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ट्राई का ट्रूकॉलर को निर्देश: 1600 सीरीज कॉल्स से 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग हटाएं

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ट्राई का ट्रूकॉलर को निर्देश: 1600 सीरीज कॉल्स से 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग हटाएं

सारांश

ट्राई ने ट्रूकॉलर को सख्त निर्देश दिया है कि 1600 सीरीज — जो बैंकिंग, बीमा और सरकारी कॉल्स के लिए आरक्षित है — पर 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग न लगाया जाए। नियामक का कहना है कि ऐसे लेबल जरूरी वित्तीय और सरकारी सूचनाओं तक पहुँच में बाधा बन सकते हैं।

मुख्य बातें

ट्राई ने 19 जुलाई 2026 को ट्रूकॉलर को 1600 सीरीज कॉल्स से 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग हटाने का निर्देश दिया।
1600 सीरीज RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA की निगरानी में काम करने वाली बीएफएसआई कंपनियों की ट्रांजैक्शनल व सर्विस कॉल्स के लिए आरक्षित है।
140 सीरीज पंजीकृत कंपनियों के प्रमोशनल कॉल के लिए निर्धारित; ट्राई ने DND ऐप के जरिए इन्हें ब्लॉक करने का विकल्प देने का सुझाव दिया।
ट्रूकॉलर का दावा — नंबर सीरीज के अनिवार्य उपयोग के बाद से स्पैम कॉल्स बढ़ी हैं और उपयोगकर्ताओं का भरोसा घटा है।
ट्राई के अनुसार, इन कॉल्स में धोखाधड़ी अलर्ट, बैंकिंग नोटिफिकेशन और सरकारी सूचनाएँ शामिल होती हैं, इसलिए इन्हें ब्लॉक करना नुकसानदेह हो सकता है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 19 जुलाई 2026 को कॉलर-आईडी ऐप ट्रूकॉलर को औपचारिक निर्देश दिया कि वह 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स पर 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' का लेबल प्रदर्शित करना बंद करे। नियामक का तर्क है कि यह टैग दूरसंचार उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है और सरकारी व वित्तीय संस्थाओं की जरूरी कॉल्स के प्रति अनावश्यक संदेह पैदा करता है।

मुख्य घटनाक्रम

ट्राई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 1600 सीरीज विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र की कंपनियों की सर्विस और ट्रांजैक्शनल कॉल्स के लिए आरक्षित है। इस सीरीज के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) की देखरेख में काम करने वाली संस्थाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस सीरीज का उपयोग सरकार और नागरिकों के बीच आधिकारिक संचार के लिए भी किया जाता है।

वहीं, 140 सीरीज विभिन्न क्षेत्रों की पंजीकृत कंपनियों द्वारा किए जाने वाले प्रमोशनल कॉल के लिए निर्धारित है। ट्राई ने इस सीरीज पर भी 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग को अनुचित बताया है।

ट्राई का रुख और सुझाव

नियामक ने ट्रूकॉलर को सुझाव दिया है कि वह उपयोगकर्ताओं को एक स्पष्ट संदेश दिखाए, जिसमें बताया जाए कि वे ट्राई के आधिकारिक 'डू नॉट डिस्टर्ब' (DND) प्रेफरेंस मैनेजमेंट ऐप के माध्यम से 140 सीरीज से आने वाले अनचाहे प्रमोशनल संचार को स्वयं ब्लॉक करने का विकल्प चुन सकते हैं। अधिकारी के अनुसार, व्यक्तिगत नंबरों को लेबल करने के बजाय DND प्रणाली के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाना अधिक प्रभावी और व्यवस्थित समाधान है।

वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी कि 1600 सीरीज के नंबरों को किसी भी स्थिति में इस प्रकार चिह्नित नहीं किया जाना चाहिए कि उपभोक्ता उन्हें उठाने से बचें, क्योंकि इन कॉल्स में धोखाधड़ी अलर्ट, लेनदेन सत्यापन, बैंकिंग सूचनाएँ और सरकारी संदेश शामिल हो सकते हैं।

ट्रूकॉलर का पक्ष

ट्रूकॉलर ने अपने बचाव में कहा है कि ट्राई द्वारा समर्पित नंबर सीरीज के अनिवार्य उपयोग और कॉलर-आईडी ऐप्स को इन नंबरों के लिए समुदाय-रिपोर्टेड स्पैम जानकारी दिखाने से रोकने के बाद से स्पैम कॉल्स में वृद्धि देखी गई है। कंपनी के अनुसार, कई उपयोगकर्ताओं ने इन सीरीज से आने वाली कॉल्स को नजरअंदाज करना या ब्लॉक करना शुरू कर दिया है, जिससे वास्तविक व्यावसायिक संचार पर भरोसा घट रहा है।

