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गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, 2027 के 10 लाख लक्ष्य का 90% पूरा

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गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, 2027 के 10 लाख लक्ष्य का 90% पूरा

सारांश

गुजरात ने रूफटॉप सोलर में देश की अगुआई कर ली है — 9.08 लाख सिस्टम, 3,408 मेगावाट क्षमता और 2027 के लक्ष्य का 90% पूरा। SC/ST परिवारों को सिर्फ 5% अंशदान, बाकी सरकार वहन करती है। यह भारत के 2030 के 50% हरित ऊर्जा संकल्प की दिशा में एक ठोस राज्य-स्तरीय कदम है।

मुख्य बातें

गुजरात में पीएम सूर्य घर योजना के तहत 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित, कुल क्षमता 3,408 मेगावाट ।
यह राज्य के मार्च 2027 तक 10 लाख घरों के लक्ष्य का 90 प्रतिशत है।
गुजरात की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 30 सितंबर 2026 तक 55,511.46 मेगावाट — देश का 18.55% ।
SC/ST परिवारों को 2.18 किलोवाट-पीक तक सिस्टम पर केवल 5% अंशदान देना होगा; अन्य के लिए 10% ।
6 किलोवाट तक के सिस्टम पर ₹2,950 की नियामकीय शुल्क सहायता; नेटवर्क शुल्क और नेट मीटरिंग एग्रीमेंट की अनिवार्यता समाप्त।
राज्य की सोलर क्षमता 36,234.55 मेगावाट — भारत की कुल सोलर क्षमता का 21.2% ।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत गुजरात में अब तक 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे मार्च 2027 तक 10 लाख घरों में सोलर सिस्टम लगाने के राज्य के लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल हो गया है। इन प्रणालियों की संयुक्त क्षमता 3,408 मेगावाट है, और रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में गुजरात अब देश का अग्रणी राज्य बन चुका है।

राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में देश की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता का 18.21 प्रतिशत हिस्सा स्थापित है। यह उपलब्धि ऐसे समय में विशेष महत्त्व रखती है जब राज्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। गौरतलब है कि 30 सितंबर 2026 तक राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 55,511.46 मेगावाट तक पहुँच चुकी है, जो भारत की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का 18.55 प्रतिशत है।

सौर और पवन ऊर्जा में गुजरात की हिस्सेदारी

राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा का अकेला योगदान 36,234.55 मेगावाट है, जो भारत की कुल सोलर क्षमता का 21.2 प्रतिशत है। इसके अलावा, पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 17,043.76 मेगावाट है, जो देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता का 28.8 प्रतिशत है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि गुजरात भारत की हरित ऊर्जा रणनीति की धुरी बनता जा रहा है।

सरकार की वित्तीय सहायता और नीतिगत रियायतें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने आवासीय उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 6 किलोवाट तक के सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को नियामकीय शुल्क के रूप में ₹2,950 की सहायता दी जाती है। इसके साथ ही, 'नेटवर्क मजबूत करने का शुल्क' माफ किया गया है और 'नेट मीटरिंग एग्रीमेंट' की अनिवार्यता भी समाप्त की गई है।

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) परिवारों को 2.18 किलोवाट-पीक तक की क्षमता के सिस्टम पर निर्धारित लागत का केवल 5 प्रतिशत अंशदान देना होगा, जबकि अन्य उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत है। शेष राशि का बोझ केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाती हैं।

उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त सुविधाएँ

राज्य की सोलर नीति के तहत घरेलू उपभोक्ता 'नेट मीटरिंग' का लाभ उठा सकते हैं, जिसमें ग्रिड से ली गई और वापस दी गई बिजली दोनों का हिसाब रखा जाता है। रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए 'कनेक्टेड लोड' की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच भी सकते हैं और उन्हें बैंकिंग शुल्क से भी छूट प्रदान की गई है।

राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों से जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि देश ने 2030 तक अपनी बिजली जरूरतों का 50 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से पूरा करने का संकल्प लिया है। गुजरात का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय लक्ष्यों को गति देने में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। आने वाले महीनों में शेष 92,000 घरों में सिस्टम लगाने की रफ्तार यह तय करेगी कि राज्य मार्च 2027 की समयसीमा से पहले लक्ष्य पार कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी संख्या नहीं, गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग है — कितने सिस्टम वास्तव में सक्रिय हैं और कितने परिवारों को मुफ्त बिजली का वादा पूरा हो रहा है, यह डेटा अभी सार्वजनिक नहीं है। SC/ST परिवारों के लिए 5% अंशदान की नीति सराहनीय है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सहायता और रखरखाव की कमी ऐसी योजनाओं की पुरानी कमजोरी रही है। 2030 तक 50% हरित बिजली के राष्ट्रीय लक्ष्य में गुजरात की भूमिका निर्णायक है, लेकिन बिना मजबूत ग्रिड अवसंरचना और भंडारण क्षमता के, उत्पादन के आँकड़े अर्थव्यवस्था में वास्तविक बदलाव नहीं ला सकते।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत आवासीय उपभोक्ताओं की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं ताकि उन्हें मुफ्त या सस्ती बिजली मिल सके। इस योजना में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सब्सिडी देती हैं और उपभोक्ता का अंशदान न्यूनतम रखा गया है।
गुजरात में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
6 किलोवाट तक के सिस्टम पर उपभोक्ताओं को ₹2,950 की नियामकीय शुल्क सहायता मिलती है। SC/ST परिवारों को 2.18 किलोवाट-पीक तक के सिस्टम पर केवल 5% अंशदान देना होता है, जबकि अन्य उपभोक्ताओं के लिए यह 10% है। बची हुई लागत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं।
गुजरात रूफटॉप सोलर में देश का अग्रणी राज्य कैसे बना?
गुजरात में देश की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता का 18.21% हिस्सा स्थापित है और 9.08 लाख सिस्टम के साथ यह संख्या के हिसाब से शीर्ष पर है। राज्य सरकार ने नेट मीटरिंग एग्रीमेंट की अनिवार्यता समाप्त करने और नेटवर्क शुल्क माफ करने जैसे नीतिगत कदमों से इंस्टॉलेशन को आसान बनाया है।
मार्च 2027 तक 10 लाख रूफटॉप सोलर का लक्ष्य कब पूरा होगा?
नवंबर 2026 तक 9.08 लाख सिस्टम लग चुके हैं, यानी मार्च 2027 की समयसीमा तक लगभग 92,000 और सिस्टम लगाने हैं। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए राज्य सरकार के अनुसार लक्ष्य समय पर पूरा होने की उम्मीद है।
गुजरात की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता कितनी है?
30 सितंबर 2026 तक गुजरात की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 55,511.46 मेगावाट थी, जो देश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का 18.55% है। इसमें सोलर का हिस्सा 36,234.55 मेगावाट और पवन ऊर्जा का हिस्सा 17,043.76 मेगावाट है।
राष्ट्र प्रेस
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