आयकर विभाग ने शुरू किया फॉर्म 141, अब चार टीडीएस फॉर्म का करेगा समावेश
सारांश
Key Takeaways
- नया फॉर्म 141 चार टीडीएस फॉर्म को समाहित करता है।
- 50,000 रुपए प्रति माह और 50 लाख रुपए की संपत्ति के लिए टीडीएस जमा किया जा सकता है।
- फॉर्म भरते समय पैन, पता, और संपर्क जानकारी आवश्यक है।
- फॉर्म भरने की संख्या अब खरीदारों की संख्या से तय होगी।
- यह फॉर्म ई-फाइलिंग पोर्टल पर भरा जा सकता है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयकर विभाग ने फॉर्म 141 का शुभारंभ किया है, जो कि एक संकुचित चालान-कम-स्टेटमेंट है, और यह चार विभिन्न टीडीएस फॉर्म को स्थानांतरित करेगा।
यह नया फॉर्म, फॉर्म 26क्यूबी, फॉर्म 26क्यूसी, फॉर्म 26क्यूडी, और फॉर्म 26क्यूई को समाहित करता है, जिनका पहले उपयोग संपत्ति की खरीद पर, किराए के लिए, ठेकेदारों या पेशेवरों को दिए गए भुगतान पर और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के हस्तांतरण पर टीडीएस दाखिल करने के लिए किया जाता था।
नए नियमों के अनुसार, फॉर्म 141 का प्रयोग अब उन भुगतानों के लिए किया जा सकता है जो 50,000 रुपए प्रति माह से अधिक हैं और 50 लाख रुपए की संपत्ति की खरीद पर टीडीएस जमा करने के लिए।
इसके अतिरिक्त, यह फॉर्म उन व्यक्तियों या हिंदू अविभाजित परिवारों द्वारा एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख रुपए से अधिक के पेशेवर, कमीशन या कॉन्ट्रेक्ट लेबर भुगतान की रिपोर्ट करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो टैक्स ऑडिट के अधीन नहीं हैं।
कुछ विशेष स्तरों के अधीन, क्रिप्टोकरेंसी या एनएफटी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) के लिए किए गए भुगतान भी अनुसूची डी में दिए गए फॉर्म के अंतर्गत आते हैं।
फॉर्म भरने वाले करदाताओं को कटौतीकर्ता और कटौती प्राप्तकर्ता के पैन विवरण, पता, मोबाइल नंबर और दोनों पक्षों की ईमेल आईडी की आवश्यकता होगी।
सेवाओं की प्रकृति और भुगतान या हस्तांतरण के तरीकों के अनुसार लेन-देन का विवरण भी आवश्यक है। फॉर्म 141 को ई-फाइलिंग पोर्टल पर पैन का उपयोग करके ई-पे टैक्स सेक्शन के अंतर्गत आवश्यक अनुसूचियों का चयन करके भरा जा सकता है। इसके बाद आवश्यक विवरण भरकर ऑनलाइन भुगतान और फॉर्म जमा किया जा सकता है, और चालान-सह-विवरण को डाउनलोड किया जा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि फॉर्म 141 में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है - अब फॉर्म भरने की संख्या विक्रेताओं की संख्या से नहीं, बल्कि खरीदारों की संख्या से तय होगी, क्योंकि अब एक ही फॉर्म में कई विक्रेताओं की जानकारी समाहित की जा सकती है।
--आईएएनए,
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