टाटा संस चेयरमैन चंद्रशेखरन बोले — वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर
सारांश
मुख्य बातें
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) सिम्पोजियम 2026 में कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने मज़बूत घरेलू माँग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को इस आर्थिक दृढ़ता के तीन प्रमुख स्तंभ बताया।
सकारात्मक आर्थिक संकेतक
चंद्रशेखरन ने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है।' उन्होंने ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली खपत और सीमेंट उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मज़बूत माँग को अर्थव्यवस्था की मजबूती के ठोस संकेत बताया। उनके अनुसार, कई व्यापक आर्थिक आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश एक स्थिर और सुदृढ़ स्थिति में है।
उन्होंने विशेष रूप से चार प्रमुख संकेतकों का उल्लेख किया — GDP के 1% से नीचे बना चालू खाता घाटा (CAD), GDP के लगभग 11% के बराबर सेवा निर्यात, मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग क्षेत्र में बेहतर हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की स्थिति। उन्होंने कहा कि ये सभी संकेतक मिलकर एक सकारात्मक आर्थिक परिदृश्य की पुष्टि करते हैं।
विकसित भारत 2047 का विज़न
चंद्रशेखरन ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे, सुदृढ़ संस्थाओं और बौद्धिक संपदा के समर्थन से समावेशी एवं टिकाऊ विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत एवं सटीक विनिर्माण और मानव पूँजी में निवेश अनिवार्य होंगे।
गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंकाओं के बीच भारत की विकास दर पर निवेशकों की पैनी नज़र है।
विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की ज़रूरत
चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस देश ने इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, सटीक मानकों और एक मज़बूत SME (लघु एवं मध्यम उद्यम) इकोसिस्टम के ज़रिए अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को सुदृढ़ किया है।
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि भारत में भी हमें इस तरह के बदलाव की ज़रूरत है।' साथ ही उन्होंने टिकाऊ विनिर्माण को भारत की व्यापक औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं का अभिन्न हिस्सा बनाने की वकालत की।
मध्यम स्तर के उद्यमों में नेतृत्व विकास
चंद्रशेखरन के अनुसार, यह गुणात्मक परिवर्तन केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मज़बूत नेतृत्व विकसित करना उतना ही ज़रूरी है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं में योगदान देने में सक्षम होंगे।
यह ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण संदेश है जब भारत सरकार PLI योजनाओं और मेक इन इंडिया अभियान के ज़रिए विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में जुटी है। चंद्रशेखरन की यह राय नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत दोनों के लिए एक दिशा-संकेत की भूमिका निभा सकती है।