भारत का विनिर्माण PMI अक्टूबर में 54.7 पर, निर्यात ऑर्डर में 6 महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने अक्टूबर 2026 में लगातार मजबूत विस्तार बनाए रखा। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 54.7 पर दर्ज किया गया — जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है और क्षेत्र के दीर्घकालिक औसत से भी बेहतर। हालाँकि यह सितंबर के 55.1 के स्तर से कुछ नीचे आया, लेकिन आंकड़ों के अनुसार घरेलू और विदेशी दोनों मोर्चों पर माँग का विस्तार जारी रहा।
मुख्य आँकड़े और PMI का अर्थ
PMI में 50 से ऊपर का स्तर विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत होता है, जबकि 50 से नीचे गिरावट को दर्शाता है। S&P Global के संकलित आंकड़ों पर आधारित यह सर्वेक्षण बताता है कि अक्टूबर का 54.7 का आँकड़ा क्षेत्र के ऐतिहासिक औसत से ऊपर रहा, जो भारतीय विनिर्माण की बुनियादी मजबूती को रेखांकित करता है।
उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि की रफ्तार सितंबर की तुलना में मामूली रूप से धीमी रही। गौरतलब है कि सितंबर में नए ऑर्डर में पिछले सात महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी हुई थी — इसलिए अक्टूबर की थोड़ी मंदी एक ऊँचे आधार के मुकाबले आई है।
निर्यात ऑर्डर में उछाल — 6 महीनों की सर्वश्रेष्ठ वृद्धि
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत माँग मिलने के कारण नए निर्यात ऑर्डर में छह महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उत्पादन में भी अच्छी वृद्धि हुई।
भारतीय विनिर्माण कंपनियों को बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, नेपाल, ओमान, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों से ऑर्डर प्राप्त हुए। यह विविधता भारतीय निर्यात की भौगोलिक पहुँच के विस्तार को दर्शाती है।
कच्चे माल का भंडारण और रोजगार
सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माण कंपनियों ने अक्टूबर में पिछले आठ महीनों की सबसे तेज रफ्तार से कच्चे माल का भंडार बढ़ाया। इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितता और भविष्य में आपूर्ति बाधाओं से बचने की तैयारी प्रमुख कारण रहे।
रोजगार के मोर्चे पर, कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रखी, हालाँकि नई भर्तियों की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी रही। साथ ही, भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को लेकर कंपनियों का भरोसा कुछ कमजोर हुआ।
मूल्य दबाव में कमी
प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की लागत में बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन सामग्री और तैयार वस्तुओं की कीमतों पर दबाव सितंबर की तुलना में कम हुआ। यह मुद्रास्फीति के नजरिए से एक सकारात्मक संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय विनिर्माण का लागत दबाव में कमी आना क्षेत्र की लचीलापन क्षमता को दर्शाता है।
आगे की संभावनाएँ
सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बेहतर माँग, नए ग्राहकों से ऑर्डर और सफल प्रचार अभियानों को कारोबारी वृद्धि की प्रमुख वजह बताया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक विनिर्माण PMI में मिला-जुला रुझान देखा जा रहा है।
भारत का विनिर्माण PMI लगातार 50 के ऊपर बना रहना इस बात का संकेत है कि घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में माँग और गतिविधियाँ स्थिर विस्तार की राह पर हैं — हालाँकि कारोबारी विश्वास में आई थोड़ी कमी और भर्तियों की धीमी रफ्तार आने वाले महीनों में नजर रखने वाले संकेतक होंगे।