22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उड़ान योजना के अगले चरण में 21 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों ने किए MoU, 100 नए हवाई अड्डे और 4 करोड़ यात्रियों का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उड़ान योजना के अगले चरण में 21 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों ने किए MoU, 100 नए हवाई अड्डे और 4 करोड़ यात्रियों का लक्ष्य

सारांश

उड़ान योजना अब सिर्फ किफायती उड़ान की बात नहीं — यह भारत के हवाई नक्शे को फिर से खींचने का 10 साल का दांव है। 21 राज्यों के MoU, 100 नए हवाई अड्डे, 200 हेलीपैड और 4 करोड़ नए यात्रियों का लक्ष्य — यह घोषणा क्षेत्रीय विमानन को आम नागरिक की पहुँच में लाने की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता है।

मुख्य बातें

21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 22 सितंबर 2026 को उड़ान योजना के अगले चरण के तहत नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए।
योजना को 10 वर्षों के लिए बढ़ाया गया; 100 नए हवाई अड्डे और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने का लक्ष्य।
अगले चरण में 4 करोड़ यात्रियों को हवाई यात्रा से जोड़ा जाएगा; पिछले दशक में 1.54 करोड़ यात्री लाभान्वित हुए।
हवाई अड्डा निर्माण अवधि 2-3 वर्ष से घटाकर 18 महीने करने का लक्ष्य; 'चैलेंज मोड' और नई बोली प्रक्रिया शुरू।
VGF सहायता 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष की गई; विमानन क्षेत्र में 2040 तक 2 करोड़ रोज़गार का अनुमान।
स्पाइसजेट को ECLGS के तहत पहले ₹150 करोड़ की सहायता दी गई; DGCA निगरानी जारी।

नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एमओयू हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण के तहत 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस विस्तार के साथ योजना को अगले 10 वर्षों के लिए आगे बढ़ाया गया है और 4 करोड़ नए यात्रियों को किफायती हवाई यात्रा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

योजना का विस्तार और नए लक्ष्य

नायडू ने बताया कि उड़ान के अगले चरण में देशभर में 100 नए हवाई अड्डों और 200 आधुनिक हेलीपैड के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले एक दशक में संशोधित उड़ान योजना के तहत पहले ही 80 से अधिक हवाई अड्डों का विकास हो चुका है और लगभग 1.54 करोड़ यात्री किफायती हवाई यात्रा का लाभ उठा चुके हैं।

गौरतलब है कि उड़ान योजना 2016 में शुरू हुई थी और इसका मूल उद्देश्य देश के छोटे शहरों एवं दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ना था। यह अगला चरण उसी नींव को और व्यापक आधार देने की कोशिश है।

'चैलेंज मोड' और नई बोली प्रक्रिया

समारोह के दौरान उड़ान के अगले चरण के अंतर्गत 'चैलेंज मोड' की भी शुरुआत की गई और नई बोली प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़ जारी किए गए। इस व्यवस्था के तहत हवाई अड्डा परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेज़ गति से पूरा किया जाएगा। निर्माण अवधि को पहले के दो से तीन वर्ष से घटाकर 18 महीने तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) समर्थन को भी बढ़ाया गया है — पहले जहाँ यह सहायता 3 वर्षों तक मिलती थी, अब इसे बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। यह कदम छोटी एयरलाइंस के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

रोज़गार और विमानन क्षेत्र की संभावनाएँ

नायडू ने बताया कि भारत का विमानन क्षेत्र वर्तमान में 70 लाख से अधिक रोज़गारों का समर्थन कर रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 2040 तक यह संख्या बढ़कर 2 करोड़ से अधिक हो सकती है। मंत्री ने राज्यों से अपील की कि वे निवेशकों और अन्य भागीदारों को साथ लाकर नई एयरलाइंस शुरू करने के प्रयासों को बढ़ावा दें।

