14 अगस्त 2026
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लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक ने पार किया 10 करोड़ कंटेनर ट्रैकिंग का मील का पत्थर, पीयूष गोयल बोले — टेक्नोलॉजी बना रही सेक्टर को कुशल

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लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक ने पार किया 10 करोड़ कंटेनर ट्रैकिंग का मील का पत्थर, पीयूष गोयल बोले — टेक्नोलॉजी बना रही सेक्टर को कुशल

सारांश

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक ने 10 करोड़ एक्जिम कंटेनरों की ट्रैकिंग का मील का पत्थर पार किया — और पीयूष गोयल के लिए यह महज़ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के औद्योगिक विज़न की डिजिटल रीढ़ का प्रमाण है। 19 बंदरगाहों, 5,569 रेलवे स्टेशनों और 100% एक्जिम कवरेज वाला यह नेटवर्क भारत की लॉजिस्टिक्स महत्वाकांक्षा का ठोस आधार बन रहा है।

मुख्य बातें

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) ने 10 करोड़ एक्जिम कंटेनरों की ट्रैकिंग का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा — टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक्स को सरल, तेज और कुशल बनाकर 'विकसित भारत' के विज़न को साकार कर रही है।
LDB का नेटवर्क 19 बंदरगाहों , 32 कंटेनर टर्मिनलों , 103 ICD , 439 CFS और 5,569 रेलवे स्टेशनों को कवर करता है।
सितंबर 2025 में लॉन्च हुए LDB 2.0 ने हाई-सीज़ ट्रैकिंग और मल्टीमॉडल शिपमेंट जानकारी जोड़ी।
प्लेटफ़ॉर्म देश के 100% एक्जिम कंटेनर यातायात की एंड-टू-एंड जानकारी RFID तकनीक से उपलब्ध कराता है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 14 अगस्त 2026 को कहा कि टेक्नोलॉजी भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को सरल, तेज और अधिक कुशल बना रही है, जिससे घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता मज़बूत हो रही है और देश की विनिर्माण एवं निर्यात महत्वाकांक्षाओं को बल मिल रहा है। यह बयान उन्होंने लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) द्वारा 10 करोड़ एक्जिम कंटेनरों की ट्रैकिंग का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करने के अवसर पर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

गोयल ने कहा, 'लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक के ज़रिए 10 करोड़ कंटेनरों की ट्रैकिंग भारत की लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक्स को सरल, तेज और अधिक कुशल बनाने के साथ-साथ भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में हमारी मदद कर रही है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुशल लॉजिस्टिक्स विनिर्माण को मज़बूत करने, वैश्विक बाज़ारों में भारत की मौजूदगी बढ़ाने और प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' के विज़न को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।

LDB का विस्तृत नेटवर्क

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक RFID आधारित ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से पूरे भारत में एक्जिम कंटेनरों की आवाजाही की एंड-टू-एंड जानकारी उपलब्ध कराता है। फ़िलहाल यह प्लेटफ़ॉर्म देश में एक्जिम कंटेनरों की 100 प्रतिशत आवाजाही को कवर करता है, जिसमें 19 बंदरगाह और 32 कंटेनर टर्मिनल शामिल हैं।

इसके नेटवर्क में 103 इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), 439 कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS), खाली कंटेनर यार्ड, पार्किंग प्लाज़ा और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा 89 विनिर्माण विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), 5,569 रेलवे स्टेशन, 269 टोल प्लाज़ा और 3 इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

