जिनेवा ILC 2025: शोभा करंदलाजे ने नेपाल, अंगोला और मॉरीशस के साथ श्रम सहयोग पर की अहम बैठकें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित 114वें अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (ILC) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए नेपाल, अंगोला और मॉरीशस के समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में कौशल विकास, श्रम गतिशीलता और डिजिटल प्रौद्योगिकी साझाकरण को केंद्र में रखा गया। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह सम्मेलन भारत की बहुपक्षीय श्रम कूटनीति को नई दिशा देने का अवसर बना।
नेपाल के साथ द्विपक्षीय चर्चा
मंत्री करंदलाजे ने नेपाल के युवा, श्रम और रोजगार मंत्री रामजी यादव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में भारत ने अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत नेपाल को प्राथमिकता वाले साझेदार के रूप में रेखांकित किया। मंत्रालय के बयान के अनुसार, नेपाल ने भारत के डिजिटल पोर्टलों की सराहना की और दोनों पक्षों ने कौशल विकास, श्रम गतिशीलता तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी साझाकरण में सहयोग विस्तार पर सहमति जताई।
अंगोला के साथ तकनीकी सहायता का प्रस्ताव
केंद्रीय मंत्री ने अंगोला की लोक प्रशासन, श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री टेरेसा रोड्रिग्स डियास के साथ बैठक में श्रम, रोजगार, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। अंगोला ने भारत के डिजिटल उत्पादों की प्रशंसा करते हुए ज्ञान साझाकरण का अनुरोध किया। बयान के अनुसार, भारत ने अंगोला को रोजगार सेवाओं, श्रमिक पंजीकरण, नौकरियों और कौशल मिलान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिज़ाइन, विकास और संचालन में तकनीकी एवं क्षमता निर्माण सहायता देने की पेशकश की।
मॉरीशस के साथ ऐतिहासिक संबंधों की पुष्टि
करंदलाजे ने मॉरीशस के श्रम एवं औद्योगिक संबंध मंत्री मुहम्मद रजा कासम उतीम के साथ बैठक में दोनों देशों के साझा इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और जन-संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक संबंधों को रेखांकित किया। मॉरीशस ने श्रम एवं रोजगार क्षेत्र में भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में हुई प्रगति की सराहना की, और भारत ने डिजिटल उत्पादों के विकास में निरंतर तकनीकी सहायता का आश्वासन दिया।
पश्चिमी देशों के साथ कुशल श्रम प्रवास पर चर्चा
मंत्रालय के अनुसार, करंदलाजे ने जिनेवा में फ्रांस, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा के श्रम मंत्रियों से भी भेंट की। इन बैठकों में कौशल की पारस्परिक मान्यता और मांग-आधारित कौशल विकास के माध्यम से भारत से कुशल मानव शक्ति के वैध प्रवास के रास्तों पर विचार हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कुशल श्रमिकों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की रणनीति बना रहा है। आने वाले महीनों में इन द्विपक्षीय सहमतियों को औपचारिक समझौतों में बदलने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।