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भारत के पूंजीगत व्यय में तीसरी तिमाही में 23.4 प्रतिशत की कमी: आईसीआरए रिपोर्ट

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भारत के पूंजीगत व्यय में तीसरी तिमाही में 23.4 प्रतिशत की कमी: आईसीआरए रिपोर्ट

सारांश

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत के पूंजीगत व्यय में 23.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। आईसीआरए की रिपोर्ट में इस कमी के कारणों और आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।

मुख्य बातें

भारत का पूंजीगत व्यय 23.4 प्रतिशत घटा है।
सरकारी खर्च में कमी का प्रभाव पड़ सकता है।
राज्य सरकारों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
गृहणी जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
त्योहारी मांग से आर्थिक गतिविधियां बनी रहेंगी।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में सालाना आधार पर 23.4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। यह जानकारी रविवार को जारी आईसीआरए की नई रिपोर्ट में स्पष्ट हुई है।

आईसीआरए द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकारी खर्च में कमी के चलते इस तिमाही में आर्थिक विकास की गति में थोड़ी कमी आ सकती है। हालाँकि, त्योहारी मांग और राज्यों के स्तर पर बढ़े पूंजीगत खर्च से समग्र आर्थिक गतिविधियों को सहायता मिलती रहेगी।

राज्य सरकारों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 24 राज्यों के आंकड़ों के अनुसार, उनकी संयुक्त पूंजीगत व्यय और शुद्ध ऋण में तीसरी तिमाही में 21.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले तिमाही में गिरावट के बाद सुधार को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, इन राज्यों का कुल कैपेक्स दूसरी तिमाही के 1.8 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर तीसरी तिमाही में 2.1 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो लगभग केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च के बराबर है।

कुल मिलाकर, केंद्र और राज्यों का संयुक्त पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 4.2 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 4.4 लाख करोड़ रुपए से थोड़ा कम है।

यह तुलना दूसरी तिमाही में दर्ज 16.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि से की जा सकती है, जो पहले की तेज रफ्तार के बाद सामान्य स्थिति में आने का संकेत देती है।

आईसीआरए ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.2 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछली तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत थी।

हालांकि, इस नरमी के बावजूद वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है, जिसे मजबूत त्योहारों की मांग और जीएसटी सुधार के लाभ का सहारा मिलेगा।

आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री और रिसर्च प्रमुख अदिति नायर ने कहा कि नए आधार वर्ष के तहत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने कहा, "लगातार धीमी पड़ती वृद्धि के कारणों में प्रतिकूल आधार प्रभाव, सरकारी पूंजीगत खर्च में कमी, राज्य सरकारों के राजस्व खर्च में सुस्ती और कमजोर माल निर्यात शामिल हैं।"

राजस्व के मोर्चे पर, केंद्र सरकार के गैर-ब्याज राजस्व व्यय में गिरावट की रफ्तार काफी कम हुई है।

तीसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 3.5 प्रतिशत घटा, जबकि दूसरी तिमाही में इसमें 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई थी।

इस बीच, 24 राज्यों का संयुक्त गैर-ब्याज राजस्व खर्च 2.7 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि यह पिछली तिमाही की तुलना में धीमी गति से बढ़ा।

कुल मिलाकर, केंद्र और राज्यों का संयुक्त गैर-ब्याज राजस्व खर्च तीसरी तिमाही में 0.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दूसरी तिमाही में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत के पूंजीगत व्यय में कमी आर्थिक विकास के लिए चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, राज्यों का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हमें इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की नीतियों पर विचार करना चाहिए।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के पूंजीगत व्यय में कमी का मुख्य कारण क्या है?
भारत के पूंजीगत व्यय में कमी का मुख्य कारण सरकारी खर्च में कमी और आर्थिक विकास की धीमी गति है।
आईसीआरए की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कैपेक्स में 23.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।
राज्य सरकारों का प्रदर्शन कैसा है?
राज्य सरकारों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें 24 राज्यों का संयुक्त पूंजीगत व्यय और शुद्ध ऋण में 21.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
क्या जीडीपी वृद्धि दर पर असर पड़ेगा?
हां, आईसीआरए ने अनुमान लगाया है कि जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.2 प्रतिशत रह सकती है।
क्या त्योहारी मांग का असर पड़ेगा?
हां, त्योहारी मांग और जीएसटी सुधार के लाभ से वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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