LDB 2.0 और नई क्षमताएँ

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में गोयल ने LDB 2.0 लॉन्च किया था, जिससे प्लेटफ़ॉर्म की क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। अपग्रेड किए गए संस्करण में भारत से निर्यात होने वाले कंटेनरों की हाई-सीज़ ट्रैकिंग शुरू की गई और मल्टीमॉडल शिपमेंट की जानकारी उपलब्ध कराई गई, जिससे उपयोगकर्ता कार्गो की आवाजाही को अधिक व्यापक तरीके से ट्रैक कर सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 14-16 प्रतिशत से घटाकर वैश्विक औसत के करीब लाने की कोशिश में जुटा है।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह प्लेटफ़ॉर्म लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों, निर्यातकों, आयातकों और नीति निर्माताओं को ड्वेल टाइम, ट्रांजिट टाइम तथा बंदरगाह एवं टर्मिनल के प्रदर्शन से जुड़े विश्लेषण उपलब्ध कराता है। इस डेटा की मदद से बाधाओं की पहचान और परिचालन दक्षता में सुधार संभव होता है, जो अंततः निर्यातकों की लागत कम करने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक है।

क्या होगा आगे

LDB की बढ़ती कवरेज और डेटा क्षमताओं के साथ, सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को 'विकसित भारत' के व्यापक औद्योगिक रोडमैप का अभिन्न हिस्सा बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग न केवल आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह डेटा नीतिगत सुधारों में वास्तव में तब्दील हो रहा है। भारत की लॉजिस्टिक्स लागत अभी भी GDP के 14-16% के आसपास है — जो वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से कहीं अधिक है। LDB जैसे प्लेटफ़ॉर्म बाधाओं की पहचान तो करते हैं, पर बंदरगाहों पर ड्वेल टाइम और अंतिम-मील कनेक्टिविटी की समस्याएँ संरचनात्मक हैं जिन्हें डेटा अकेले नहीं सुलझा सकता। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि ट्रैकिंग मील के पत्थर से लॉजिस्टिक्स लागत में मापनीय कमी की समयसीमा क्या है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) क्या है और यह कैसे काम करता है?
लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक एक RFID-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो पूरे भारत में एक्जिम कंटेनरों की एंड-टू-एंड आवाजाही की जानकारी उपलब्ध कराता है। यह 19 बंदरगाहों, 32 कंटेनर टर्मिनलों, 103 ICD और 5,569 रेलवे स्टेशनों को कवर करते हुए देश के 100% एक्जिम कंटेनर यातायात को ट्रैक करता है।
10 करोड़ कंटेनर ट्रैकिंग का मील का पत्थर क्यों महत्वपूर्ण है?
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत का लॉजिस्टिक्स डिजिटलीकरण बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। इससे निर्यातकों, आयातकों और नीति निर्माताओं को ड्वेल टाइम और ट्रांजिट टाइम जैसे डेटा मिलते हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करने में मददगार हैं।
LDB 2.0 में क्या नया जोड़ा गया है?
सितंबर 2025 में लॉन्च हुए LDB 2.0 में भारत से निर्यात होने वाले कंटेनरों की हाई-सीज़ ट्रैकिंग और मल्टीमॉडल शिपमेंट की जानकारी जोड़ी गई। इससे उपयोगकर्ता कार्गो की आवाजाही को समुद्र में भी ट्रैक कर सकते हैं, जो पहले संभव नहीं था।
इस प्लेटफ़ॉर्म से किसे फायदा होता है?
लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर, निर्यातक, आयातक और सरकारी नीति निर्माता — सभी इस प्लेटफ़ॉर्म के प्रमुख लाभार्थी हैं। यह उन्हें कंटेनर की स्थिति, बंदरगाह प्रदर्शन और परिचालन बाधाओं का वास्तविक समय में विश्लेषण देता है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलती है।
'विकसित भारत' में लॉजिस्टिक्स की क्या भूमिका है?
पीयूष गोयल के अनुसार, कुशल लॉजिस्टिक्स विनिर्माण को मज़बूत करने और वैश्विक बाज़ारों में भारत की मौजूदगी बढ़ाने के लिए अनिवार्य है। 'विकसित भारत' के विज़न के तहत लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को औद्योगिक विकास और निर्यात वृद्धि की रीढ़ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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