लक्ष्य कैपेक्स के माध्यम से आय बढ़ाना है, इसके बाद क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
फंडिंग के मामले में, अधिकांश कंपनियां अपने आंतरिक संसाधनों पर निर्भर हैं, जो कुल कैपेक्स का ६५.३५ प्रतिशत है। घरेलू कर्ज का हिस्सा २३.२५ प्रतिशत है, जबकि इक्विटी और विदेशी निवेश जैसे स्रोतों की हिस्सेदारी कम है।
भविष्य के रुझानों की बात करें तो वित्त वर्ष २०२७ के लिए कंपनियों ने लगभग ९.५५ लाख करोड़ रुपए के कैपेक्स की योजना बनाई है।
एनएसओ का कहना है कि ऐसे अनुमान सामान्यतः थोड़े सावधानीपूर्वक होते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आगे भी निवेश का माहौल मजबूत बना रह सकता है।
इस सर्वेक्षण में विभिन्न उद्योगों की बड़ी निजी कंपनियों को शामिल किया गया है, ताकि निवेश के रुझानों को समझकर नीति बनाने और रणनीति की योजना में मदद की जा सके।
इसके अतिरिक्त, कंपनियां नई तकनीक और हरित ऊर्जा पर भी ध्यान दे रही हैं। लगभग ६.६२ प्रतिशत निवेश सौर, पवन और बायोमास जैसी हरित ऊर्जा में किया जा रहा है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ५.८३ प्रतिशत निवेश रोबोटिक उपकरणों पर और कुल मिलाकर २.८३ प्रतिशत निवेश रोबोटिक्स पर किया जा रहा है।