उन्होंने कहा, 'छोटी एयरलाइंस तेज़ी से बढ़ना चाहती हैं, उन्हें केवल एक प्रोत्साहन की ज़रूरत है।' मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकारें छोटे कारोबारी मॉडल विकसित करके क्षेत्रीय एयरलाइंस के विस्तार में सहयोग कर सकती हैं, जिससे दूरदराज़ के इलाकों तक हवाई सेवाएँ पहुँच सकें।

स्पाइसजेट पर निगरानी और सरकारी सहायता

स्पाइसजेट के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर नायडू ने कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है, ताकि सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी न आए।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट सहित विमानन क्षेत्र की चुनौतियों के दौरान केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के माध्यम से सहायता प्रदान की थी, जिसके तहत स्पाइसजेट को ₹150 करोड़ की वित्तीय मदद उपलब्ध कराई गई थी।

आगे की राह

21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ MoU पर हस्ताक्षर उड़ान योजना के नए चरण को ज़मीनी समर्थन देने की पहली कड़ी है। अब देखना होगा कि निर्माण की गति, VGF का वितरण और 'चैलेंज मोड' की बोली प्रक्रिया कितनी तेज़ी से क्रियान्वित होती है — क्योंकि हवाई अड्डों के निर्माण में विलंब पिछले चरणों में भी एक बड़ी चुनौती रही है। यदि 18 महीने की समय-सीमा का पालन हुआ, तो यह भारत के क्षेत्रीय विमानन इतिहास में एक उल्लेखनीय बदलाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — पिछले दशक में 80 हवाई अड्डों के विकास का लक्ष्य भी समय-सीमा से अक्सर पीछे रहा। '18 महीने में निर्माण' का वादा तब तक कागज़ी लगेगा जब तक भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और राज्य-स्तरीय समन्वय की बाधाओं का ठोस हल नहीं निकाला जाता। VGF अवधि को 3 से 5 वर्ष करना सही दिशा में उठाया गया कदम है, पर छोटी एयरलाइंस की वित्तीय नाज़ुकता — जैसा स्पाइसजेट के मामले से स्पष्ट है — यह बताती है कि प्रोत्साहन के साथ-साथ जवाबदेही का ढाँचा भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उड़ान योजना का अगला चरण क्या है?
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण में सरकार ने 10 वर्षों के लिए योजना को विस्तार दिया है, जिसमें 100 नए हवाई अड्डे, 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने और 4 करोड़ नए यात्रियों को किफायती हवाई यात्रा से जोड़ने का लक्ष्य है। 22 सितंबर 2026 को 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए।
उड़ान योजना में 'चैलेंज मोड' क्या है?
'चैलेंज मोड' एक नई बोली व्यवस्था है जिसके तहत हवाई अड्डा परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेज़ी से पूरा किया जाएगा। इस व्यवस्था का लक्ष्य निर्माण अवधि को पहले के 2-3 वर्ष से घटाकर 18 महीने तक लाना है।
VGF (वायबिलिटी गैप फंडिंग) में क्या बदलाव हुआ है?
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए VGF सहायता की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। यह बदलाव छोटी और क्षेत्रीय एयरलाइंस को लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता देने के लिए किया गया है।
उड़ान योजना अब तक कितनी सफल रही है?
पिछले एक दशक में संशोधित उड़ान योजना के तहत 80 से अधिक हवाई अड्डों का विकास हुआ है और लगभग 1.54 करोड़ यात्री किफायती हवाई यात्रा का लाभ उठा चुके हैं। नागर विमानन मंत्री के अनुसार यह देश की सबसे परिवर्तनकारी योजनाओं में से एक रही है।
स्पाइसजेट की स्थिति पर सरकार का क्या रुख है?
नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने बताया कि DGCA स्पाइसजेट की परिचालन और वित्तीय स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है। सरकार पहले ECLGS के तहत स्पाइसजेट को ₹150 करोड़ की वित्तीय सहायता दे चुकी है और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले