भारत में बीएफएसआई डील वैल्यू Q2 2026 में 58% उछली, 3.2 अरब डॉलर पर पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
भारत के बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) सेक्टर में अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में कुल 65 डील्स दर्ज की गईं और इन सौदों की संयुक्त वैल्यू तिमाही आधार पर 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पर पहुँच गई। ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की 14 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह उछाल मुख्यतः एक बड़े रणनीतिक लेनदेन के कारण आई।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के अनुसार, बीएफएसआई सेक्टर की इस तिमाही में समग्र डील वॉल्यूम में 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू में 8 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही। पब्लिक मार्केट गतिविधियों को छोड़कर, सेक्टर ने 2.8 अरब डॉलर मूल्य के 62 एमएंडए और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए — यह वैश्विक अस्थिरता के बावजूद उल्लेखनीय आँकड़ा है।
एमएंडए गतिविधि में जोरदार उछाल
अप्रैल-जून 2026 अवधि में विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदों की संख्या 24 रही और उनकी वैल्यू 1.5 अरब डॉलर पर पहुँची। तिमाही आधार पर एमएंडए वॉल्यूम में 50 प्रतिशत और वैल्यू में पाँच गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई — जो इस सेगमेंट में असाधारण गति को दर्शाती है।
फिनटेक सबसे सक्रिय, पीई/वीसी छोटे सौदों पर केंद्रित
फिनटेक इस तिमाही का सबसे सक्रिय सेगमेंट रहा, जिसमें 1.4 अरब डॉलर मूल्य के 31 सौदे हुए। फाइनेंशियल सर्विसेज और एसेट मैनेजमेंट में 690 मिलियन डॉलर के 16 सौदे दर्ज हुए, जिनकी वैल्यू तिमाही आधार पर लगभग तीन गुना हो गई। प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 1.3 अरब डॉलर मूल्य के 38 सौदे शामिल रहे, हालाँकि ये मुख्यतः छोटे आकार के लेनदेन की ओर झुके रहे।
पब्लिक मार्केट गतिविधि सुस्त
पब्लिक मार्केट मोर्चे पर गतिविधि धीमी रही। एक आईपीओ से 97 मिलियन डॉलर और दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) से 310 मिलियन डॉलर जुटाए गए। यह आँकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों ने सार्वजनिक बाज़ार की तुलना में निजी सौदों को प्राथमिकता दी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर एवं फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, 'निवेश के लिए सतर्क माहौल के बावजूद, कुछ रणनीतिक ट्रांजैक्शन की वजह से बीएफएसआई सेक्टर में 2026 की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे सुधार देखा गया। निवेशकों ने स्केलेबल, प्लेटफॉर्म-आधारित और रेगुलेटेड व्यवसायों को प्राथमिकता देना जारी रखा, जबकि पूंजी लगाने का काम सोच-समझकर किया गया।' अय्यर ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे वैश्विक आर्थिक हालात स्थिर होंगे और कैपिटल मार्केट का दायरा बढ़ेगा, भारत का फाइनेंशियल सर्विसेज इकोसिस्टम दीर्घकालिक रणनीतिक और वित्तीय निवेश आकर्षित करने की मज़बूत स्थिति में बना रहेगा। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता के बावजूद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।