वित्त वर्ष 27 में राज्यों द्वारा सार्वजनिक निवेश पर ध्यान केंद्रित रखने का निर्णय, पूंजीगत खर्च में वृद्धि 8-10 प्रतिशत रहने का अनुमान: रिपोर्ट
सारांश
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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के राज्य वित्त वर्ष 27 में सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे। लेकिन, पूंजीगत खर्च में वृद्धि 8-10 प्रतिशत के आस-पास रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में साझा की गई।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि इससे पूंजीगत खर्च सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 2.3 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत के बीच रह सकता है।
रेटिंग एजेंसी ने बताया कि जनकल्याणकारी योजनाओं पर अधिक खर्च और ऊर्जा एवं कमोडिटी की बढ़ती लागत के कारण राज्यों का राजस्व खर्च बढ़ सकता है।
राज्यों की राजस्व प्राप्ति वित्त वर्ष 2026 में 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 7.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो नॉमिनल जीएसडीपी से कम है। इसका मुख्य कारण अनुदानों में कमी और कुछ बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशीलता है, जो समग्र राजस्व प्राप्ति पर असर डाल सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते बढ़ी हुई सब्सिडी आवश्यकताओं से केंद्र सरकार पर राजकोषीय दबावों के कारण केंद्रीय हस्तांतरणों की वृद्धि दर में कमी आने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “हालांकि, पूंजीगत व्यय प्राथमिकता बना रहेगा, लेकिन राजकोषीय संसाधनों में कमी के कारण इसकी वृद्धि धीमी हो सकती है, जिससे राजकोषीय घाटे और ऋण में मामूली वृद्धि की संभावना है।”
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर प्रसन्ना कृष्णन ने कहा, “राजस्व घाटा वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी के 0.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में लगभग 1.2 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसलिए, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा क्योंकि राज्य कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं और पूंजी निवेश को बनाए रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने मध्यम राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देना जारी रखा है, जो बुनियादी ढांचे के निर्माण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है।