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गुजरात में 15,000 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर: 65 MW क्षमता जुड़ेगी, ₹314 करोड़ आवंटित

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गुजरात में 15,000 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर: 65 MW क्षमता जुड़ेगी, ₹314 करोड़ आवंटित

सारांश

गुजरात इस वित्त वर्ष 15,000 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर लगाकर अब तक का सबसे बड़ा एकल-वर्षीय विस्तार करने जा रहा है। ₹314 करोड़ के बजट और IIoT निगरानी तंत्र के साथ यह कदम राज्य की 47,178 MW नवीकरणीय क्षमता को और मजबूत करेगा — और देश में नंबर-एन की पोजीशन बनाए रखने की कोशिश भी।

मुख्य बातें

गुजरात 2026-27 में 15,000 अतिरिक्त सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करेगा।
इस विस्तार से लगभग 65 मेगावाट क्षमता जुड़ेगी; कार्यक्रम की कुल क्षमता 160 MW से अधिक होगी।
मार्च 2026 तक 6,014 सरकारी इमारतों पर 95 MW की सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है।
इस कार्यक्रम के लिए ₹314 करोड़ आवंटित — ₹278 करोड़ सामान्य इमारतों, ₹33 करोड़ जनजातीय विभाग और ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय विभाग के लिए।
IIoT आधारित रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू; हर 15 मिनट में डेटा रिकॉर्ड, प्रतिदिन 96 रीडिंग ।
गुजरात की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 47,178 MW ; राजस्थान को पछाड़कर देश में पहले स्थान पर।

गुजरात सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 15,000 अतिरिक्त सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस विस्तार से राज्य की मौजूदा रूफटॉप सोलर क्षमता में लगभग 65 मेगावाट की वृद्धि अपेक्षित है, जिससे कार्यक्रम की संचयी क्षमता 160 मेगावाट से अधिक हो जाएगी। यह अब तक इस पहल का सबसे बड़ा एकल-वर्षीय विस्तार होगा।

मौजूदा स्थिति और पृष्ठभूमि

मार्च 2026 तक गुजरात में 6,014 सरकारी इमारतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 95 मेगावाट है। यह कार्यक्रम 2011-12 से जलवायु परिवर्तन विभाग के अधीन गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और परंपरागत बिजली पर सरकारी व्यय घटाना है।

जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि अकेले 2025-26 में 1,377 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिससे 17.1 मेगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय क्षमता जुड़ी।

बजट आवंटन और विभागीय वितरण

राज्य सरकार ने 2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए ₹314 करोड़ निर्धारित किए हैं। इस राशि का विभागीय वितरण इस प्रकार है:

₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, ₹33 करोड़ जनजातीय विकास विभाग (Tribal Development Department) द्वारा प्रबंधित इमारतों के लिए, और ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (Social Justice and Empowerment Department) के अंतर्गत आने वाली इमारतों के लिए आवंटित किए गए हैं। योजना के तहत 100 प्रतिशत पूँजी-लागत सहायता जलवायु परिवर्तन विभाग के वार्षिक बजट से दी जाती है।

IIoT आधारित निगरानी तंत्र

गुजरात सरकार ने इस वर्ष सरकारी इमारतों पर स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की दूरस्थ निगरानी के लिए 'इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IIoT) आधारित रिन्यूएबल एनर्जी मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया है। मोढवाडिया के अनुसार, यह प्रणाली स्मार्ट मीटर, सेंसर और IoT गेटवे को GPRS, 4G तथा इथरनेट के माध्यम से जोड़ती है। यह हर 15 मिनट में प्रदर्शन डेटा दर्ज करती है, जिससे प्रतिदिन 96 रीडिंग प्राप्त होती हैं और स्वचालित रिमोट अलर्ट भी प्रदान किए जाते हैं। वर्तमान में यह इंटरफेस 142.5 मेगावाट सोलर और 68.3 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन की निगरानी करता है।

