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टाटा संस चेयरमैन चंद्रशेखरन बोले — वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर

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टाटा संस चेयरमैन चंद्रशेखरन बोले — वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर

सारांश

वैश्विक अनिश्चितता के बीच टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का स्पष्ट संदेश — भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत है, लेकिन विकसित भारत 2047 के लिए विनिर्माण में जर्मनी जैसी गुणवत्ता क्रांति की ज़रूरत है। CAD GDP के 1% से नीचे और सेवा निर्यात 11% — ये आँकड़े आश्वस्त करने वाले हैं।

मुख्य बातें

टाटा संस के चेयरमैन एन.
चंद्रशेखरन ने 5 अक्टूबर 2026 को IFQM सिम्पोजियम 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत और स्थिर बताया।
सेवा निर्यात GDP के लगभग 11% और चालू खाता घाटा GDP के 1% से नीचे — प्रमुख सकारात्मक संकेतक।
ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट की मज़बूत माँग को आर्थिक मज़बूती का प्रतीक बताया।
चंद्रशेखरन ने जर्मनी के मॉडल से सीख लेकर भारत के विनिर्माण में गुणवत्ता, नवाचार और SME इकोसिस्टम को मज़बूत करने की वकालत की।
'विकसित भारत 2047' के लिए ऊर्जा सुरक्षा, सटीक विनिर्माण और मानव पूँजी में निवेश को अनिवार्य बताया।

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) सिम्पोजियम 2026 में कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने मज़बूत घरेलू माँग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को इस आर्थिक दृढ़ता के तीन प्रमुख स्तंभ बताया।

सकारात्मक आर्थिक संकेतक

चंद्रशेखरन ने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है।' उन्होंने ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली खपत और सीमेंट उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मज़बूत माँग को अर्थव्यवस्था की मजबूती के ठोस संकेत बताया। उनके अनुसार, कई व्यापक आर्थिक आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश एक स्थिर और सुदृढ़ स्थिति में है।

उन्होंने विशेष रूप से चार प्रमुख संकेतकों का उल्लेख किया — GDP के 1% से नीचे बना चालू खाता घाटा (CAD), GDP के लगभग 11% के बराबर सेवा निर्यात, मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग क्षेत्र में बेहतर हुई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की स्थिति। उन्होंने कहा कि ये सभी संकेतक मिलकर एक सकारात्मक आर्थिक परिदृश्य की पुष्टि करते हैं।

विकसित भारत 2047 का विज़न

चंद्रशेखरन ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे, सुदृढ़ संस्थाओं और बौद्धिक संपदा के समर्थन से समावेशी एवं टिकाऊ विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत एवं सटीक विनिर्माण और मानव पूँजी में निवेश अनिवार्य होंगे।

गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंकाओं के बीच भारत की विकास दर पर निवेशकों की पैनी नज़र है।

विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की ज़रूरत

चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस देश ने इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, सटीक मानकों और एक मज़बूत SME (लघु एवं मध्यम उद्यम) इकोसिस्टम के ज़रिए अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को सुदृढ़ किया है।

उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि भारत में भी हमें इस तरह के बदलाव की ज़रूरत है।' साथ ही उन्होंने टिकाऊ विनिर्माण को भारत की व्यापक औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं का अभिन्न हिस्सा बनाने की वकालत की।

मध्यम स्तर के उद्यमों में नेतृत्व विकास

चंद्रशेखरन के अनुसार, यह गुणात्मक परिवर्तन केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मज़बूत नेतृत्व विकसित करना उतना ही ज़रूरी है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं में योगदान देने में सक्षम होंगे।

यह ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण संदेश है जब भारत सरकार PLI योजनाओं और मेक इन इंडिया अभियान के ज़रिए विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में जुटी है। चंद्रशेखरन की यह राय नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत दोनों के लिए एक दिशा-संकेत की भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उस संदर्भ में देखना ज़रूरी है जिसमें भारत का मैन्युफैक्चरिंग GDP अनुपात वर्षों से 17-18% के दायरे में अटका हुआ है — 25% के लक्ष्य से कोसों दूर। जर्मनी का उदाहरण देना सही दिशा है, पर जर्मनी की सफलता का आधार सिर्फ नीतियाँ नहीं, बल्कि दशकों की वोकेशनल ट्रेनिंग और विश्वविद्यालय-उद्योग साझेदारी है — जो भारत में अभी भी नाममात्र है। सेवा निर्यात का 11% का आँकड़ा उत्साहजनक है, परंतु यह लाभ मुख्यतः कुशल शहरी तबके तक सीमित है; ग्रामीण रोज़गार और विनिर्माण में गुणवत्तापूर्ण नौकरियों की कमी एक ऐसी चुनौती है जिसे कोई भी सिम्पोजियम भाषण अकेले नहीं सुलझा सकता।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एन. चंद्रशेखरन ने भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 5 अक्टूबर 2026 को IFQM सिम्पोजियम में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत और स्थिर है। उन्होंने घरेलू माँग, सेवा निर्यात और बेहतर NPA को इसके प्रमुख कारण बताया।
भारत के किन आर्थिक संकेतकों को चंद्रशेखरन ने सकारात्मक बताया?
उन्होंने चालू खाता घाटे का GDP के 1% से नीचे रहना, सेवा निर्यात का GDP के लगभग 11% होना, मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की बेहतर NPA स्थिति को प्रमुख सकारात्मक संकेतक बताया। ऑटोमोबाइल, क्रेडिट, बिजली और सीमेंट क्षेत्रों की मज़बूत माँग भी इसमें शामिल है।
चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में किस बदलाव की ज़रूरत बताई?
उन्होंने कहा कि भारत को जर्मनी की तर्ज पर गुणवत्ता, सटीकता, नवाचार और मज़बूत SME इकोसिस्टम विकसित करना होगा। उनके अनुसार टिकाऊ विनिर्माण और मध्यम स्तर के उद्यमों में नेतृत्व क्षमता का विकास भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए अनिवार्य है।
'विकसित भारत 2047' के लिए चंद्रशेखरन ने क्या ज़रूरी बताया?
चंद्रशेखरन ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा, सुदृढ़ संस्थाएँ, बौद्धिक संपदा का समर्थन, ऊर्जा सुरक्षा और मानव पूँजी में निवेश अनिवार्य होगा। समावेशी और टिकाऊ विकास को उन्होंने इस विज़न का केंद्र बताया।
IFQM सिम्पोजियम 2026 क्या है और इसमें चंद्रशेखरन ने क्यों भाग लिया?
इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) सिम्पोजियम 2026 नई दिल्ली में आयोजित एक प्रमुख उद्योग-नीति मंच है जो गुणवत्ता प्रबंधन और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता पर केंद्रित है। चंद्रशेखरन ने यहाँ भारत की आर्थिक स्थिति और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
राष्ट्र प्रेस
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