आम जनता पर असर

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में स्पैम और फर्जी कॉल्स की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। एक ओर ट्राई चाहता है कि विनियमित नंबर सीरीज पर भरोसा बना रहे, वहीं दूसरी ओर ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स उपयोगकर्ताओं की सामूहिक रिपोर्टिंग के आधार पर काम करते हैं। गौरतलब है कि यदि उपभोक्ता बैंकिंग या सरकारी कॉल्स को स्पैम समझकर काट देते हैं, तो इससे महत्वपूर्ण वित्तीय और सुरक्षा सूचनाएँ उन तक नहीं पहुँच पाएंगी।

आगे क्या होगा

ट्राई के निर्देश के बाद ट्रूकॉलर को अपनी लेबलिंग नीति में बदलाव करना होगा। यह मामला डिजिटल संचार नियमन और तृतीय-पक्ष ऐप्स की भूमिका को लेकर एक व्यापक नीतिगत बहस की ओर संकेत करता है, जिसका असर करोड़ों भारतीय मोबाइल उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ट्रूकॉलर का पूरा व्यवसाय-मॉडल उपयोगकर्ताओं की सामूहिक रिपोर्टिंग पर टिका है। समस्या यह है कि स्पैमर्स भी इन्हीं विनियमित सीरीज का दुरुपयोग करते हैं, और ट्राई के पास अभी तक इसे रोकने का कोई ठोस तंत्र नहीं है। जब तक 1600 और 140 सीरीज से होने वाले दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश नहीं लगता, तब तक ट्रूकॉलर को लेबलिंग बंद करने का निर्देश देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उसे ढकने की कोशिश मात्र है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्राई ने ट्रूकॉलर को क्या निर्देश दिया है?
ट्राई ने ट्रूकॉलर को निर्देश दिया है कि वह 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स पर 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' का टैग प्रदर्शित न करे। नियामक का कहना है कि ऐसे लेबल उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं और जरूरी बैंकिंग व सरकारी सूचनाओं तक पहुँच में बाधा डालते हैं।
1600 नंबर सीरीज किसके लिए इस्तेमाल होती है?
1600 सीरीज ट्राई द्वारा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र की कंपनियों की सर्विस और ट्रांजैक्शनल कॉल्स के लिए आरक्षित है। इसमें RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA की निगरानी में काम करने वाली संस्थाएँ शामिल हैं, और इसका उपयोग सरकारी संचार के लिए भी होता है।
140 सीरीज और 1600 सीरीज में क्या अंतर है?
140 सीरीज विभिन्न क्षेत्रों की पंजीकृत कंपनियों के प्रमोशनल कॉल के लिए निर्धारित है, जबकि 1600 सीरीज बीएफएसआई और सरकारी ट्रांजैक्शनल व सर्विस कॉल्स के लिए है। ट्राई ने सुझाव दिया है कि 140 सीरीज की अनचाही कॉल्स को उपयोगकर्ता DND ऐप के जरिए खुद ब्लॉक कर सकते हैं।
ट्रूकॉलर ने ट्राई के निर्देश पर क्या कहा?
ट्रूकॉलर का कहना है कि ट्राई द्वारा समर्पित नंबर सीरीज के अनिवार्य उपयोग और समुदाय-रिपोर्टेड स्पैम जानकारी दिखाने पर रोक के बाद से स्पैम कॉल्स बढ़ गई हैं। कंपनी के अनुसार, इससे उपयोगकर्ताओं ने इन सीरीज से आने वाली कॉल्स को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है, जिससे वास्तविक व्यावसायिक संचार पर भरोसा घट रहा है।
उपभोक्ता अनचाही प्रमोशनल कॉल्स से कैसे बच सकते हैं?
ट्राई ने सुझाव दिया है कि उपभोक्ता आधिकारिक DND प्रेफरेंस मैनेजमेंट ऐप के जरिए 140 सीरीज से आने वाली अनचाही प्रमोशनल कॉल्स को ब्लॉक कर सकते हैं। नियामक के अनुसार, यह व्यक्तिगत नंबरों को लेबल करने से अधिक प्रभावी और व्यवस्थित समाधान है।
राष्ट्र प्रेस
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