29 सितंबर 2026
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हवाई यात्रा की मांग क्षमता से आगे, नागर विमानन मंत्री नायडू ने कनेक्टिविटी को बताई अगली प्राथमिकता

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हवाई यात्रा की मांग क्षमता से आगे, नागर विमानन मंत्री नायडू ने कनेक्टिविटी को बताई अगली प्राथमिकता

सारांश

भारत का विमानन बाजार एयरलाइनों की क्षमता से तेज दौड़ रहा है — RPK 7.3% CAGR बनाम ASK 7% CAGR। नायडू ने 2047 तक 400 एयरपोर्ट और मार्च 2027 में 'रूट्स एशिया' की मेजबानी का ऐलान किया। अगली बड़ी लड़ाई क्षमता नहीं, कनेक्टिविटी है।

मुख्य बातें

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने 29 सितंबर को बताया कि भारत में RPK वृद्धि 7.3% CAGR है, जबकि ASK वृद्धि केवल 7% CAGR — मांग क्षमता से आगे।
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार ; लक्ष्य समग्र रूप से तीसरा सबसे बड़ा बनना।
2014 में 74 एयरपोर्ट थे, अब 166 से अधिक ; 2047 तक 400 एयरपोर्ट का लक्ष्य।
फिलहाल 66 एयरपोर्ट निर्माणाधीन; अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट की योजना।
वैश्विक रूट डेवलपमेंट कार्यक्रम 'रूट्स एशिया 2027' भारत में 16-18 मार्च 2027 को आयोजित होगा।
कनेक्टिविटी विस्तार को सरकार ने एयरपोर्ट निर्माण के बाद अगली सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार, 29 सितंबर को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत का विमानन बाजार एयरलाइंस द्वारा जोड़ी जा रही क्षमता की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से विस्तार पा रहा है। उन्होंने कहा कि यह रुझान देश में हवाई यात्रा की असाधारण वृद्धि को रेखांकित करता है और आने वाले वर्षों में क्षमता निर्माण तथा बेहतर कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाता है।

मांग और क्षमता का अंतर

नायडू ने आँकड़ों के हवाले से बताया कि पिछले एक दशक में भारत में रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर (RPK) की वृद्धि दर 7.3% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) रही है। इसके मुकाबले एयरलाइंस द्वारा उपलब्ध कराई गई सीट क्षमता — एवेलेबल सीट किलोमीटर (ASK) — केवल 7% CAGR की दर से बढ़ी है।

मंत्री ने कहा, 'इसका मतलब है कि बाजार सीटों की उपलब्धता से अधिक तेजी से बढ़ रहा है।' यह अंतर बताता है कि यदि क्षमता विस्तार की गति नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में यात्रियों की मांग अपूर्ण रह सकती है।

भारत का विमानन क्षेत्र: वैश्विक परिप्रेक्ष्य

भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, क्षेत्रीय संपर्क में सुधार और मध्यम वर्ग के विस्तार ने इस वृद्धि को गति दी है। सरकार का अगला महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा समग्र विमानन बाजार बनाना है — यानी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मिलाकर।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक विमानन उद्योग कोविड के बाद की रिकवरी के अंतिम चरण में है और भारत उन चुनिंदा बाजारों में है जहाँ माँग लगातार पूर्व-महामारी स्तर से ऊपर बनी हुई है।

एयरपोर्ट नेटवर्क का विस्तार

नायडू ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 74 परिचालन एयरपोर्ट थे, जो अब बढ़कर 166 से अधिक हो चुके हैं। सरकार ने वर्ष 2047 तक 400 एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

फिलहाल 66 एयरपोर्ट विकासाधीन हैं और अगले दस वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है। मंत्री के अनुसार इस विस्तार का उद्देश्य देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।

'रूट्स एशिया 2027': भारत में वैश्विक आयोजन

नायडू ने घोषणा की कि विमानन उद्योग का प्रमुख वैश्विक रूट डेवलपमेंट कार्यक्रम 'रूट्स एशिया 2027' भारत में 16 से 18 मार्च 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को नई ऊर्जा देगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले दो वर्षों में भारत ने ICAO एशिया-प्रशांत मंत्रिस्तरीय सम्मेलन, BRICS शिखर सम्मेलन और IATA की 81वीं वार्षिक आम बैठक की मेजबानी की है। 'रूट्स एशिया 2027' इस कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

आगे की राह: कनेक्टिविटी सबसे बड़ी चुनौती

मंत्री ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार के बाद सरकार का अगला सबसे बड़ा लक्ष्य कनेक्टिविटी को गहरा करना है — ताकि अधिक से अधिक शहर और क्षेत्र हवाई नेटवर्क से जुड़ सकें। यह बदलाव न केवल यात्रियों के लिए, बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दशकों में संचित होकर यह एक बड़े संरचनात्मक असंतुलन का संकेत है — जहाँ यात्री बाजार से आगे हैं, लेकिन बुनियादी ढाँचा पीछे। 2047 तक 400 एयरपोर्ट का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु असली परीक्षा यह है कि नए एयरपोर्ट केवल टर्मिनल बनकर न रह जाएँ — उन पर पर्याप्त उड़ानें और किफायती किराए भी सुनिश्चित हों। 'रूट्स एशिया 2027' की मेजबानी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की असली कसौटी तब होगी जब टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्री बिना दिल्ली या मुंबई के रास्ते सीधे अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में हवाई यात्रा की मांग एयरलाइन क्षमता से क्यों आगे है?
आँकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत का RPK 7.3% CAGR से बढ़ा है, जबकि ASK केवल 7% CAGR की दर से। इसका अर्थ है कि यात्रियों की माँग एयरलाइनों द्वारा जोड़ी जा रही सीट क्षमता से तेज है, जो बढ़ती आय और क्षेत्रीय संपर्क सुधार का परिणाम है।
भारत सरकार का 2047 तक एयरपोर्ट विस्तार का क्या लक्ष्य है?
सरकार ने 2047 तक देश में 400 एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल 66 एयरपोर्ट निर्माणाधीन हैं और अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना है।
'रूट्स एशिया 2027' क्या है और यह भारत में कब होगा?
'रूट्स एशिया' विमानन उद्योग का एक प्रमुख वैश्विक रूट डेवलपमेंट और नेटवर्किंग कार्यक्रम है। इसका 2027 संस्करण भारत में 16 से 18 मार्च 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा, जो देश की बढ़ती वैश्विक विमानन भूमिका को रेखांकित करता है।
भारत वर्तमान में वैश्विक विमानन बाजार में किस स्थान पर है?
भारत अभी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को मिलाकर समग्र रूप से भी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनाना है।
नागर विमानन मंत्री के अनुसार एयरपोर्ट विस्तार के बाद अगली प्राथमिकता क्या है?
मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट नेटवर्क विस्तार के बाद सरकार की अगली सबसे बड़ी प्राथमिकता कनेक्टिविटी को गहरा करना है। इसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक शहरों और क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
राष्ट्र प्रेस
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