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भारत सेवा क्षेत्र PMI अक्टूबर में 55.8 पर, 4 महीने का उच्चतम; मजबूत घरेलू मांग से कारोबारी गतिविधियों में तेजी

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भारत सेवा क्षेत्र PMI अक्टूबर में 55.8 पर, 4 महीने का उच्चतम; मजबूत घरेलू मांग से कारोबारी गतिविधियों में तेजी

सारांश

भारत का सेवा PMI अक्टूबर में 55.8 पर पहुँचकर चार महीने के उच्चतम स्तर पर आया। घरेलू मांग मजबूत है, इनपुट लागत अगस्त 2020 के बाद सबसे कम — लेकिन निर्यात ऑर्डर फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रफ्तार से बढ़े, जो वैश्विक नरमी की चेतावनी देते हैं।

मुख्य बातें

भारत के सेवा क्षेत्र PMI ने अक्टूबर 2026 में 55.8 का स्तर छुआ — सितंबर के 55.2 से ऊपर और 4 महीने का उच्चतम ।
कंपोजिट PMI (सेवा + विनिर्माण) सितंबर के 55.9 से बढ़कर 56.2 पर पहुँचा — 4 महीने में सबसे तेज कुल आर्थिक विस्तार।
इनपुट लागत मुद्रास्फीति अगस्त 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर; शुल्क वृद्धि जून के बाद सबसे कमजोर।
वित्त एवं बीमा क्षेत्र सबसे अग्रणी रहा; रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज अपेक्षाकृत पीछे।
निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी, जो वैश्विक माँग में नरमी का संकेत देती है।
सेवा कंपनियाँ अगले 12 महीनों में कारोबार विस्तार को लेकर आशावादी।

भारत के सेवा क्षेत्र ने अक्टूबर 2026 में चार महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की, जब HSBC के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सेवा PMI सितंबर के 55.2 से बढ़कर 55.8 पर पहुँच गया। मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डरों में उछाल ने इस विस्तार को गति दी, जो लंबे समय से स्थापित 50 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है।

मुख्य आंकड़े और संकेतक

PMI में 50 से ऊपर का स्तर आर्थिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है। अक्टूबर 2026 का 55.8 का स्तर न केवल तटस्थ सीमा से काफी ऊपर रहा, बल्कि सेवा क्षेत्र के दीर्घकालिक औसत को भी पार कर गया। इसके साथ ही सेवा और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों को मिलाकर तैयार समग्र PMI (कंपोजिट PMI) सितंबर के 55.9 से बढ़कर 56.2 पर पहुँच गया — यह भी चार महीने की सबसे ऊँची रफ्तार है।

एक सकारात्मक संकेत यह भी रहा कि इनपुट लागत मुद्रास्फीति अगस्त 2020 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। सेवा प्रदाताओं द्वारा ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्कों में वृद्धि की गति भी जून के बाद सबसे धीमी रही, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कारोबारी परिस्थितियों में 'सतर्क सुधार' देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि कुल मांग मजबूत बनी रही, लेकिन निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रही — जो वैश्विक माँग में कुछ नरमी का संकेत देती है।

भंडारी ने यह भी कहा कि इनपुट और आउटपुट दोनों कीमतों में वृद्धि जारी रही, परंतु इसकी गति सितंबर की तुलना में कम रही, जिससे मुद्रास्फीति के दबाव में कुछ राहत के संकेत मिले हैं।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

PMI सर्वेक्षण के अनुसार, सेवा अर्थव्यवस्था के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में नए कारोबार और उत्पादन में तेज वृद्धि दर्ज की गई। वित्त एवं बीमा क्षेत्र सबसे आगे रहा, जबकि रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र अपेक्षाकृत पीछे रहा।

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में बिक्री वृद्धि का मुख्य स्रोत घरेलू बाज़ार रहा। भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों की मांग ने सेवा क्षेत्र के विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाई।

रोज़गार और लंबित कार्य

ताज़ा आंकड़ों से यह भी सामने आया कि सेवा क्षेत्र की कंपनियाँ लंबित कार्यों को तेज़ी से पूरा करने में सफल रहीं। पिछले चार महीनों में तीसरी बार अधूरे कार्यों की मात्रा में कमी दर्ज की गई। हालाँकि यह गिरावट सीमित रही, जिसके चलते अक्टूबर में रोज़गार वृद्धि की गति थोड़ी धीमी पड़ी।

गौरतलब है कि सेवा क्षेत्र में महंगाई का दबाव विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में कम रहा, जो लागत नियंत्रण के मामले में सेवा उद्योग की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाता है।

आगे का परिदृश्य

भविष्य को लेकर सर्वेक्षण में शामिल सेवा प्रदाताओं ने अगले 12 महीनों में उत्पादन और कारोबार में और वृद्धि की उम्मीद जताई है। यह आशावाद ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू खपत एक मजबूत आधार बनी हुई है। आने वाले महीनों में यदि इनपुट लागत दबाव नियंत्रण में रहा, तो उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को राहत मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक विरोधाभास छिपा है — निर्यात ऑर्डर फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रफ्तार से बढ़े, जो बताता है कि यह उछाल वैश्विक माँग पर नहीं, बल्कि घरेलू माँग पर टिका है। यह दीर्घकालिक रूप से कमज़ोर नींव है, क्योंकि भारत की सेवा निर्यात वृद्धि — विशेषकर IT और BPO में — वैश्विक कारोबारी माहौल पर निर्भर करती है। इनपुट लागत में गिरावट राहत देती है, परंतु रोज़गार वृद्धि की धीमी पड़ती गति यह भी संकेत देती है कि कंपनियाँ अभी नई भर्तियों में सतर्क हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह विस्तार अगले तिमाही में भी बना रह पाता है, जब वैश्विक ब्याज दर परिदृश्य और पश्चिमी बाज़ारों की माँग स्पष्ट होगी।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का सेवा क्षेत्र PMI अक्टूबर 2026 में कितना रहा?
HSBC के आंकड़ों के अनुसार, भारत का सेवा क्षेत्र PMI अक्टूबर 2026 में 55.8 पर पहुँचा, जो सितंबर के 55.2 से अधिक और पिछले चार महीनों का सर्वोच्च स्तर है। 50 से ऊपर का स्तर सेवा क्षेत्र में विस्तार को दर्शाता है।
PMI में 50 का स्तर क्यों महत्वपूर्ण है?
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स में 50 का स्तर तटस्थ माना जाता है — इससे ऊपर का अंक आर्थिक गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है। अक्टूबर में 55.8 का स्तर मजबूत विस्तार का संकेत है।
कंपोजिट PMI और सेवा PMI में क्या अंतर है?
सेवा PMI केवल सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मापता है, जबकि कंपोजिट PMI सेवा और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों को मिलाकर समग्र आर्थिक स्थिति का आकलन करता है। अक्टूबर में कंपोजिट PMI 56.2 पर पहुँचा, जो भी 4 महीने का उच्चतम स्तर है।
अक्टूबर में सेवा क्षेत्र में कौन-सा क्षेत्र सबसे आगे रहा?
PMI सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त एवं बीमा क्षेत्र नए कारोबार और उत्पादन वृद्धि में सबसे अग्रणी रहा। रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र अपेक्षाकृत पीछे रहे।
निर्यात ऑर्डरों की धीमी वृद्धि का क्या मतलब है?
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रही। इसका अर्थ है कि सेवा क्षेत्र की वृद्धि मुख्यतः घरेलू माँग पर निर्भर है, न कि वैश्विक माँग पर — जो वैश्विक अनिश्चितता का संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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