'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में एआई की निर्णायक भूमिका, भारत का एआई योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त
सारांश
Key Takeaways
- भारत का एआई क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है।
- 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य।
- यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन अनुपयुक्त माना गया।
- दवा खोज में एआई की मदद से समय की बचत।
- समिट से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती मिली।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट २०२६' के संदर्भ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने बताया कि जब देश अपनी आज़ादी का १००वाँ वर्ष मनाएगा, तब एआई भविष्य के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि सरकार ने नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक की समय सीमा तय की है और आत्मसमर्पण की लगातार घटनाएं सकारात्मक संकेत हैं।
बिनय कुमार सिंह ने समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह एक विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच था; इसे राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए था। ऐसे प्रदर्शन देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने राहुल गांधी से इसकी कड़ी निंदा करने और स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्हें पार्टी के भीतर इस प्रकार के अभद्र और अनुचित प्रदर्शनों पर ध्यान देना चाहिए था, न कि उनका समर्थन करना चाहिए था।
उन्होंने कहा, "जब भी हम विकास की चर्चा करते हैं, तो प्रौद्योगिकी इसमें एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। विशेषकर आधुनिक प्रौद्योगिकी को किसी भी परिस्थिति में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। एआई शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत आधुनिक, नवीनतम और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के साथ आगे बढ़ रहा है।"
वहीं, नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दीवान सिंह रावत ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि यह विश्व का एक बड़ा एआई समिट था, जिसमें १०० से अधिक देशों के प्रतिनिधि और तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हुए। उन्होंने बताया कि भारत के एआई योगदान को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है और यह समिट भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण और सफल पहल रही।
प्रो. रावत ने उदाहरण देते हुए बताया कि दवा खोज (ड्रग डिस्कवरी) जैसे क्षेत्र में, जहां पहले १५ से १८ वर्ष लगते थे, वहीं एआई की मदद से यह प्रक्रिया ५ से ६ वर्ष में पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि एआई का प्रभाव हर क्षेत्र में दिखेगा और इससे रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईवे निर्माण और डिजिटल लेन-देन जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने से एआई विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें सही और रचनात्मक तरीके से व्यक्त होना चाहिए। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक मजबूत और तथ्य-आधारित विपक्ष लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। उनका कहना था कि किसी भी मुद्दे पर आलोचना डेटा और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि केवल बयानों के आधार पर।