17 जुलाई 2026
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पीएम सूर्य घर योजना: रूफटॉप सोलर स्थापना में उत्तर प्रदेश देशभर में दूसरे स्थान पर, 6.74 लाख संयंत्र लगे

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पीएम सूर्य घर योजना: रूफटॉप सोलर स्थापना में उत्तर प्रदेश देशभर में दूसरे स्थान पर, 6.74 लाख संयंत्र लगे

सारांश

रूफटॉप सोलर स्थापना में उत्तर प्रदेश ने 6,74,393 संयंत्रों के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया है — गुजरात के बाद। 2.28 गीगावाट क्षमता, ₹6.5 करोड़ प्रतिदिन का लाभ और 85,000 से अधिक रोज़गार — यूपी की सोलर छलांग अब आँकड़ों में दिख रही है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश ने पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर राष्ट्रीय रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
गुजरात ( 7,49,839 संयंत्र) पहले और महाराष्ट्र ( 6,73,717 संयंत्र) तीसरे स्थान पर है।
प्रदेश में 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित हुई; प्रतिवर्ष 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन संभव।
परिवारों को प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ मूल्य की सौर बिजली का लाभ मिल रहा है।
योजना से 7,000 से अधिक सोलर कंपनियाँ सक्रिय हुईं और 85,000 से अधिक लोगों को रोज़गार मिला।
रूफटॉप मॉडल से 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत और सालाना 27 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में संभावित कमी।

प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 संयंत्रों के साथ शीर्ष पर है, जबकि महाराष्ट्र 6,73,717 संयंत्रों के साथ तीसरे स्थान पर है।

मुख्य उपलब्धियाँ

राज्य सरकार ने 17 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी के चलते यह उपलब्धि संभव हुई। उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने, बैंक ऋण सुलभ कराने, डिस्कॉम निरीक्षण और सब्सिडी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए।

ऊर्जा क्षमता और आर्थिक लाभ

यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित की जा चुकी है। उनके अनुसार इस क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के परिवारों को प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ मूल्य की सौर बिजली का लाभ मिल रहा है, जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और बिजली बिल दोनों में कमी आई है।

रोज़गार और उद्योग पर असर

रविंदर सिंह के अनुसार, योजना के विस्तार से प्रदेश में सोलर क्षेत्र से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियाँ और व्यावसायिक इकाइयाँ सक्रिय हुई हैं। इनके माध्यम से 85,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिला है। सोलर पैनल स्थापना, डिज़ाइनिंग, इंजीनियरिंग, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, विपणन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित हुए हैं। रूफटॉप सोलर की बढ़ती माँग से सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर और केबल निर्माण उद्योगों को भी गति मिली है।

पर्यावरणीय प्रभाव

सरकार के अनुसार, रूफटॉप सोलर मॉडल के कारण बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ती और इससे 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है। सरकारी दावे के अनुसार, 2.28 गीगावाट क्षमता से हर साल करीब 27 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है — जो लगभग 12 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूरे देश में नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को तेज़ी से पूरा करने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस पैमाने पर सोलर स्थापना राष्ट्रीय ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। प्रदेश का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस क्षमता को और विस्तार देना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा आँकड़ों की गुणवत्ता में है — क्या ये संयंत्र वास्तव में चालू हैं और नेट मीटरिंग से जुड़े हैं, या केवल स्थापना की गिनती हो रही है? ₹6.5 करोड़ प्रतिदिन के लाभ का दावा सरकारी अनुमान पर आधारित है, जिसे स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है। गौरतलब है कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 6.74 लाख संयंत्र कुल परिवारों की तुलना में अभी भी एक छोटा अंश हैं — असली सफलता तब होगी जब योजना ग्रामीण और निम्न-आय परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुँचे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को अपनी छत पर सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी और मुफ्त बिजली का लाभ दिया जाता है। इसका उद्देश्य देशभर में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और परिवारों का बिजली बिल कम करना है।
उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर में दूसरा स्थान कैसे हासिल किया?
राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विभागीय समन्वय, नियमित निगरानी, बैंक ऋण सुलभता और सब्सिडी प्रक्रिया में तेज़ी के कारण यह उपलब्धि मिली। 17 जुलाई तक 6,74,393 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
यूपी में रूफटॉप सोलर से कितना रोज़गार सृजित हुआ है?
यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार, योजना के विस्तार से 7,000 से अधिक सोलर कंपनियाँ और व्यावसायिक इकाइयाँ सक्रिय हुई हैं, जिनके माध्यम से 85,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिला है।
यूपी की 2.28 गीगावाट सोलर क्षमता से पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
सरकारी दावे के अनुसार, इस क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन संभव है और हर साल करीब 27 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आ सकती है। यह लगभग 12 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर है।
राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर रैंकिंग में कौन-से राज्य शीर्ष पर हैं?
राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 संयंत्रों के साथ पहले, उत्तर प्रदेश 6,74,393 संयंत्रों के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 6,73,717 संयंत्रों के साथ तीसरे स्थान पर है।
राष्ट्र प्रेस
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