जेपी मॉर्गन CEO जेमी डिमन का बड़ा अनुमान: अगले एक दशक में तीन गुना होगी भारतीय अर्थव्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
जेपी मॉर्गन चेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमन ने 22 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले एक दशक में करीब तीन गुना बड़ी हो सकती है, और इसी संभावना को भाँपते हुए उनकी कंपनी देश में अपने परिचालन का तेज़ी से विस्तार कर रही है। डिमन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक निवेश बैंक भारत को अगले बड़े विकास केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
भारत में जेपी मॉर्गन का विस्तार
रिपोर्टों के अनुसार, डिमन ने बताया कि जेपी मॉर्गन अगले दशक में भारत में अपने कवरेज और परिचालन में तीव्र वृद्धि की उम्मीद रखता है। उन्होंने कहा कि बैंक की रिसर्च टीम फिलहाल करीब 200 भारतीय कंपनियों को कवर करती है, जिसे बढ़ाकर 400 कंपनियों की गहरी रिसर्च और 2,000 कंपनियों की व्यापक कवरेज तक ले जाया जाएगा।
गौरतलब है कि डिमन ने पहली बार 2005 में भारत का दौरा किया था, जब जेपी मॉर्गन के पास देश में महज 6,000 कर्मचारी थे। आज दो दशक बाद, बैंक टेक्निकल क्षेत्रों और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में 60,000 से अधिक पेशेवरों को रोज़गार दे रहा है — जो किसी भी वैश्विक बैंक की भारत में सबसे बड़ी उपस्थितियों में से एक है।
भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर ज़ोर
डिमन ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन से आग्रह किया कि दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप दें। उन्होंने कहा, "मैं चाहूंगा कि यह पूरा हो जाए," और दोनों सरकारों से "बैठकर इसे पूरा करने की कोशिश करने" की अपील की। उन्होंने व्यापार और निवेश नियमों में निरंतरता बनाए रखने को भी अत्यंत आवश्यक बताया।
वैश्विक आर्थिक जोखिमों पर चेतावनी
डिमन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे कई खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, लगातार बनी रहने वाली महंगाई, सरकारों पर बढ़ता कर्ज का बोझ, भू राजनीतिक तनाव और पूंजी की बढ़ती माँग वैश्विक स्थिरता के लिए प्रमुख चुनौतियाँ हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊँचे स्तरों पर बने रह सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और पुनः सैन्यीकरण (remilitarization) से पूंजी की माँग और अधिक बढ़ सकती है — "इनके और बढ़ने की संभावना लोगों की सोच से कहीं ज़्यादा है।"
AI निवेश और उत्पादकता पर दृष्टिकोण
डिमन के अनुसार, AI में तेज़ निवेश से दीर्घकालिक उत्पादकता में वृद्धि और अपस्फीतिकारी (deflationary) दबाव उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि हाइपरस्केलर इकोसिस्टम में खर्च अगले वर्ष लगभग $1 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है, जबकि इस वर्ष यह करीब $700 बिलियन रहा।
भारत की बात करें तो डिमन का यह आकलन ऐसे समय में आया है जब देश दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यदि उनका यह अनुमान सही साबित होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक परिदृश्य में और अधिक केंद्रीय भूमिका निभाएगा।