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उड़ान योजना के विस्तार के लिए ₹28,840 करोड़ का निवेश, नायडू बोले — भारत में ही तैयार होगा एविएशन कार्यबल

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उड़ान योजना के विस्तार के लिए ₹28,840 करोड़ का निवेश, नायडू बोले — भारत में ही तैयार होगा एविएशन कार्यबल

सारांश

केंद्र सरकार उड़ान योजना के अगले चरण पर ₹28,840 करोड़ दाँव लगा रही है — पिछले दशक के कुल निवेश से तीन गुना। मैसूर बैठक में नायडू का संदेश साफ था: भारत अपना एविएशन कार्यबल खुद तैयार करेगा, बाहर से नहीं मँगाएगा।

मुख्य बातें

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 21 अगस्त 2026 को मैसूर में उड़ान योजना के अगले चरण के लिए ₹28,840 करोड़ के आवंटन की घोषणा की।
पिछले 10 वर्षों में हवाई अड्डा विकास और वीजीएफ पर ₹10,000 करोड़ खर्च हुए; नया निवेश उससे लगभग तीन गुना है।
फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की संख्या 2020 के 32 से बढ़कर 2026 में 41 हुई; फ्लाइंग बेस 32 से 63 हुए।
सरकार का लक्ष्य एविएशन कार्यबल को भारत में ही प्रशिक्षित करना — विदेशी भर्ती पर निर्भरता घटाना।
ड्रोन, ईवीटीओएल, एमआरओ और एयर कार्गो क्षेत्रों में भी सुधारों को गति देने की योजना।

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 21 अगस्त 2026 को मैसूर, कर्नाटक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में घोषणा की कि केंद्र सरकार उड़ान योजना के अगले चरण के लिए ₹28,840 करोड़ का आवंटन करने जा रही है। यह राशि पिछले 10 वर्षों में हवाई अड्डों के विकास और वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) पर खर्च किए गए ₹10,000 करोड़ से लगभग तीन गुना अधिक है।

बैठक में क्या हुआ

मैसूर में आयोजित इस समिति बैठक में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) इकोसिस्टम में सुधार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आईजीआरयूए) में संस्थागत बदलावों पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री नायडू ने स्पष्ट किया कि उड़ान योजना का दायरा अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा।

मंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उड़ान विजन से प्रेरित होकर, एविएशन क्षेत्र क्षेत्रीय विकास और समावेशी आर्थिक विकास का एक अहम जरिया बन रहा है, जिससे किसानों, निर्यातकों, व्यवसायों और समुदायों को लाभ मिल रहा है।'

एफटीओ इकोसिस्टम में विस्तार

समिति को बताया गया कि फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की संख्या 2020 के 32 से बढ़कर 2026 में 41 हो गई है। इसी अवधि में फ्लाइंग बेस की संख्या 32 से 63 हो गई है — यानी दोगुनी। एफटीओ रैंकिंग फ्रेमवर्क की शुरुआत से जवाबदेही में पारदर्शिता आई है, जिससे पायलट करियर की शुरुआत में युवाओं को सूचित निर्णय लेने में सहूलियत मिल रही है।

गौरतलब है कि भारतीय एयरलाइंस ने हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व पैमाने पर विमानों के ऑर्डर दिए हैं। इन विमानों को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित पायलटों और तकनीकी कार्यबल की बड़ी माँग उभरने वाली है।

'मेड इन इंडिया' वर्कफोर्स पर जोर

मंत्री नायडू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम भारत के एविएशन सेक्टर के विकास को आगे बढ़ाने के लिए बाहर से वर्कफोर्स नहीं मंगाना चाहते। हम उस वर्कफोर्स को यहीं भारत में प्रशिक्षित करना चाहते हैं।' यह बयान उस नीतिगत दिशा को रेखांकित करता है जिसमें घरेलू पायलट और तकनीशियन प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ड्रोन और ईवीटीओएल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) जैसी अगली पीढ़ी की एविएशन तकनीकों में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, साथ ही एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) तथा एयर कार्गो क्षेत्रों में सुधारों को गति दी जा रही है।

आगे क्या होगा

उड़ान के अगले चरण के तहत ₹28,840 करोड़ के आवंटन से क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास और नई उड़ान सेवाओं को वायबिलिटी गैप फंडिंग मिलने की उम्मीद है। एफटीओ इकोसिस्टम में जारी सुधार और आईजीआरयूए में संस्थागत बदलाव मिलकर देश में पायलटों की उपलब्धता बढ़ाने की नींव रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश का असर टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई संपर्क पर सबसे अधिक दिखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

840 करोड़ का यह आवंटन प्रभावशाली दिखता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इस राशि का कितना हिस्सा वास्तव में टियर-2 और टियर-3 शहरों में नई उड़ानों में तब्दील होता है — उड़ान के पिछले चरणों में कई मार्गों पर सेवाएँ शुरू होकर बंद भी हो गईं। एफटीओ की संख्या बढ़ने के बावजूद पायलट प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोज़गार परिणामों पर स्वतंत्र डेटा अभी भी दुर्लभ है। 'भारत में ही वर्कफोर्स तैयार करने' का संकल्प सही दिशा में है, पर इसके लिए आईजीआरयूए जैसी संस्थाओं में ढाँचागत सुधार और नियामकीय क्षमता दोनों की एक साथ जरूरत होगी।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उड़ान योजना के अगले चरण के लिए कितना बजट रखा गया है?
केंद्र सरकार ने उड़ान योजना के अगले चरण के लिए ₹28,840 करोड़ का आवंटन किया है। यह पिछले 10 वर्षों में हवाई अड्डा विकास और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर खर्च किए गए ₹10,000 करोड़ से लगभग तीन गुना अधिक है।
उड़ान योजना क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों को किफायती हवाई सेवाओं से जोड़ना है। इससे किसानों, निर्यातकों, व्यवसायों और दूरदराज के समुदायों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत में फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की स्थिति क्या है?
2020 में भारत में 32 एफटीओ थे, जो 2026 तक बढ़कर 41 हो गए हैं। इसी दौरान फ्लाइंग बेस की संख्या 32 से दोगुनी होकर 63 हो गई है। एफटीओ रैंकिंग फ्रेमवर्क लागू होने से पारदर्शिता भी बढ़ी है।
मंत्री नायडू ने पायलट प्रशिक्षण पर क्या कहा?
नायडू ने स्पष्ट किया कि सरकार एविएशन सेक्टर के विकास के लिए विदेशी कार्यबल पर निर्भर नहीं रहना चाहती। उनका लक्ष्य है कि पायलट और तकनीकी कर्मचारी भारत में ही प्रशिक्षित हों, ताकि घरेलू माँग को देश के भीतर से पूरा किया जा सके।
एविएशन में ड्रोन और ईवीटीओएल की क्या भूमिका होगी?
नायडू के अनुसार भारत ड्रोन और ईवीटीओएल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) तकनीकों में एविएशन इनोवेशन की अगली लहर का नेतृत्व कर रहा है। इसके साथ ही एमआरओ और एयर कार्गो क्षेत्रों में भी सुधारों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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