पर्यावरण और आर्थिक लाभ

जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि सोलर इंस्टॉलेशन से सरकारी दफ्तरों की पारंपरिक बिजली खपत एवं उस पर होने वाले व्यय में कमी आने के साथ-साथ परंपरागत बिजली उत्पादन से जुड़े प्रदूषण में भी कटौती होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय संदर्भ में गुजरात की स्थिति

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, गुजरात की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 47,178 मेगावाट है। इसके साथ राज्य ने राजस्थान को पीछे छोड़ते हुए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में देश का अग्रणी राज्य होने का दर्जा हासिल किया है। यह विस्तार गुजरात के उस व्यापक ऊर्जा रूपांतरण एजेंडे को और मजबूत करता है, जिसमें सोलर और पवन ऊर्जा की निर्णायक भूमिका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी इमारतों पर 100 प्रतिशत पूँजी-लागत सहायता के साथ इस पैमाने पर विस्तार भविष्य में निजी क्षेत्र के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। आने वाले महीनों में 15,000 इमारतों पर सोलर सिस्टम की स्थापना की प्रगति इस कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का पैमाना तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

014 इमारतें) से ढाई गुना अधिक इमारतें एक ही वर्ष में जोड़ने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की रफ्तार होगी: अब तक औसतन प्रति वर्ष लगभग 1,000 इमारतें जुड़ी हैं, और एकाएक 15,000 का लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखला व श्रमबल दोनों पर दबाव डाल सकता है। IIoT निगरानी प्रणाली तकनीकी रूप से सराहनीय है, किंतु यह तभी प्रासंगिक होगी जब स्थापना समयसीमा के भीतर हो। गुजरात की 47,178 MW नवीकरणीय क्षमता निस्संदेह राष्ट्रीय नेतृत्व का संकेत है, पर सरकारी इमारतों का 95 MW हिस्सा अभी इस विशाल क्षमता का एक छोटा अंश मात्र है — जिसे इस विस्तार के बाद भी 160 MW तक ही पहुँचना है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार 2026-27 में कितनी इमारतों पर रूफटॉप सोलर लगाएगी?
गुजरात सरकार 2026-27 के दौरान 15,000 अतिरिक्त सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने की योजना बना रही है। इससे लगभग 65 मेगावाट क्षमता जुड़ेगी और कार्यक्रम की कुल क्षमता 160 मेगावाट से अधिक हो जाएगी।
इस रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
राज्य सरकार ने 2026-27 के लिए ₹314 करोड़ आवंटित किए हैं। इसमें ₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, ₹33 करोड़ जनजातीय विकास विभाग की इमारतों के लिए और ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की इमारतों के लिए हैं।
गुजरात में अब तक कितनी सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर लग चुका है?
मार्च 2026 तक गुजरात में 6,014 सरकारी इमारतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 95 मेगावाट है। यह कार्यक्रम 2011-12 से GEDA द्वारा संचालित किया जा रहा है।
IIoT आधारित रिन्यूएबल एनर्जी मॉनिटरिंग सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह 'इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स' पर आधारित एक दूरस्थ निगरानी प्रणाली है जो स्मार्ट मीटर, सेंसर और IoT गेटवे को GPRS, 4G और इथरनेट के ज़रिए जोड़ती है। यह हर 15 मिनट में प्रदर्शन डेटा दर्ज करती है (प्रतिदिन 96 रीडिंग) और स्वचालित रिमोट अलर्ट भी देती है। वर्तमान में यह 142.5 MW सोलर और 68.3 MW पवन ऊर्जा उत्पादन की निगरानी कर रही है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में गुजरात की राष्ट्रीय स्थिति क्या है?
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार गुजरात की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 47,178 मेगावाट है। राज्य ने राजस्थान को पीछे छोड़ते हुए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में देश का अग्रणी राज्य होने का दर्जा हासिल किया है।
राष्ट्र प्रेस
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