भारत के अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की क्षमता 2026 तक 4 करोड़ यात्रियों तक पहुँचने की संभावना

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भारत के अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की क्षमता 2026 तक 4 करोड़ यात्रियों तक पहुँचने की संभावना

सारांश

भारत में अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की क्षमता में वृद्धि हो रही है, जिससे 2026 तक 4 करोड़ यात्रियों को संभालने की उम्मीद है। जानिए इसके पीछे की महत्वपूर्ण बातें और योजनाएं।

Key Takeaways

  • भारत के अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की क्षमता में तेजी से वृद्धि हो रही है।
  • 2026 तक क्षमता 4 करोड़ यात्रियों तक पहुँचने की संभावना।
  • पुराने एयरपोर्ट्स पर भीड़भाड़ और कनेक्टिविटी में सुधार आवश्यक।
  • नई एयरपोर्ट्स से क्षेत्रीय यातायात का 20-25 प्रतिशत संभालने की उम्मीद।
  • बेंगलुरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट्स में विकास की गुंजाइश बनी हुई है।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की संयुक्त क्षमता 2026 के अंत तक लगभग 4 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह जानकारी मंगलवार को एक रिपोर्ट में साझा की गई।

अल्टरनेट एयरपोर्ट्स का निर्माण मुख्य हवाई अड्डों जैसे दिल्ली और मुंबई पर ट्रैफिक को कम करने के लिए किया गया है।

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये एयरपोर्ट्स पुराने हवाई अड्डों की बढ़ती यातायात मांग को प्रभावी ढंग से संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अगले चार वित्तीय वर्षों में, इन अल्टरनेट एयरपोर्ट्स के विस्तार से उनकी कुल क्षमता वित्त वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 4.5-5 करोड़ यात्रियों तक पहुँचने की उम्मीद है।

पुराने हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ और कनेक्टिविटी में सुधार इस वृद्धि को और बढ़ावा देगा।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि परिचालन में समय पर वृद्धि सुनिश्चित करना आवश्यक है।

क्रिसिल का विश्लेषण दिल्ली एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र और गोवा के आसपास के पुराने एयरपोर्ट्स पर केंद्रित है।

एनसीआर और एमएमआर जैसे क्षेत्रों में, पुराने हवाई अड्डे पहले से ही अपनी डिजाइन क्षमता के 87 प्रतिशत पर काम कर रहे हैं।

स्थान की कमी के कारण इन एयरपोर्ट्स में बड़े विस्तार की संभावनाएँ सीमित हैं।

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक अंकित हखू ने कहा कि महानगरों में स्थित अल्टरनेट एयरपोर्ट्स से वित्त वर्ष 2030 तक कुल क्षेत्रीय यातायात का 20-25 प्रतिशत संभालने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी कहा कि नए एयरपोर्ट्स के लिए प्रारंभिक अवधि में विमानन और गैर-विमानन राजस्व में वृद्धि करना महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुंबई के पुराने एयरपोर्ट की विकास दर 2017 के बाद क्षमता संबंधित बाधाओं के कारण धीमी रही है।

इसके विपरीत, दिल्ली एयरपोर्ट का विकास लगातार जारी रहा। हालांकि, क्षेत्र में अन्य एयरपोर्ट के विकास के बिना, दिल्ली को भी मध्यम अवधि में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ अन्य महानगरों के एयरपोर्टों में विकास की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है। बेंगलुरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट पिछले वित्तीय वर्ष में अपनी डिजाइन क्षमता के 65 प्रतिशत पर कार्यरत थे, जिससे विस्तार का अवसर बना हुआ है।

Point of View

NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत में अल्टरनेट एयरपोर्ट्स का क्या महत्व है?
अल्टरनेट एयरपोर्ट्स मुख्य एयरपोर्ट्स पर ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने में मदद करते हैं।
2026 में इन एयरपोर्ट्स की क्षमता कितनी होगी?
2026 के अंत तक इन एयरपोर्ट्स की क्षमता लगभग 4 करोड़ यात्रियों तक पहुँचने की उम्मीद है।
क्या इन एयरपोर्ट्स का विस्तार होगा?
हाँ, अगले चार वित्तीय वर्षों में इन एयरपोर्ट्स का विस्तार होगा, जिससे उनकी कुल क्षमता 4.5-5 करोड़ यात्रियों तक पहुँच जाएगी।
दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट्स की स्थिति क्या है?
दिल्ली और मुंबई के पुराने एयरपोर्ट्स अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 87 प्रतिशत पर पहले से ही कार्य कर रहे हैं।
बेंगलुरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट्स की स्थिति क्या है?
बेंगलुरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट्स अभी भी अपनी डिजाइन क्षमता के 65 प्रतिशत पर काम कर रहे हैं, जिससे विस्तार की संभावना बनी हुई है।
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