एचडीएफसी बैंक ने ₹45 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के आरोप नकारे, मजबूत ऑडिट प्रणाली का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
एचडीएफसी बैंक ने बुधवार, 27 मई को उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें बैंक पर ₹45 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। बैंक ने स्पष्ट किया कि इस तरह की अटकलें 'चुनिंदा तथ्यों' पर आधारित हैं और सभी आंतरिक मामलों को स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सुलझाया जाता है। इस खुलासे के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बैंक के शेयर 2.69 प्रतिशत गिरकर ₹757.90 पर आ गए।
मुख्य आरोप क्या थे
रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (ACB) ने 12 मार्च को एक औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच का आदेश दिया। यह जांच वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) को किए गए कथित ₹45 करोड़ के भुगतान से जुड़ी बताई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ये भुगतान कथित तौर पर MSRDC द्वारा बैंक में जमा राशि पर अलग-अलग ब्याज दरों से संबंधित थे। आरोप यह भी था कि यह धनराशि सीधे ब्याज के रूप में जमा करने के बजाय बैंक के मार्केटिंग विभाग के माध्यम से भेजी गई और चार स्थानीय विक्रेताओं के ज़रिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में योगदान के रूप में दर्शाई गई।
इससे भी गंभीर आरोप यह था कि इस कथित व्यवस्था पर बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीश की उपस्थिति में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर चर्चा हुई थी।
बैंक की आधिकारिक प्रतिक्रिया
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा, 'हम चुनिंदा तथ्यों के आधार पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को पूरी तरह से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित मानदंडों के अनुसार निपटाया जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।'
बैंक ने यह भी दावा किया कि उसके पास मजबूत आंतरिक निरीक्षण, लेखापरीक्षा और नियंत्रण प्रक्रियाएँ मौजूद हैं, जो इस तरह की किसी भी अनियमितता को रोकने में सक्षम हैं।
शेयर बाज़ार पर असर
रिपोर्ट सामने आते ही निवेशकों में बेचैनी देखी गई। बुधवार दोपहर 2:50 बजे तक NSE पर एचडीएफसी बैंक का शेयर 2.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹757.90 पर कारोबार कर रहा था। गौरतलब है कि यह गिरावट उस दिन बाज़ार की सामान्य प्रवृत्ति से अलग थी, जो बैंक-विशिष्ट नकारात्मक भावना को दर्शाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आरोप — चाहे बाद में खारिज हो जाएँ — किसी भी बड़े बैंक की साख और शेयर मूल्य पर तत्काल असर डालते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र पहले से ही नियामकीय जांच के दायरे में है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों को अपनी ऑडिट समिति की कार्रवाइयों की जानकारी नियमित रूप से देनी होती है।
आगे क्या होगा
बैंक ने संकेत दिया है कि सभी आंतरिक समीक्षाएँ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जाएँगी। निवेशकों और नियामकों की नज़र अब इस बात पर होगी कि ACB की जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं, और क्या SEBI या RBI स्वतंत्र रूप से इस मामले की समीक्षा करते हैं।