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भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य Q3 2026 में 129% उछला, $7.3 अरब के 67 सौदे दर्ज

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भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य Q3 2026 में 129% उछला, $7.3 अरब के 67 सौदे दर्ज

सारांश

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में Q3 2026 में सौदों का मूल्य एक तिमाही में 129% उछलकर $7.3 अरब पहुँच गया। बड़े M&A सौदों और IPO ने इस उछाल को हवा दी, जबकि विदेशी निवेशकों ने M&A मूल्य का 90% हिस्सा अकेले संभाला। फिनटेक और NBFC सबसे सक्रिय श्रेणियाँ रहीं।

मुख्य बातें

भारतीय वित्तीय सेवा क्षेत्र में Q3 2026 में $7.3 अरब मूल्य के 67 सौदे दर्ज किए गए।
सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा — ग्रांट थॉर्नटन भारत रिपोर्ट के अनुसार।
M&A और PE/VC गतिविधियों (IPO/QIP छोड़कर) के तहत $3 अरब के 58 सौदे हुए।
विदेश से भारत में आए तीन सौदों ने M&A के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत का योगदान दिया।
फिनटेक , बैंकिंग और NBFC का संयुक्त योगदान कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत रहा।
भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में सौदे Q2 के सात से घटकर Q3 में केवल दो रह गए।

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र ने 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया — इस दौरान कुल $7.3 अरब मूल्य के 67 सौदे दर्ज किए गए। ग्रांट थॉर्नटन भारत की 12 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, तिमाही-दर-तिमाही आधार पर सौदों के कुल मूल्य में 129 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई।

मूल्य वृद्धि के पीछे की वजहें

सौदों के मूल्य में इस असाधारण उछाल के पीछे दो प्रमुख कारक रहे — बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (M&A) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की बढ़ती गतिविधियाँ। इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) भी शामिल थे, जिन्होंने समग्र आँकड़े को ऊपर धकेला।

IPO और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को छोड़कर M&A और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (PE/VC) गतिविधियों के तहत $3 अरब मूल्य के 58 सौदे संपन्न हुए। यह आँकड़ा इस तथ्य को रेखांकित करता है कि बड़े संस्थागत निवेशक भारतीय वित्तीय इकोसिस्टम में सक्रिय भागीदारी बनाए हुए हैं।

M&A गतिविधियों का विश्लेषण

तीसरी तिमाही में M&A सौदों का कुल मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा और कुल $2.3 अरब के 23 सौदे दर्ज किए गए। हालाँकि सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे ने कुल मूल्य को महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।

घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, परंतु मूल्य के लिहाज से उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था। इसके विपरीत, विदेश से भारत में आए तीन सौदों ने M&A के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत का योगदान दिया — जो विदेशी निवेशकों के भारतीय वित्तीय बाजार में बढ़ते भरोसे का स्पष्ट संकेत है।

दूसरी ओर, भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सौदों की गतिविधियाँ सुस्त रहीं। दूसरी तिमाही में जहाँ ऐसे सात सौदे हुए थे, वहीं तीसरी तिमाही में यह संख्या घटकर दो रह गई।

फिनटेक और NBFC की केंद्रीय भूमिका

फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने मिलकर कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत का योगदान दिया। यह प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के स्थायी विश्वास को दर्शाता है। PE/VC निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट अवश्य आई, लेकिन सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियाँ मजबूत बनी रहीं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ग्रांट थॉर्नटन भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और NBFC इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, 'जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा।'

अय्यर ने यह भी कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी जितना कारोबार विस्तार का अवसर। उन्होंने आगाह किया कि 'भारत के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी काफी संभावनाएँ हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।'

आगे की संभावनाएँ

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ब्याज दरों का दबाव और घरेलू नियामकीय बदलाव वित्तीय क्षेत्र पर एकसाथ असर डाल रहे हैं। गौरतलब है कि विदेशी निवेशकों का M&A में वर्चस्व और घरेलू IPO बाजार की मजबूती मिलकर एक ऐसा परिदृश्य बना रहे हैं जहाँ गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल ही पूंजी आकर्षित कर सकेंगे। चौथी तिमाही में इन रुझानों की निरंतरता पूरे वर्ष 2026 के लिए क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका अधिकांश श्रेय मात्र कुछ बड़े सौदों को जाता है — जिनमें विदेशी निवेशकों का M&A मूल्य में 90% हिस्सा बताता है कि घरेलू पूंजी अभी भी सतर्क है। PE/VC में मात्रा और मूल्य दोनों की गिरावट यह संकेत देती है कि स्टार्टअप फंडिंग का उत्साह अभी भी दबाव में है। असली परीक्षण यह है कि क्या यह विदेशी M&A रुचि टिकाऊ है, या बस एक-दो बड़े सौदों का सांख्यिकीय प्रभाव — जो अगली तिमाही में चित्र को उलट सकता है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में Q3 2026 में कुल कितने सौदे हुए?
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, Q3 2026 (जुलाई-सितंबर) में $7.3 अरब मूल्य के कुल 67 सौदे दर्ज किए गए। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर सौदों के मूल्य में 129 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सौदों के मूल्य में इतनी तेज वृद्धि क्यों हुई?
बड़े मूल्य वाले M&A सौदों और दो बड़े IPO सहित सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों ने मूल्य में इस उछाल में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से विदेश से भारत में आए तीन सौदों ने M&A के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान दिया।
किन क्षेत्रों ने सबसे अधिक सौदे आकर्षित किए?
फिनटेक, बैंकिंग और NBFC ने मिलकर कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत का योगदान दिया। यह प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने भरोसे को दर्शाता है।
PE/VC निवेश की स्थिति Q3 2026 में कैसी रही?
Q3 2026 में PE/VC निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, M&A गतिविधियाँ और सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियाँ मजबूत रहीं।
भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सौदों का क्या हाल रहा?
भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सौदों की गतिविधियाँ सुस्त रहीं। Q2 2026 में जहाँ ऐसे सात सौदे हुए थे, वहीं Q3 2026 में यह संख्या घटकर केवल दो रह गई।
राष्ट्र प्रेस
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