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गुजरात की 6,014 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर, 95 मेगावाट क्षमता; 15,000 इमारतों तक विस्तार का लक्ष्य

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गुजरात की 6,014 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर, 95 मेगावाट क्षमता; 15,000 इमारतों तक विस्तार का लक्ष्य

सारांश

गुजरात ने 2011-12 से शुरू GEDA की पहल के तहत 6,014 सरकारी इमारतों पर 95 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता हासिल कर ली है। अब 15,000 और इमारतों पर विस्तार और ₹314 करोड़ के बजट से 65 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की तैयारी है — देश के किसी भी राज्य की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूफटॉप सोलर मुहिम।

मुख्य बातें

मार्च 2026 तक गुजरात की 6,014 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, कुल क्षमता 95 मेगावाट ।
2025-26 में अकेले 1,377 इमारतों पर 17.1 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई।
चालू वित्त वर्ष में 15,000 इमारतों पर विस्तार का लक्ष्य; 65 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता अपेक्षित।
2026-27 के लिए ₹314 करोड़ बजट; ₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों को, ₹33 करोड़ आदिवासी विकास को।
गुजरात 47,178 मेगावाट इंस्टॉल्ड क्षमता के साथ नवीकरणीय ऊर्जा में देशभर में पहले स्थान पर।
स्मार्ट निगरानी प्रणाली हर 15 मिनट पर डेटा कैप्चर करती है, प्रतिदिन 96 रीडिंग ।

गुजरात सरकार की 6,014 सरकारी इमारतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और राज्य की कुल सोलर क्षमता मार्च 2026 तक 95 मेगावाट पर पहुँच गई है। जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने 5 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष में 15,000 और इमारतों को इस कार्यक्रम के तहत कवर करने की योजना है।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और प्रगति

गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) ने 2011-12 में जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत इस पहल की शुरुआत की थी। इसका मूल उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाना और सरकारी बिजली खर्च कम करना है। यह कार्यक्रम डेढ़ दशक से अधिक समय से लगातार क्रियान्वित हो रहा है।

मोढवाडिया ने बताया कि 2025-26 के दौरान अकेले 1,377 सरकारी इमारतों पर सोलर सिस्टम लगाए गए और 17.1 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। इस एकल वर्ष की वृद्धि कार्यक्रम के इतिहास में सबसे तेज़ विस्तारों में से एक मानी जा रही है।

मौजूदा विस्तार योजना और बजट

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए ₹314 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। जीईडीए के निदेशक धर्मेंद्र पटेल के अनुसार, इस राशि में से ₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की इमारतों के लिए, और ₹33 करोड़ आदिवासी विकास विभाग की इमारतों के लिए आवंटित किए गए हैं।

मोढवाडिया ने बताया कि इस साल के प्रस्तावित विस्तार से लगभग 65 मेगावाट अतिरिक्त सोलर क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के लिए जलवायु परिवर्तन विभाग के वार्षिक बजट आवंटन से 100 प्रतिशत पूंजीगत लागत सहायता प्रदान की जाती है।

पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ

जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री प्रवीण माली ने कहा कि सोलर सिस्टम लगाने से पारंपरिक बिजली की खपत में कमी, सरकारी दफ्तरों के बिजली खर्च में राहत और पारंपरिक बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण में कटौती की उम्मीद है। यह पहल राज्य की व्यापक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का अभिन्न अंग है।

गौरतलब है कि केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, गुजरात 47,178 मेगावाट की इंस्टॉल्ड क्षमता के साथ नवीकरणीय ऊर्जा में देश का शीर्ष राज्य बन गया है और राजस्थान को पीछे छोड़ दिया है। सौर और पवन ऊर्जा इस मिश्रण की मुख्य धुरी हैं।

स्मार्ट निगरानी तंत्र

मोढवाडिया ने बताया कि इस कार्यक्रम का तकनीकी ढाँचा स्मार्ट मीटर, सेंसर और IoT गेटवे पर आधारित है, जो GPRS, 4G और Ethernet के ज़रिए कनेक्टेड हैं। यह प्रणाली हर 15 मिनट पर प्रदर्शन डेटा कैप्चर करती है, जिससे प्रतिदिन 96 रीडिंग तक प्राप्त होती हैं और स्वचालित रिमोट अलर्ट भेजे जाते हैं। फ़िलहाल यह इंटरफेस 142.5 मेगावाट सौर और 68.3 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन सहित बड़ी क्षमता की निगरानी कर रहा है।

आगे क्या

यदि 15,000 इमारतों का लक्ष्य पूरा होता है, तो गुजरात के सार्वजनिक अवसंरचना में रूफटॉप सोलर क्षमता 160 मेगावाट से अधिक हो जाएगी। यह विस्तार राज्य को सरकारी ऊर्जा खपत के मामले में नेट-ज़ीरो की दिशा में एक ठोस कदम आगे ले जाएगा, और देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 15 वर्षों में 6,014 इमारतें कवर हुईं और अब एक ही वित्त वर्ष में 15,000 का लक्ष्य रखा गया है — यह तीन गुना से अधिक की छलाँग है। क्रियान्वयन की गति और आपूर्ति श्रृंखला की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके अलावा, ₹314 करोड़ का 100 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान मॉडल टिकाऊ तो है, पर यह जाँचना ज़रूरी है कि रखरखाव और दीर्घकालिक संचालन लागत का बोझ किस पर पड़ेगा। राज्य की 47,178 मेगावाट की कुल नवीकरणीय क्षमता के सामने सरकारी इमारतों का 95 मेगावाट छोटा दिखता है, पर यह नीतिगत संकेत के रूप में अन्य राज्यों के लिए दिशा तय करता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम में अब तक क्या हासिल हुआ है?
मार्च 2026 तक गुजरात की 6,014 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लग चुके हैं और कुल स्थापित क्षमता 95 मेगावाट तक पहुँच गई है। 2025-26 में अकेले 1,377 इमारतों पर 17.1 मेगावाट जोड़ी गई, जो किसी एक वर्ष की सबसे बड़ी वृद्धि है।
GEDA का यह सोलर कार्यक्रम कब शुरू हुआ और इसे कौन लागू करता है?
गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) ने जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत इस कार्यक्रम को 2011-12 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना और सरकारी बिजली खर्च घटाना है।
2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए कितना बजट रखा गया है?
2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए ₹314 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इसमें ₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, ₹33 करोड़ आदिवासी विकास विभाग की इमारतों के लिए और ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की इमारतों के लिए आवंटित हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा में गुजरात की राष्ट्रीय स्थिति क्या है?
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, गुजरात 47,178 मेगावाट की इंस्टॉल्ड क्षमता के साथ देश का नंबर-1 नवीकरणीय ऊर्जा राज्य बन गया है। राज्य ने राजस्थान को पीछे छोड़ते हुए यह स्थान हासिल किया है।
रूफटॉप सोलर सिस्टम की निगरानी कैसे होती है?
इस कार्यक्रम में स्मार्ट मीटर, सेंसर और IoT गेटवे का उपयोग होता है जो GPRS, 4G और Ethernet से जुड़े हैं। यह प्रणाली हर 15 मिनट पर डेटा कैप्चर करती है, जिससे प्रतिदिन 96 रीडिंग मिलती हैं और स्वचालित रिमोट अलर्ट भेजे जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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