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भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में Q3 2026 में 33 सौदे, कुल मूल्य $1.7 अरब; EV में निवेश की रफ्तार तेज

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भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में Q3 2026 में 33 सौदे, कुल मूल्य $1.7 अरब; EV में निवेश की रफ्तार तेज

सारांश

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में Q3 2026 में $1.7 अरब के 33 सौदे — पिछली तिमाही से दोगुने से अधिक। EV, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेशकों का फोकस साफ़ दिखा। ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट बताती है कि पूंजी अब सिर्फ वाहन निर्माताओं तक नहीं, पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम में फैल रही है।

मुख्य बातें

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में Q3 2026 में $1.7 अरब मूल्य के 33 सौदे दर्ज हुए।
पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 65% और कुल मूल्य में 131% की वृद्धि।
M&A गतिविधियों में 12 सौदे हुए, जिनका मूल्य $389 मिलियन था — पिछली तिमाही के पाँच सौदों और $138 मिलियन से काफी अधिक।
घरेलू सौदों की हिस्सेदारी कुल संख्या में 75% और कुल मूल्य में 87% रही।
निवेश का मुख्य केंद्र EV निर्माता , बैटरी तकनीक , चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म रहे।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट 21 अक्टूबर 2026 को जारी हुई।

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान $1.7 अरब (लगभग ₹14,200 करोड़) मूल्य के 33 सौदे दर्ज किए गए — जो पिछली तिमाही के $71.7 करोड़ के 20 सौदों की तुलना में सौदों की संख्या में 65% और कुल मूल्य में 131% की उछाल दर्शाता है। ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे विलय एवं अधिग्रहण (M&A), निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल (PE/VC) निवेश और सार्वजनिक बाज़ार से पुनर्वित्तपोषण की गतिविधियों में एक साथ तेज़ी आना प्रमुख कारण रहा।

मुख्य आँकड़े और सौदों का विवरण

M&A और PE/VC श्रेणियों को मिलाकर 28 सौदे हुए, जिनका संयुक्त मूल्य $808 मिलियन रहा। इनमें से M&A गतिविधियों के अंतर्गत अकेले 12 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य $389 मिलियन था — जबकि पिछली तिमाही में यह केवल पाँच सौदों और $138 मिलियन तक सीमित था। यह तुलना दर्शाती है कि बड़े रणनीतिक अधिग्रहणों की गति न केवल बनी रही, बल्कि काफी तेज़ हुई।

घरेलू सौदे इस तिमाही के सबसे बड़े चालक बने रहे — कुल सौदों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 75% और कुल सौदा मूल्य में 87% रही। यह आँकड़ा संकेत देता है कि भारतीय कंपनियाँ ही घरेलू मोबिलिटी इकोसिस्टम में सबसे आक्रामक तरीके से पूंजी लगा रही हैं।

EV और मोबिलिटी: निवेश का केंद्र

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बदलाव इस तिमाही के निवेश का सबसे प्रमुख विषय रहा। निवेशकों ने EV निर्माताओं, बैटरी तकनीक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में सक्रिय रूप से पूंजी लगाई। रणनीतिक निवेश मुख्यतः उन कंपनियों तक केंद्रित रहा, जो EV निर्माण, ऑटो कंपोनेंट और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिति मज़बूत कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों ने उन कंपनियों को प्राथमिकता दी जिनके पास स्केलेबल बिज़नेस मॉडल, विशिष्ट तकनीक और भारत के बदलते मोबिलिटी इकोसिस्टम में सुदृढ़ उपस्थिति है। यह रुझान पिछले कुछ वर्षों की उस प्रवृत्ति के अनुरूप है, जिसमें पूंजी केवल वाहन निर्माताओं से हटकर पूरे मूल्य-श्रृंखला में फैल रही है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑटोमोटिव एवं EV इंडस्ट्री के लीडर और पार्टनर साकेत मेहरा ने कहा, 'ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है, जो मोबिलिटी के क्षेत्र में हो रहे बदलावों से प्रेरित है। अब पूंजी केवल वाहन निर्माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बैटरी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म सहित पूरे इकोसिस्टम में तेज़ी से निवेश किया जा रहा है।'

