उड़ान योजना के अगले चरण में 21 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों ने किए MoU, 100 नए हवाई अड्डे और 4 करोड़ यात्रियों का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एमओयू हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण के तहत 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस विस्तार के साथ योजना को अगले 10 वर्षों के लिए आगे बढ़ाया गया है और 4 करोड़ नए यात्रियों को किफायती हवाई यात्रा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना का विस्तार और नए लक्ष्य
नायडू ने बताया कि उड़ान के अगले चरण में देशभर में 100 नए हवाई अड्डों और 200 आधुनिक हेलीपैड के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले एक दशक में संशोधित उड़ान योजना के तहत पहले ही 80 से अधिक हवाई अड्डों का विकास हो चुका है और लगभग 1.54 करोड़ यात्री किफायती हवाई यात्रा का लाभ उठा चुके हैं।
गौरतलब है कि उड़ान योजना 2016 में शुरू हुई थी और इसका मूल उद्देश्य देश के छोटे शहरों एवं दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ना था। यह अगला चरण उसी नींव को और व्यापक आधार देने की कोशिश है।
'चैलेंज मोड' और नई बोली प्रक्रिया
समारोह के दौरान उड़ान के अगले चरण के अंतर्गत 'चैलेंज मोड' की भी शुरुआत की गई और नई बोली प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़ जारी किए गए। इस व्यवस्था के तहत हवाई अड्डा परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेज़ गति से पूरा किया जाएगा। निर्माण अवधि को पहले के दो से तीन वर्ष से घटाकर 18 महीने तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) समर्थन को भी बढ़ाया गया है — पहले जहाँ यह सहायता 3 वर्षों तक मिलती थी, अब इसे बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। यह कदम छोटी एयरलाइंस के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
रोज़गार और विमानन क्षेत्र की संभावनाएँ
नायडू ने बताया कि भारत का विमानन क्षेत्र वर्तमान में 70 लाख से अधिक रोज़गारों का समर्थन कर रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 2040 तक यह संख्या बढ़कर 2 करोड़ से अधिक हो सकती है। मंत्री ने राज्यों से अपील की कि वे निवेशकों और अन्य भागीदारों को साथ लाकर नई एयरलाइंस शुरू करने के प्रयासों को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा, 'छोटी एयरलाइंस तेज़ी से बढ़ना चाहती हैं, उन्हें केवल एक प्रोत्साहन की ज़रूरत है।' मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकारें छोटे कारोबारी मॉडल विकसित करके क्षेत्रीय एयरलाइंस के विस्तार में सहयोग कर सकती हैं, जिससे दूरदराज़ के इलाकों तक हवाई सेवाएँ पहुँच सकें।
स्पाइसजेट पर निगरानी और सरकारी सहायता
स्पाइसजेट के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर नायडू ने कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है, ताकि सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी न आए।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट सहित विमानन क्षेत्र की चुनौतियों के दौरान केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के माध्यम से सहायता प्रदान की थी, जिसके तहत स्पाइसजेट को ₹150 करोड़ की वित्तीय मदद उपलब्ध कराई गई थी।
आगे की राह
21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ MoU पर हस्ताक्षर उड़ान योजना के नए चरण को ज़मीनी समर्थन देने की पहली कड़ी है। अब देखना होगा कि निर्माण की गति, VGF का वितरण और 'चैलेंज मोड' की बोली प्रक्रिया कितनी तेज़ी से क्रियान्वित होती है — क्योंकि हवाई अड्डों के निर्माण में विलंब पिछले चरणों में भी एक बड़ी चुनौती रही है। यदि 18 महीने की समय-सीमा का पालन हुआ, तो यह भारत के क्षेत्रीय विमानन इतिहास में एक उल्लेखनीय बदलाव होगा।