भारत सेवा क्षेत्र PMI अक्टूबर में 55.8 पर, 4 महीने का उच्चतम; मजबूत घरेलू मांग से कारोबारी गतिविधियों में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के सेवा क्षेत्र ने अक्टूबर 2026 में चार महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की, जब HSBC के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सेवा PMI सितंबर के 55.2 से बढ़कर 55.8 पर पहुँच गया। मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डरों में उछाल ने इस विस्तार को गति दी, जो लंबे समय से स्थापित 50 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है।
मुख्य आंकड़े और संकेतक
PMI में 50 से ऊपर का स्तर आर्थिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है। अक्टूबर 2026 का 55.8 का स्तर न केवल तटस्थ सीमा से काफी ऊपर रहा, बल्कि सेवा क्षेत्र के दीर्घकालिक औसत को भी पार कर गया। इसके साथ ही सेवा और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों को मिलाकर तैयार समग्र PMI (कंपोजिट PMI) सितंबर के 55.9 से बढ़कर 56.2 पर पहुँच गया — यह भी चार महीने की सबसे ऊँची रफ्तार है।
एक सकारात्मक संकेत यह भी रहा कि इनपुट लागत मुद्रास्फीति अगस्त 2020 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। सेवा प्रदाताओं द्वारा ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्कों में वृद्धि की गति भी जून के बाद सबसे धीमी रही, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कारोबारी परिस्थितियों में 'सतर्क सुधार' देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि कुल मांग मजबूत बनी रही, लेकिन निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रही — जो वैश्विक माँग में कुछ नरमी का संकेत देती है।
भंडारी ने यह भी कहा कि इनपुट और आउटपुट दोनों कीमतों में वृद्धि जारी रही, परंतु इसकी गति सितंबर की तुलना में कम रही, जिससे मुद्रास्फीति के दबाव में कुछ राहत के संकेत मिले हैं।
क्षेत्रवार प्रदर्शन
PMI सर्वेक्षण के अनुसार, सेवा अर्थव्यवस्था के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में नए कारोबार और उत्पादन में तेज वृद्धि दर्ज की गई। वित्त एवं बीमा क्षेत्र सबसे आगे रहा, जबकि रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र अपेक्षाकृत पीछे रहा।
आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में बिक्री वृद्धि का मुख्य स्रोत घरेलू बाज़ार रहा। भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों की मांग ने सेवा क्षेत्र के विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाई।
रोज़गार और लंबित कार्य
ताज़ा आंकड़ों से यह भी सामने आया कि सेवा क्षेत्र की कंपनियाँ लंबित कार्यों को तेज़ी से पूरा करने में सफल रहीं। पिछले चार महीनों में तीसरी बार अधूरे कार्यों की मात्रा में कमी दर्ज की गई। हालाँकि यह गिरावट सीमित रही, जिसके चलते अक्टूबर में रोज़गार वृद्धि की गति थोड़ी धीमी पड़ी।
गौरतलब है कि सेवा क्षेत्र में महंगाई का दबाव विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में कम रहा, जो लागत नियंत्रण के मामले में सेवा उद्योग की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
आगे का परिदृश्य
भविष्य को लेकर सर्वेक्षण में शामिल सेवा प्रदाताओं ने अगले 12 महीनों में उत्पादन और कारोबार में और वृद्धि की उम्मीद जताई है। यह आशावाद ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू खपत एक मजबूत आधार बनी हुई है। आने वाले महीनों में यदि इनपुट लागत दबाव नियंत्रण में रहा, तो उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को राहत मिल सकती है।