भारत का PMI अक्टूबर में 4 महीने के उच्चतम स्तर 56.7 पर, निर्यात ऑर्डर में 6 महीनों की सबसे तेज वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में भारत की निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियाँ चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स सितंबर के 55.9 से बढ़कर 56.7 हो गया — जो जून 2026 के बाद की सबसे तेज विस्तार दर है। घरेलू माँग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से मिले मजबूत ऑर्डरों ने विनिर्माण और सेवा, दोनों क्षेत्रों को गति दी है।
मुख्य घटनाक्रम
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की संयुक्त गतिविधियों को मापता है। 50 से ऊपर का स्तर आर्थिक विस्तार का संकेत माना जाता है, और 56.7 का यह आँकड़ा भारत की कारोबारी रफ्तार में ठोस सुधार को दर्शाता है। इसके साथ ही एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अक्टूबर में 54.9 रहा, जो विनिर्माण क्षेत्र में लगातार विस्तार को रेखांकित करता है।
आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने बाजार परिस्थितियों में सुधार और नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी की जानकारी दी। विदेशी माँग विशेष रूप से उल्लेखनीय रही — निर्यात ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डरों की वृद्धि सितंबर के स्तर के आसपास बनी रही, परंतु इस बार सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्यात माँग में आई तेजी रही। उन्होंने बताया कि जून 2025 के बाद यह पहला मौका है जब निर्यात ऑर्डरों में इतनी मजबूत वृद्धि देखी गई है।
भंडारी ने यह भी बताया कि बढ़ती माँग के मद्देनज़र निर्माताओं ने कच्चे माल और तैयार माल दोनों का भंडारण बढ़ाया है। इसके अतिरिक्त उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य पर दबाव लगातार कम हो रहा है — जो महंगाई के मोर्चे पर राहत का स्पष्ट संकेत है।
रोजगार की मिश्रित तस्वीर
हालाँकि रोजगार के मोर्चे पर स्थिति कुछ जटिल बनी हुई है। निजी क्षेत्र में रोजगार वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने लगातार नौ महीनों तक कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बाद इस बार नई भर्तियाँ लगभग रोक दीं। दूसरी ओर विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ा, लेकिन यह वृद्धि सीमित रही।
कई कंपनियों का मानना है कि मौजूदा कर्मचारी संख्या फिलहाल काम के दबाव को संभालने के लिए पर्याप्त है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कारोबारी गतिविधियाँ तेज हैं — यह संकेत देता है कि कंपनियाँ उत्पादकता बढ़ाकर माँग को पूरा कर रही हैं।
परिचालन दक्षता में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार लंबित कार्यभार (बैकलॉग) में लगातार तीसरी बार गिरावट दर्ज की गई, और यह गिरावट पिछले साढ़े छह वर्षों में संयुक्त रूप से सबसे तेज रही। इसका अर्थ है कि कंपनियाँ काम को पहले की तुलना में अधिक कुशलता से निपटा रही हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी स्थिरता बनाए रखने में सफल रही है। महंगाई दबावों में कमी और निर्यात माँग में उछाल एक साथ आना भारत के लिए सकारात्मक संयोजन है।
आगे की संभावनाएँ
पीएमआई आँकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की कारोबारी गतिविधियाँ वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में मजबूत बनी रह सकती हैं। निर्यात ऑर्डरों में आई तेजी और महंगाई में नरमी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के आगामी निर्णयों को भी प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या यह गति नवंबर और दिसंबर में भी बनी रहती है।