मेहरा ने यह भी कहा कि यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक भारत में मोबिलिटी क्षेत्र की वृद्धि के अगले चरण को समर्थन देने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमताओं को विकसित करने वाली कंपनियों पर दाँव लगा रहे हैं।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर फंडिंग माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और निवेशक चुनिंदा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत का ऑटोमोबाइल बाज़ार पिछले तीन वर्षों में तेज़ी से इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ा है, और नीतिगत प्रोत्साहनों ने EV को निवेश के लिए आकर्षक श्रेणी बना दिया है। Q3 2026 के आँकड़े इस दिशा में निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे की पुष्टि करते हैं।

आगे की तिमाही में यदि घरेलू EV बिक्री और सरकारी नीति-समर्थन की गति बनी रही, तो सौदों की यह रफ्तार और तेज़ होने की संभावना है — विशेष रूप से बैटरी सप्लाई-चेन और फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क में।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पूंजी वास्तविक EV अपनाने की रफ्तार के अनुरूप है या निवेशकों की उम्मीद आगे भाग रही है। भारत में EV की खुदरा बिक्री अभी भी कुल ऑटोमोबाइल बिक्री का एक छोटा हिस्सा है, जबकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी सप्लाई-चेन में निवेश का बड़ा हिस्सा जा रहा है। यह तब तक टिकाऊ है जब तक नीतिगत प्रोत्साहन और उपभोक्ता माँग एक साथ बढ़ते रहें। घरेलू सौदों की 87% मूल्य-हिस्सेदारी बताती है कि भारतीय कंपनियाँ खुद ही इस बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं — लेकिन विदेशी पूंजी की अनुपस्थिति एक संकेत हो सकती है कि वैश्विक निवेशक अभी भी भारत के EV बाज़ार की परिपक्वता को लेकर सतर्क हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में Q3 2026 में कितने सौदे हुए?
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, Q3 2026 में भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में $1.7 अरब मूल्य के कुल 33 सौदे दर्ज हुए। यह पिछली तिमाही के 20 सौदों और $71.7 करोड़ की तुलना में सौदों की संख्या में 65% और मूल्य में 131% की वृद्धि है।
इस तिमाही में निवेश का मुख्य क्षेत्र कौन-सा रहा?
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और संबंधित इकोसिस्टम — जिसमें बैटरी तकनीक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी शामिल हैं — इस तिमाही के निवेश का प्रमुख केंद्र रहे। रणनीतिक निवेशकों ने उन कंपनियों को प्राथमिकता दी जिनके पास स्केलेबल मॉडल और विशिष्ट तकनीक है।
Q3 2026 में M&A गतिविधियाँ कैसी रहीं?
इस तिमाही में M&A के तहत 12 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य $389 मिलियन था। पिछली तिमाही में M&A के केवल पाँच सौदे हुए थे, जिनका मूल्य $138 मिलियन था — यानी संख्या में 140% और मूल्य में 182% से अधिक की वृद्धि।
घरेलू और विदेशी सौदों का अनुपात क्या रहा?
घरेलू सौदे कुल सौदों की संख्या में 75% और कुल सौदा मूल्य में 87% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख चालक रहे। यह आँकड़ा बताता है कि भारतीय कंपनियाँ और घरेलू निवेशक ही ऑटोमोटिव इकोसिस्टम में सबसे सक्रिय भागीदार हैं।
ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट क्या कहती है भारत के मोबिलिटी सेक्टर के भविष्य के बारे में?
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर साकेत मेहरा के अनुसार, ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पूंजी अब केवल वाहन निर्माताओं तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम में फैल रही है, और निवेशकों का भरोसा दीर्घकालिक इलेक्ट्रिफिकेशन के अवसरों पर टिका है।
राष्ट्र प्रेस
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