स्पैम कॉल पर सरकार का कड़ा प्रहार: पहली तिमाही में 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों पर कार्रवाई, 263 प्रेषक ब्लैकलिस्ट
सारांश
मुख्य बातें
संचार मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अनचाहे व्यावसायिक कॉल और संदेशों (यूसीसी) पर लगाम लगाने के लिए 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और बार-बार नियम तोड़ने वाले 263 प्रेषकों को ब्लैकलिस्ट किया गया। यह कदम भारत में स्पैम कॉल और प्रमोशनल संदेशों की बढ़ती समस्या पर केंद्र सरकार की अब तक की सबसे व्यापक तिमाही कार्रवाई मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रालय के अनुसार, उल्लंघनकर्ताओं पर कई स्तरों पर कार्रवाई की गई — जिसमें आउटगोइंग सेवाओं पर रोक, दीर्घकालिक कनेक्शन निलंबन, सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के स्तर पर प्रेषकों की ब्लैकलिस्टिंग और एसएमएस हेडर ब्लॉकिंग शामिल हैं। इसी अवधि में 2.43 लाख से अधिक चेतावनी नोटिस केवल एक सप्ताह के भीतर जारी किए गए, जो सरकार की चेतावनी प्रणाली की तेज़ी को दर्शाता है।
पहली तिमाही में देश के टेलीकॉम नेटवर्क पर कुल 730.82 अरब कॉल की गईं, जिनके मुकाबले यूसीसी से जुड़ी 10.85 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। आँकड़ों के अनुसार, यह औसतन प्रति 10 लाख कॉल पर लगभग 1.5 शिकायतें बनती हैं।
एआई की भूमिका
स्पैम की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रणाली तैनात की गई है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली ने 24.43 अरब संदिग्ध स्पैम कॉल और एसएमएस की पहचान की। इससे उपभोक्ताओं को यह तय करने में सहूलियत मिली कि वे ऐसे कॉल या संदेश नजरअंदाज करें या सतर्कता के साथ स्वीकार करें।
डीएनडी व्यवस्था का असर
पंजीकृत डू नॉट डिस्टर्ब (डीएनडी) प्राथमिकताओं के चलते इस तिमाही में 1.48 अरब प्रमोशनल कॉल और 7.30 अरब प्रमोशनल एसएमएस ब्लॉक किए गए। वहीं, अधिकृत चैनलों के ज़रिए 13.16 अरब प्रमोशनल कॉल और 248.06 अरब व्यावसायिक एसएमएस वैध रूप से भेजे गए। गौरतलब है कि देश में 112 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं ने अभी तक डीएनडी प्राथमिकताएं दर्ज नहीं कराई हैं, जिससे वे पंजीकृत टेलीमार्केटर और कंपनियों के व्यावसायिक संदेशों की पहुँच में बने हुए हैं।
ट्राई डीएनडी ऐप स्पैम शिकायत दर्ज कराने का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है — कुल शिकायतों में से लगभग 89 प्रतिशत इसी ऐप के ज़रिए दर्ज की गईं। इसके अलावा उपभोक्ता अपने टेलीकॉम सेवा प्रदाता की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या 1909 पर कॉल अथवा एसएमएस के माध्यम से भी डीएनडी प्राथमिकताएं दर्ज और संशोधित कर सकते हैं।
140 और 1600 सीरीज़: पहचान का नया तरीका
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने प्रमोशनल कॉल के लिए 140 सीरीज़ निर्धारित की है, जिससे उपभोक्ता आसानी से पहचान सकें कि आने वाली कॉल विज्ञापन संबंधी है। ये कॉल ग्राहकों की डीएनडी प्राथमिकताओं की जाँच के बाद ही भेजी जाती हैं। वहीं, 1600 सीरीज़ बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन संबंधी कॉल के लिए आरक्षित है, जिससे नागरिक आधिकारिक संचार की पहचान कर सकें।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल धोखाधड़ी और फ़िशिंग कॉल की शिकायतें राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ रही हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता अनचाहे प्रचार संदेशों और कॉल से बचना चाहते हैं, उन्हें डीएनडी रजिस्ट्री में अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करानी चाहिए। एआई-आधारित निगरानी और सख्त ब्लैकलिस्टिंग नीति के साथ, सरकार का इरादा आगामी तिमाहियों में इस कार्रवाई को और विस्तार देने का है।