भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI जून में 54.2 पर स्थिर, इनपुट लागत महंगाई में राहत
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने जून में विस्तार की राह बनाए रखी — HSBC फ्लैश इंडिया PMI डेटा के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 54.2 पर दर्ज किया गया, जो 1 जुलाई 2026 को जारी हुआ। 50 से ऊपर का यह आंकड़ा लगातार विस्तार का संकेत देता है, हालांकि नए ऑर्डर और उत्पादन वृद्धि की गति पिछले महीनों की तुलना में धीमी रही।
मुख्य घटनाक्रम
PMI डेटा के अनुसार, जून में नए ऑर्डर और उत्पादन दोनों में वृद्धि दर्ज हुई, लेकिन रफ्तार पहले की तुलना में कम रही। कई निर्माताओं ने मांग में सुधार की सूचना दी, जबकि कुछ ने ग्राहकों की सीमित मांग और बाज़ार प्रतिस्पर्धा को धीमेपन का कारण बताया। निर्यात मांग भी सकारात्मक बनी रही, यद्यपि वृद्धि की गति यहाँ भी मंद रही।
खरीद गतिविधियों में कमी के चलते कच्चे माल का स्टॉक धीमी गति से बढ़ा, जबकि तैयार माल की इन्वेंट्री में गिरावट आई — कंपनियों ने मौजूदा मांग के अनुरूप उत्पादन को समायोजित किया।
इनपुट लागत और महंगाई का दबाव
जून के PMI डेटा में एक उल्लेखनीय सकारात्मक पहलू यह रहा कि इनपुट लागत और आउटपुट मूल्य सूचकांक दोनों में गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, महंगाई का दबाव कम होना इस बात का संकेत है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण आई शुरुआती मूल्य वृद्धि अब थमने लगी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'इस नरमी से पता चलता है कि मध्य पूर्व में चल रहे टकराव की वजह से आई शुरुआती तेजी के बाद अब मांग थोड़ी कम हुई है। आउटपुट, नए ऑर्डर, एक्सपोर्ट ऑर्डर और रोजगार में ग्रोथ धीमी हुई है, जबकि इनपुट और आउटपुट प्राइस इंडेक्स दोनों में गिरावट आई है। इससे पता चलता है कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल कम होने के साथ महंगाई का दबाव भी कम हो रहा है।'
भंडारी ने यह भी रेखांकित किया कि समग्र रूप से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी जारी है — जो सेक्टर की बुनियादी मज़बूती को दर्शाती है।
रोजगार और भविष्य की दिशा
गौरतलब है कि जून में रोजगार वृद्धि जारी रही, भले ही इसकी गति धीमी थी। यह ऐसे समय में आया है जब इससे पहले जारी HSBC फ्लैश PMI डेटा ने संकेत दिया था कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत के निजी क्षेत्र में कुल नए ऑर्डर की वृद्धि मजबूत बनी हुई है। महंगाई दबाव में कमी और स्थिर रोजगार वृद्धि मिलकर संकेत देते हैं कि सेक्टर अगली तिमाही में अधिक संतुलित विस्तार की ओर बढ़ सकता है।