गुजरात की 6,014 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर, 95 मेगावाट क्षमता; 15,000 इमारतों तक विस्तार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार की 6,014 सरकारी इमारतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और राज्य की कुल सोलर क्षमता मार्च 2026 तक 95 मेगावाट पर पहुँच गई है। जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने 5 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष में 15,000 और इमारतों को इस कार्यक्रम के तहत कवर करने की योजना है।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और प्रगति
गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) ने 2011-12 में जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत इस पहल की शुरुआत की थी। इसका मूल उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाना और सरकारी बिजली खर्च कम करना है। यह कार्यक्रम डेढ़ दशक से अधिक समय से लगातार क्रियान्वित हो रहा है।
मोढवाडिया ने बताया कि 2025-26 के दौरान अकेले 1,377 सरकारी इमारतों पर सोलर सिस्टम लगाए गए और 17.1 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। इस एकल वर्ष की वृद्धि कार्यक्रम के इतिहास में सबसे तेज़ विस्तारों में से एक मानी जा रही है।
मौजूदा विस्तार योजना और बजट
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए ₹314 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। जीईडीए के निदेशक धर्मेंद्र पटेल के अनुसार, इस राशि में से ₹278 करोड़ सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, ₹3 करोड़ सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की इमारतों के लिए, और ₹33 करोड़ आदिवासी विकास विभाग की इमारतों के लिए आवंटित किए गए हैं।
मोढवाडिया ने बताया कि इस साल के प्रस्तावित विस्तार से लगभग 65 मेगावाट अतिरिक्त सोलर क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के लिए जलवायु परिवर्तन विभाग के वार्षिक बजट आवंटन से 100 प्रतिशत पूंजीगत लागत सहायता प्रदान की जाती है।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री प्रवीण माली ने कहा कि सोलर सिस्टम लगाने से पारंपरिक बिजली की खपत में कमी, सरकारी दफ्तरों के बिजली खर्च में राहत और पारंपरिक बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण में कटौती की उम्मीद है। यह पहल राज्य की व्यापक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का अभिन्न अंग है।
गौरतलब है कि केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, गुजरात 47,178 मेगावाट की इंस्टॉल्ड क्षमता के साथ नवीकरणीय ऊर्जा में देश का शीर्ष राज्य बन गया है और राजस्थान को पीछे छोड़ दिया है। सौर और पवन ऊर्जा इस मिश्रण की मुख्य धुरी हैं।
स्मार्ट निगरानी तंत्र
मोढवाडिया ने बताया कि इस कार्यक्रम का तकनीकी ढाँचा स्मार्ट मीटर, सेंसर और IoT गेटवे पर आधारित है, जो GPRS, 4G और Ethernet के ज़रिए कनेक्टेड हैं। यह प्रणाली हर 15 मिनट पर प्रदर्शन डेटा कैप्चर करती है, जिससे प्रतिदिन 96 रीडिंग तक प्राप्त होती हैं और स्वचालित रिमोट अलर्ट भेजे जाते हैं। फ़िलहाल यह इंटरफेस 142.5 मेगावाट सौर और 68.3 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन सहित बड़ी क्षमता की निगरानी कर रहा है।
आगे क्या
यदि 15,000 इमारतों का लक्ष्य पूरा होता है, तो गुजरात के सार्वजनिक अवसंरचना में रूफटॉप सोलर क्षमता 160 मेगावाट से अधिक हो जाएगी। यह विस्तार राज्य को सरकारी ऊर्जा खपत के मामले में नेट-ज़ीरो की दिशा में एक ठोस कदम आगे ले जाएगा, और देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।