भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई में 53.5 पर स्थिर, निर्यात ऑर्डर में तेज़ उछाल
सारांश
मुख्य बातें
एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में 53.5 पर रहा — जो जून के 54.2 से कुछ कम है, लेकिन लगातार विस्तार के संकेत दे रहा है। एस एंड पी ग्लोबल द्वारा संकलित इस सर्वेक्षण के आँकड़े 3 जुलाई को जारी किए गए। उल्लेखनीय है कि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में वृद्धि का प्रतीक है।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को नए ऑर्डर से लगातार फायदा मिल रहा है और आउटपुट ग्रोथ बनी हुई है। हालाँकि, कुल बिक्री, इनपुट खरीद और रोज़गार जैसे कुछ पैमानों पर वृद्धि की रफ्तार फिर से कुछ धीमी पड़ी। इसके विपरीत, नए निर्यात ऑर्डर में उल्लेखनीय तेज़ी दर्ज की गई — जो इस रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू रहा।
ऑपरेटिंग खर्च में वृद्धि हुई, विशेष रूप से परिवहन लागत में, लेकिन इनपुट लागत में बढ़ोतरी की कुल दर घटकर पाँच महीने के निचले स्तर पर आ गई। इसके परिणामस्वरूप आउटपुट चार्ज में मामूली बढ़ोतरी हुई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'जुलाई में आपूर्तिकर्ताओं के डिलीवरी टाइम का इंडेक्स बढ़ा, जो एक अच्छा संकेत है कि सप्लाई चेन में होने वाली देरी कम हो रही है। हालाँकि, मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव ने इस बात पर नए शक पैदा कर दिए हैं कि ये सुधार कितने लंबे समय तक टिकेंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि इसके जवाब में मैन्युफैक्चरर्स बफर स्टॉक फिर से बना रहे हैं — खरीद की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ इनपुट और तैयार माल, दोनों की इन्वेंट्री में बढ़ोतरी हुई है। भंडारी के अनुसार, 'इससे पता चलता है कि कंपनियाँ आपूर्ति सुरक्षित कर रही हैं और संभावित रुकावटों के जोखिम को कम कर रही हैं।'
मूल्य निर्धारण के मोर्चे पर भंडारी ने कहा कि इनपुट लागत महंगाई में कमी आई, लेकिन आउटपुट कीमतों में महंगाई बढ़ी — जो यह दर्शाता है कि कंपनियाँ अपने मार्जिन की रक्षा के लिए एक बार फिर लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं।
निर्यात बाज़ारों में विस्तार
सर्वेक्षण में बताया गया कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और यूएई से निर्यात ऑर्डर में वृद्धि हुई। यह भौगोलिक विविधता भारत के निर्यात आधार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
आम जनता और उद्योग पर असर
इनपुट लागत में नरमी के बावजूद आउटपुट कीमतों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बना रह सकता है। वहीं, रोज़गार वृद्धि की धीमी रफ्तार मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नई नौकरियों के मोर्चे पर सीमित प्रगति का संकेत देती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग को रोज़गार सृजन का प्रमुख इंजन बनाने पर ज़ोर दे रही है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन की अनिश्चितता आने वाले महीनों में पीएमआई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। अगस्त के पीएमआई आँकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि जुलाई की मामूली नरमी एक अस्थायी ठहराव है या किसी व्यापक मंदी की शुरुआत।