उड़ान योजना के 10 साल: 1.49 करोड़ यात्री, अगले चरण में 4 करोड़ का लक्ष्य और 120 नए गंतव्य
सारांश
मुख्य बातें
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के 10 वर्ष पूरे होने पर नागर विमानन मंत्रालय ने 20 अक्टूबर 2026 को एक फैक्टशीट जारी कर बताया कि इस क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के तहत अब तक 1.49 करोड़ से अधिक यात्री किफायती हवाई सफर कर चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, योजना आम नागरिकों के लिए क्षेत्रीय हवाई यात्रा को सुलभ बनाने के अपने मूल उद्देश्य में सफल रही है।
मुख्य उपलब्धियाँ
फैक्टशीट के अनुसार, उड़ान योजना ने देशभर में 90 हवाई अड्डों — जिनमें 2 जल हवाई अड्डे और 15 हेलीपोर्ट शामिल हैं — को आपस में जोड़ा है और 625 मार्गों को परिचालन में लाया है। इस योजना ने दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों को देश के विमानन नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में आर्थिक विकास, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाने में भी योगदान दिया है।
गौरतलब है कि भारत में हवाई अड्डों का नेटवर्क 2014 में 74 से बढ़कर 2024 में 159 हो गया — यानी एक दशक में संख्या दोगुने से अधिक हो गई।
अगले चरण का खाका
मूल योजना की सफलता के आधार पर, अगले चरण का लक्ष्य आने वाले दशक में 120 नए गंतव्यों को जोड़ना और 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों के लिए किफायती हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है। इस चरण में विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र, आकांक्षी जिलों और दूरदराज इलाकों में हेलीपैड व छोटे हवाई अड्डों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
सरकार ने अगले पाँच वर्षों में 50 नए हवाई अड्डे विकसित करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इसमें बिहार में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का निर्माण, पटना हवाई अड्डे का विस्तार और बिहटा में मौजूदा हवाई अड्डे का विकास शामिल है।
वित्तीय प्रोत्साहन और छूट
योजना को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। अब तक कम सेवा वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क को प्रोत्साहित करने के लिए ₹4,023.37 करोड़ की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) राशि वितरित की जा चुकी है।
क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS) के तहत उड़ानों पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क माफ हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) इन उड़ानों पर टर्मिनल नेविगेशन लैंडिंग शुल्क (TNLC) नहीं लगाता, और मार्ग नेविगेशन एवं सुविधा शुल्क (RNFC) में भी छूट मिलती है। पहले तीन वर्षों तक RCS हवाई अड्डों पर विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर उत्पाद शुल्क अधिकतम 2 प्रतिशत निर्धारित है।
राज्यों की भागीदारी
राज्य सरकारों ने भी 10 वर्षों तक ATF पर मूल्य वर्धित कर (VAT) घटाकर 1 प्रतिशत या उससे कम करने और सुरक्षा, अग्निशमन तथा उपयोगिता सेवाएँ रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। एयरलाइंस को कोड-शेयरिंग समझौते करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। फैक्टशीट के अनुसार, इस सहयोगात्मक व्यवस्था ने ऐसा माहौल तैयार किया है जिसमें एयरलाइंस उन क्षेत्रों में भी सेवाएँ देते हुए विकास कर सकती हैं जिनकी लंबे समय से अनदेखी होती रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ारों में से एक है — और सरकार इस योजना को घरेलू माँग को टियर-3 शहरों तक विस्तारित करने के एक रणनीतिक उपकरण के रूप में देख रही है।