भारत-न्यूजीलैंड FTA से जेम्स और ज्वेलरी निर्यात ₹50 मिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद: GJEPC

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भारत-न्यूजीलैंड FTA से जेम्स और ज्वेलरी निर्यात ₹50 मिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद: GJEPC

सारांश

भारत-न्यूजीलैंड FTA सिर्फ एक व्यापार दस्तावेज़ नहीं — यह रत्न और आभूषण उद्योग के लिए एक नई बाज़ार रणनीति की शुरुआत है। जीरो ड्यूटी के साथ 50 मिलियन डॉलर का लक्ष्य और चीन-थाईलैंड पर बढ़त — गुजरात से राजस्थान तक के कारीगरों के लिए यह समझौता नई उम्मीद लेकर आया है।

Key Takeaways

27 अप्रैल 2026 को PM नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के PM क्रिस लक्सन के नेतृत्व में भारत-न्यूजीलैंड FTA पर हस्ताक्षर हुए। FTA के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले जेम्स और ज्वेलरी उत्पादों पर जीरो ड्यूटी लागू होगी। वर्तमान निर्यात 16.61 मिलियन डॉलर से बढ़कर अगले तीन वर्षों में 50 मिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में रोज़गार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद। चीन और थाईलैंड के मुकाबले कम ड्यूटी से भारत की न्यूजीलैंड बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ेगी।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने 27 अप्रैल 2026 को कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने के बाद जेम्स और ज्वेलरी का द्विपक्षीय निर्यात अगले तीन वर्षों में मौजूदा 16.61 मिलियन डॉलर से बढ़कर 50 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। इस ऐतिहासिक समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के नेतृत्व में सोमवार, 27 अप्रैल को हस्ताक्षर किए गए।

समझौते की मुख्य शर्तें

इस FTA के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले जेम्स और ज्वेलरी उत्पादों पर जीरो ड्यूटी लागू होगी। GJEPC के अनुसार, यह व्यवस्था भारतीय निर्यातकों को चीन और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सीधा शुल्क-लाभ देगी, जो अभी तक इस बाज़ार में अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। गौरतलब है कि यह समझौता ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए FTA के बाद इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।

निर्यात में कितनी बढ़ोतरी संभव

GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा,

Point of View

लेकिन 50 मिलियन डॉलर का लक्ष्य उद्योग का अनुमान है, सरकारी गारंटी नहीं — और यह अंतर महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया FTA के बाद भी जेम्स और ज्वेलरी निर्यात उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ा जितना प्रारंभिक अनुमान थे, जो दर्शाता है कि शुल्क-छूट अकेले पर्याप्त नहीं होती। न्यूजीलैंड एक छोटा बाज़ार है — प्रति व्यक्ति खपत अधिक होने के बावजूद कुल आबादी मात्र 50 लाख है — इसलिए यह विविधीकरण तो है, परंतु बड़े पैमाने पर निर्यात वृद्धि के लिए अमेरिका, EU और खाड़ी देशों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक रणनीतिक होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत-न्यूजीलैंड FTA क्या है और इस पर कब हस्ताक्षर हुए?
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) एक द्विपक्षीय व्यापार संधि है जिस पर 27 अप्रैल 2026 को PM नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के PM क्रिस लक्सन के नेतृत्व में हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सामान पर जीरो ड्यूटी लागू होगी।
FTA से जेम्स और ज्वेलरी निर्यात पर क्या असर पड़ेगा?
GJEPC के अनुसार, जीरो ड्यूटी मिलने से भारत का न्यूजीलैंड को जेम्स और ज्वेलरी निर्यात मौजूदा 16.61 मिलियन डॉलर से बढ़कर अगले तीन वर्षों में लगभग 50 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। यह करीब तीन गुना वृद्धि होगी।
इस FTA से किन राज्यों को सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
GJEPC ने कहा है कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में रोज़गार के नए अवसर बढ़ेंगे, क्योंकि इन्हीं राज्यों में जेम्स और ज्वेलरी उद्योग की सबसे बड़ी इकाइयाँ हैं।
भारत को न्यूजीलैंड बाज़ार में चीन और थाईलैंड से क्या फायदा मिलेगा?
FTA के तहत जीरो ड्यूटी मिलने से भारतीय निर्यातक चीन और थाईलैंड के मुकाबले सस्ते दर पर न्यूजीलैंड बाज़ार में उत्पाद भेज सकेंगे। न्यूजीलैंड में प्रति व्यक्ति ज्वेलरी खपत अधिक होने से यह लाभ और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने इस समझौते पर क्या कहा?
GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि अस्थिर वैश्विक माहौल में लगातार FTA करना उद्योग को नए बाज़ारों में विस्तार करने और किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने में मदद कर रहा है। उन्होंने इसे ऑस्ट्रेलिया FTA के बाद सही समय पर उठाया गया कदम बताया।
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